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झाँसी विकास प्राधिकरण से करोडो की जमीन का घोटाला

*झाँसी विकास प्राधिकरण के जेई और अधिकारियो की मिलीभगत से करोडो जमीन डकार गए.....*

झांसी  विकास प्राधिकरण द्वारा 25 वर्ष पहले बसाया गया वीरांगना नगर में अधिकारियों की मिली भगत से करीब 30 करोड़ रुपए से ज्यादा की जमीन घोटाले का मामला प्रकाश में आया है। ये एक आरटीआई से हुआ खुलासा।

1992 में कानपुर रोड पर एक कॉलोनी विकसित की थी। जिसका नाम पिछोर आवासीय कॉलोनी रखा गया और बाद में स्थानीय लोगों की माँग पर इस कालौनी का नाम वीरांगना नगर रखा गया। इस कॉलोनी में झांसी विकास प्राधिकरण ने आवासीय प्लॉट्स और व्यवसायिक प्लॉट्स के अलावा स्कूल व पार्कों के लिए नियमानुसार जमीनें आरक्षित की थी।

झाँसी मेडिकल कॉलेज के पास बसे वीरांगना नगर के पास दूर-दूर तक आबादी नही थी। इसी दौरान वर्ष 1999 में झांसी आये कुलपति प्रो रमेश चंद्रा ने बुन्देलखण्ड यूनिवर्सिटी की कायापलट कर दी। जिसके बाद कानपुर रोड़ के आस-पास तेजी से विकास होने लगा और जमीनों के दाम आसमान छूने लगें। मेडिकल कॉलेज और बुन्देलखण्ड युनीवर्सिटी के बीच बनी यह कालोनी पैसे वालों के लिये व्यापार के लिये पंसदीदा जगह बन गयी। इसी का फायदा झांसी विकास प्राधीकरण में बेठें जे.ई और अधिकारियों ने उठाया और जरूरतमदं पूजीपतियों कों वीरांगना नगर में स्कूल के लिये आरक्षित जमीन चोरी छुपे मोटी रकम लेकर बेच दी गयी।

यह खुलासा एक आर.टी.आई से हुआ है। जिसमे वीरांगना नगर में 4 स्कूलो के लिये करीब 5917 वर्ग मीटर जमीन आरक्षित होना बताया गया है। ब्लॉक् ई में तो स्कूल बन गया, लेकिन बाकी जमीने जेई चाट गए। जानकारी के  अनुसार वीरांगना नगर में स्कूल के लिए आरक्षित एक बड़ी जमीन को झांसी के 4 नामी पूंजीपतियों को बेच दिया गया। किसी को पता न चले इस कॉलोनी का ले आउट प्लान ही गायब कर दिया गया। वीरांगना नगर का ले आउट प्लान कहॉ है इस बारे में कोई भी सही जानकारी झांसी विकास प्राधीकरण देने से बच रहा है। इस ले आउट प्लान से ही वीरांगना नगर में स्कूलों की जमीन की लोकेशन मिल सकती है। विभाग के अधिकारी कहते है कि वीरांगना नगर का ले-आउट प्लान पूर्व जे.ई अपने साथ ले गया। इस घोटाले सम्बन्ध में जब एक शिकायतकर्ता ने शिकायत की तो उस शिकायत पर विभाग के जे.ई और सचिव की जॉच चौकाने वाली थी। स्कूल की जमीन पर जॉच करने की बजाये स्टाम्प शुल्क की जॉच कर डाली। जिससे यह अन्दाजा लगाना मुशिकल नही कि वीरांगना नगर में बड़ा घोटाला जमीनों के आवंटन में किया गया। सबसे बड़ी हैरानी इस बात की है कि विकास प्राधीकरण का उपाघ्यक्ष स्वयं जिलाधिकारी महोदय होते है। ऐसे में विभाग में इतने बड़े घोटाले की जॉच कैसे और कौन करेगा। यह बड़ी बात है।

इतना ही नही जे.डी.ऐ के उपाध्यक्ष और सचिवोें की मिली भगत से वीरांगना नगर में आवासीय प्लाटो पर बड़े-बड़े व्यवसायिक कॉम्पलेक्स और आस्पताल बन कर खड़े हो गयें।जबकि नियमानुसार विकास प्राधीकरण द्वारा बसाई गयी कालौनी में आवासीय प्लाटों पर व्यवसायिक भवन नही बनायें जा सकते है। ऐसा करने पर विकास प्राधीकरण को यह अधिकार है कि उक्त प्लाट की रजिस्ट्री तक को रदद् कर दें। झाँसी में पूर्व में तैनात रहे तेजतर्रार जिलाधिकारी करण सिंह चौहान ने ऐसे मामलों में काफी हद तक सख्ती बरती थी। जिसके बाद हरकत में आए विकास प्राधिकरण ने आनन-फानन में भारी संख्या में लोगों को नोटिस थमा दिए थे।

झांसी विकास प्राधिकरण में जमीन घोटाले के मामले में झांसी की कमिश्नर कुमुदलता श्रीवास्तव ने कहा कि मामला गंभीर है। इसकी जांच कराने के बाद जो तथ्य सामने आएंगे उसके बाद ही नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। जेडीए के सचिव ने क्या कहा की जमीन घोटाले पर जब जेडीए के सचिव केहरी सिंह से बात की गई तो उन्होंने इस मामले में कुछ भी कहने से मना कर दिया।

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