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उपनिषद, वेद भारतीय दर्शन की आत्मा हैं

उपनिषद ,वेद भारतीय दर्शन की आत्मा है यह बात बाबूराव पिंपलापुरे व्याख्यानमाला के अंतर्गत रवींद्र भवन में "भारतीय विचार और हम" विषय पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध विचारक,संसद सदस्य, भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी एवं पूर्व राजदूत पवन वर्मा ने कही।अपनी तरह के इस अनूठे व अभिनव संवाद कार्यक्रम कि देश के मशहूर चित्रकार मनीष पुष्केले ने मध्यस्थता की।वर्मा ने भारतीय संस्कृति, भारतीयता, और राष्ट्रवाद पर विस्तार पूर्वक व्याख्यान दिया।भारतीय भाषाओं के संदर्भ में बोलते हुए उन्होंने कहा कि हमें देश की सभी भाषाओं का सम्मान करना होगा।

हिंदी भाषी क्षेत्रों में दक्षिण भारतीय भाषाओं का अध्ययन, सम्मान एवं स्वीकार्यता करनी होगी तब ही हम हिंदी को उचित स्थान दिला सकेंगे उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के प्राइवेट स्कूलों में बहुसंख्यक छात्र हिंदी और संस्कृत का अध्ययन करते हैं। उत्तर भारत में भी इसी तरह दक्षिण भारतीय भाषाओं का अध्यापन किया जाना होगा। सागर की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सागर मेरे लिए तीर्थ है ।सागर देश का निचोड़ है।मेरे पिताजी की पदस्थापना ब्रिटिश काल में डिस्ट्रिक्ट मेजिस्ट्रेट के तौर पर सागर हुई थी यहां आकर आज मैं कलेक्टर के बंगले को देखने गया जहां हम लोग निवास करते थे। उसे देखकर पुरानी स्मृतियां ताजा हो गई।

इस अवसर पर प्रबुद्ध श्रोताओं द्वारा उनसे प्रश्न भी पूछे गए जिनका उन्होंने समाधान किया। आयोजन के अध्यक्षता कर रहे रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के कुलपति कपिल देव मिश्रा ने अपने बौद्धिक उद्बोधन में कहा कि यह देश पूरी पृथ्वी को परिवार मानकर चलता है। कार्यक्रम का गरिमा अनुरूप  सुसंचालन प्रोफेसर सुरेश आचार्य ने किया तथा डॉ.मीना पिंपलापुरे ने आभार माना।

 

 

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