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लुप्त हो रही गौरय्या के प्रति समाजसेवी का जुनून रंग ला रहा है

घर-घर में फुदकने व चहकने वाली गौरय्या चिड़िया के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए समाजसेवी शोभाराम कश्यप ने जब संकल्प लिया तो लोगों ने भी उनके इस अभियान में खासी दिलचस्पी जगाई। आज शोभाराम कश्यप ने 303वां घड़ा कटरा मोहल्ले में बांधा। कटरा में रहने वाले शान्तनु कुमार चतुर्वेदी एवं सन्दीप श्रीवास्तव के मकान के बीचोंबीच एक घड़ा बांधकर गौरय्या चिड़ियों के पीने के पानी की व्यवस्था की। शान्तनु कुमार चतुर्वेदी ने उस घड़े में पानी भरा और रोजाना इस घड़े में पानी भरने का संकल्प भी लिया। उन्होंने भी शोभाराम कश्यप के इस प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

शोभाराम कश्यप् ने बाग-बगीचों और सड़क के किनारे लगे पेड़ों में मिट्टी के घड़े खरीदकर उसे बांधा तो लोगों ने रोजाना उनमें पानी भरकर उनके इस अभियान को मजबूती दी है। शोभाराम कश्यप इसके साथ ही उस घड़े के नीचे जमीन पर गेहूं चावल इत्यादि भी बिखेर देते हैं। लुप्त हो रही इस चिड़िया के प्रति अजीब जुनून है शोभाराम कश्यप में। वह हर साल गर्मियों में खासकर गौरय्या दिवस में अपनी जेब से पैसा खर्च करके मिट्टी के छोटे-छोटे घड़े खरीद कर पेड़ों में बांधकर दाना-पानी की व्यवस्था करते है।

इस सम्बन्ध में पूछे जाने पर वह बताते है कि तेजी से हो रहे शहरीकरण तथा लोगों की जीवन शैली में बदलाव के कारण घर के आंगन व छतों में चहकने वाली गौरेया की संख्या में कमी आ रही है। जीवन शैली में बदलाव के कारण ही यह प्रजाति विलुप्त होती रही है। इन्हे बचाने के लिए हर किसी को आगे आना चाहिये। गौरतलब है कि शोभाराम कश्यप राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस में अपने हाथों से लकड़ी से तिरंगा बनाकर बांटते है। उनके इस देश प्रेम के लिए कई बार विभिन्न संगठनों ने सम्मानित भी किया है।
 

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