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फर्श सेे अर्श तक रंजना उपाध्याय

राजनीति की दुनिया में पुरूषों के बढ़ते कदम बहुत देखे गए। लेकिन जब कोई महिला फर्श से शुरूआत कर अर्श तक पहुंचती है, तब आधुनिक युग में एक इतिहास रचती हुई बढ़ती है। बुंदेलखण्ड में महिलाओं की बदतर स्थिति से सभी वाकिफ हैं कि मर्यादामर्दोत्तम मानसिकता के मर्द चार दीवारी से बाहर ही महिलाओं को नहीं निकलने देते। उसी बुंदेलखण्ड को कर्मभूमि बना चुकी भाजपा नेत्री रंजना उपाध्याय ने जिले स्तर से शुरूआत कर भाजपा संगठन की राजनीति में प्रदेश स्तर पर बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। सतत लगन व प्रयास का परिणाम कहा जाएगा कि सरल पथ से प्रशस्त होते हुए, उन्हें भाजपा का प्रदेश उपाध्यक्ष बनने का अवसर मिला।

ना सिर्फ रंजना उपाध्याय अपितु बुंदेलखण्ड की हर महिला के लिए उनका जीवन प्रेरणास्रोत है। खालिस मर्दों के लिए चिंतन व मंथन का समय है कि यदि विश्वास जताकर स्वतंत्रता प्रदान की, तो हर महिला के अंदर अपार प्रतिभा छिपी हुई है। हालांकि मंजिल इतनी आसान नहीं होती। चूंकि रंजना उपाध्याय अपने छोटे भाई का आत्मीय दर्जा प्रदान किए रहीं। इसलिये उनके इर्द गिर्द रहने का अवसर मिलता रहा। एकाध बार स्वयं देखा कि स्थानीय मर्यादामर्दोत्तम प्रकार मर्दों से उन्हें "तू तू मैं मैं" करनी पड़ी। उस वक्त महसूस हुआ कि एक महिला हार सकती है, हताश होकर घर बैठ सकती है।

किन्तु अब अच्छा लगता है, जब वही अहंता स्वभाव के मर्द उन्हें नतमस्तक होते हैं। यहीं से एक बात और साफ हो जाती कि राजनीति में अच्छे और सच्चे लोगों के लिए जगह आज भी है। सीधे सरल व्यक्ति के लोग सरल रास्ते से चलते हुए मंजिल तय कर सकते हैं। महिला मोर्चा से सफर तय करते हुए, जिले की संयोजक बनने उपरांत प्रदेश मंत्री के बाद एक बार फिर शीर्ष नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताता और बुंदेलखण्ड सहित सम्पूर्ण चित्रकूट के लिए गर्व का विषय है। आशान्वित हूँ कि अधिक ताकत के साथ जनहित कार्यों का निष्पादन अधिक तेज गति से किया जाएगा।



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