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वैशाख शुक्ल अष्टमी पर सदियों पुरानी परम्परा का हुआ निर्वहन

वैशाख शुक्ल अष्टमी पर श्री श्यामा जी महारानीजी के मंदिर में बटता है मीठा शरबत

श्री बाईजूराज महारानी जी मंदिर मे वैशाख शुक्ल अष्टमी अन्तर्धान की तिथि के रूप में मनाया जाता है। सोमवार के दिन सुबह से ही मंदिर में लोगों की खासी भीड देखी गई। आज के दिन निजला वृत रखने की परम्परा सदिय¨ से चली आ रही है। परम्परानुसार शरबत का भोग श्री श्यामाजी महारानी जी को अर्पित कर फिर सभी निजला व्रत श्रद्धालु सुन्दरसाथ व उपस्थित श्रृद्धालु सुंदरसाथ को प्रसाद के रूप में मीठा शरबत जोकि शक्कर एवं काली मिर्च के मिश्रण से बनाया जाता है, उसी को वितरित किया जाता है। प्रणामी धर्म में श्री मेहराज ठाकुर एवं उनकी अद्र्धांगनी श्री तेजकुवंर जी के दोनों स्वरूप श्याम-श्यामा के हैं।

पन्ना धाम में एक लम्बे अरसे तक समस्त सुन्दरसाथ में साक्षात श्याम-श्यामा जी के इस युगल स्वरूप की पूजा की है। श्री मेहराज ठाकुर महामति प्राणनाथ जी कहलाये एवं श्री तेजकुवर जी बाईजूराज के रूप में प्रतिष्ठित हुई जिन्हे श्यामाजी महारानी भी कहा गया है। बुधवार वैशाख शुक्ल अष्टमी पर उनके अन्तर्धान की तिथि पर महारानी जी के मंदिर में दोपहर 12 बजे से प्रणामी समाज के सैकडो सुन्दरसाथ जिसमे महिलायें, पुरूष बच्चों के साथ-साथ श्री 108 प्राणनाथ जी मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी, न्यासी सभी पहुचते हैं। इसके साथ प्रणामी धर्म के अनुयायी जो पूरे देश में फैले हुये हैं उनमें से कुछ अनुयायी भी इस दिवस क¨ मनाने पन्नाजी पहुचते हैं । अन्तर्धान दिवस मनाने मंदिर पहुचे समस्त श्रद्धालु सुन्दरसाथ श्री श्यामजी की कृपा को बार-बार स्मरण करते हैं व श्यामा जी महारानी जी के मंदिर में करूण रस में विरह के भजन गाये जाते हैं ।

विरह के भजन के गायन के पश्चात दोपहर लगभग 2 बजे मीठे शरबत को चरणामृत के रूप में बांटते हैं जिस प्रसाद को पाकर सुन्दरसाथ अपना निर्जला व्रत पूरा करते हैं। उनके अन्तर्धान की तिथि को निर्जला व्रत रखने की परम्परा का परिपालन करते हैं, कुछ श्रद्धालु आज के दिन मौन व्रत भी रखते हैं। भीषण गर्मी में भी सैकड़ों की संख्या में उपस्थित रहे श्रद्धालु श्री बाईजूराज महारानी जी के मंदिर में आज अन्तर्धान की तिथि वैशाख शुक्ल अष्टमी पर भीषण गर्मी के बावजूद भी सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओ ने पहुचकर सदिय¨ पुरानी परम्परा का निर्वहन करते हुये पाठ-पूजन कर धर्मलाभ लिया।

मंदिर में आज के दिन चढ़ायी जाती है शक्कर व कालीमिर्च मंदिर में प्रसाद के रूप में बटने वाले शरबत में सभी श्रद्धालुओ का योगदान रहता है। आज जितने भी श्रद्धालु मंदिर पहुचते हैं वह अपने साथ शक्कर एवं कालीमिर्च लेकर जाते हैं और श्री श्यामाजी के सामने अर्पित कर इस परम्परा में अपना सहयोग देते हैं। आज के दिन मंदिर में लगभग एक से दो क्विंटल शक्कर का शरबत बनता है जो कि मंदिर प्रांगण में स्थित कुयें के स्वच्छ जल से बनाया जाता है जिसमे काली मिर्च पीसकर डाली जाती है तो उसका स्वाद लाजवाब हो जाता है । वर्ष में एक बार श्री बाईजूराज मंदिर में बंटने वाले इस शरबत में इतना स्वाद होता है कि श्रद्धालु भी जी भरके शरबत पीते है।

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