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हिंदुत्व सबसे उदार धर्म है

साहित्य अकादमी मण्प्रण्संस्कृति परिषद भोपाल के स्थानीय उपक्रम सागर पाठक मंच की 53 वीं मासिक गोष्ठी श्रुतिमुद्रा कला गुरुकुलए तहसीली में संपन्न हुई।सुप्रसिद्ध कन्नड़ लेखक भैरप्पा के चर्चित उपन्यासष्आवरणष् पर समीक्षा आलेख वाचन करते हुए समालोचिका डॉण्सुजाता मिश्र ने कहा कि ष्आवरण ष्एक प्रयास है इतिहास पर डाले गए झूठए कपट और छल के पर्दे को गिराने का। और इतिहास पर यह आवरण अज्ञानता या भूलवश नहीं पड़ा। यह तो बाकायदा अभिव्यक्ति की आजादी के नाम परए संगठित रूप सेए वैचारिक गिरोह बनाकर रचा गया है। उन्होंने कहा कि आवरण जैसा उपन्यास लिखने के लिए एक लेखक को गंभीर अध्येयता होने के साथ.साथ बहुत साहसी होना भी जरूरी है। क्योंकि सच को लिखने का साहस या चली आ रही धारणाओं से अलग लिखने का साहस हर लेखक में नहीं होता। डॉण्मनीष झा ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि आध्यात्म को भगवान की आवश्यकता नहीं । जो हमारा नैतिक और मानसिक स्तर होता है हम उसी के अनुरूप भगवान का सृजन कर डालते हैं।

मुगल काल में मंदिरों का ध्वंस करना और जजिया जैसे कर इस्लाम को बढ़ाने के लिए लगाए गए थे। डॉण्आशीष द्विवेदी ने कहा कि इतिहास पर जो झूठा आवरण लगा था उसे  अब सत्य के रूप में  सामने लाया जा रहा है । पूर्व में हिंदुओं पर अत्याचार हुए उन्हें सामने नहीं लाया गया। वामपंथ पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि वह विकृत हो चुका है। उनकी विचारधारा में ष्मैं हीष्सब कुछ है। जबकि हमारी विचारधारा ष्मैं भीष् को अभिव्यक्त करती है। माधव चंद्रा ने भारत के इतिहास की सच्चाई से नई पीढ़ी को गोष्ठियों के माध्यम से परिचित कराने की आवश्यकता पर बल दिया। डॉण् महेश तिवारी ने कहा कि जहां विदेशी लोग भारतीय संस्कृति को अपना रहे हैं वहीं हम पश्चिमी संस्कृति की ओर दौड़ लगा रहे हैं । निर्मल चंद निर्मल ने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि हम साहित्यकार भी युवाओं के लिए कोई आकर्षण पैदा नहीं कर पा रहे हैं।विश्व हिन्दू परिषदएसागर के अध्यक्ष अजय दुबे ने अपने उद्बोधन में तीव्र हस्तक्षेप करते हुए पाठक मंच के वैचारिक पक्ष को उद्वेलित कर दिया।

अध्यक्षीय आसंदी से बोलते हुए प्रोण् सुरेश आचार्य ने कहा कि हिंदुत्व अत्यंत उदार धर्म है। उसकी अनेक शाखाएं हैं ।वे सब हिंदुत्व से निकली हैं।जितनी स्वतंत्रता हिंदुत्व देता है एउतना कोई अन्य धर्म नहीं।आप अपना देवता चुनने के लिए स्वतंत्र हैं। भारत पर पश्चिमी विचारधारा ने जितना प्रभाव  डाला उतना इस्लाम नहीं डाल पाया। इसलिए भारत में लोकतंत्र कायम है एजबकि पाकिस्तान में दसों बार लोकतंत्र की हत्या की जा चुकी है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजेश पंडित अध्यक्षए साहित्य विचार एवं निर्माण विभाग भाजपा सागर ने अपने उद्बोधन में अपने नए दायित्व के निर्वहन में नगर के साहित्य जगत से पूर्ण सहयोग की आकांक्षा व्यक्त की। विशिष्ट अतिथि डॉण् कविता शुक्ला ने भी अपने विचार रखे।

गोष्ठी के प्रारंभ में केंद्र संयोजक उमाकांत मिश्र ने पुस्तक एवं कार्यक्रम का परिचय दिया। संचालन डॉण् अमर कुमार जैन ने किया तथा आभार  नलिन जैन बिट्टी ने माना।

इस अवसर पर मुन्ना शुक्ला, किशनलाल पाहवा, डॉ श्याममनोहर सिरोठिया, डॉ गजाधर सागर, हरीसिंह ठाकुर, अंबिका यादव,  डॉ कुसुम सुरभि,  डॉ वर्षा सिंह,  डॉ सुश्री शरद सिंह, कपिल बैसाखिया, ज्ञान बुंदेला, सुबोध श्रीवास्तव, वृन्दावन राय सरल, क्रांति जबलपुरी, रमेश दुबे, आलोक राज जैन, डॉ ऋषभ भारद्वाज, डॉ आर आर पांडे, आर के तिवारी, आनंद मिश्र अकेला, मुकेश तिवारी, संजय भाटी, कुमिल्की असाटी की उपस्थिति उल्लेख रही ।

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