< भागीरथ की राह ताक रही चन्देलकालीन ऐतिहासिक धरोहरे Hindi News - Breaking News, Latest News in Hindi, हिंदी में समाचार, Samachar - Bundelkhand News दर्जनों ऐतिहासिक धरोहरें जमीदोज होने की कगार पर
  • भागीरथ की राह ताक रही चन्देलकालीन ऐतिहासिक धरोहरे

    • दर्जनों ऐतिहासिक धरोहरें जमीदोज होने की कगार पर
    • करोडों रूपया आने के बाद भी नही होता कोई कायाकल्प
    • विभाग प्रतिवर्षडकार जाता करोडों रूपये की राशि

    बुन्देलखण्ड का महोबा जिला बीरों की भूमि है यहां ऐसे वीरों ने जन्म लिया जिन्होने पूरे भारतवर्ष को जीता लेकिन उन्हें कोई भी नही जीत सका। इसलिये यहां पूरे जिले भर में ऐसे ऐसे पुरातात्विक महत्व के अवशेष बिखरे पडे है। अगर इन्हे जल्द ही नही सजोया गया तो वह शीघ्र ही जमीदोज हो जायेगे। इस पुरानी धरोहरों को दफीनाबाजों द्वारा जमीदोज किया जा रहा है। इन पुरातत्व धरोहरों को संजाये जाने के लिये पुरातत्व विभाग को प्रतिवर्ष सरकार करोडो रूपया देती है परन्तु पुरातत्व विभाग उन पैसों को कहा और किस धरोहर को संजोने में लगाती है यह किसी को अभी तक पता नही चल सका। पुरातत्व विभाग द्वारा दिखावे के लिये कार्य तो शुरू करवाया जाता है परन्तु अधूरा कार्य कर उसे कई कई सालों के लिये छोड दिया जाता है। ऐसे कई उदाहरण जैसे सूर्य मन्दिर, खकरामठ, सिजहरी का ऐतिहासिक मठ, बेलाताल, कुलपहाड पनवाडी, चरखारी कबरई के ऐसी दर्जनों धरोहरे है जो अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है।

    बता दे कि मुख्यालय महोबा में ही दर्जनों की संख्या में ऐसी प्राचीन धरोहरों है जिनको अगर पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित न किया गया तो वह पूरी तरह से जमीदोज हो जायेगी। इन ऐतिहासिक धरोहरों को समाचार पत्रो द्वारा बीच बीच में प्रकाशित भी किया जाता है। पुरातत्व विभाग के पास सरकार इन ऐतिहासिक महत्व की धरोहरों को संरक्षित करने के लिये प्रतिवर्ष करोडों रूपया भेजती है परन्तु पुरातत्व विभाग द्वारा सारा पैसा इधर उधर दिखावा कर हडप लिया जाता है।

    रहेलिया का सूर्य मन्दिर हो या फिर मदनसागर स्थित खकरा मठ या फिश्र ऐतिहासिक मदन सागर व कीरत सागर, व बीजानगर हो इन धरोहरों को संयोजे रखने के नाम पर सरकार प्रतिवर्ष करोडों रूपया खर्च करती है। परन्तु रहेलियां का सूर्य मन्दिर पिछले सात साल से अधूरा खण्डर बना पडा है। रहेलिया के सूर्य मन्दिर तथा मदन सागर व खकरा मठ में पिछले कई सालों से कार्य करवाया जा रहा है परन्तु कई साल बीतने के बाद भी कोई कार्य पूरा नही हो सका। कब कार्य प्रारम्भ होता है और कब समाप्त होता है यह कोई नही जानता।

    मदनसागर व कीरत सागर से जलकुम्भी निकालने के लिये हर वर्ष करोडों रूप्ये आते है परन्तु न ही यहां की जलकुम्भी निकली और न ही इनके घाटों का कोई सुन्दरी करण हो पाया। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों द्वारा प्रतिवर्ष करोडों रूपया हजम कर लिया जाता है और वह डकार तक नही लेते। इसी प्रकार बेलाताल कुलपहाड क्षेत्र में ऐतिहासिक महत्व की दर्जनों धरोहरे है। जो आज जमीदोज होने की कगार पर पहुंच चुकी है।

    ऐतिहासिक बादल महल, बेलासागर, सेनापति महल सहित कई ऐतिहासिक धरोहरों को दफीनाबाजों द्वारा जीर्ण क्षीर्ण हालत में पहुंचा दिया गया हैं। फिर भी पुरातत्व विभाग वहां बोर्ड तो लगवा देता है परन्तु इसके आगे कोई कार्य नही करता। श्रीनगर के ननौरा में तालाब में स्थित महल पर दबंगो द्वारा कब्जा कर लिया गया है। जहां पुरातत्व विभाग का बोर्ड लगा होने के बाद भी इन पर कोई कार्यवही नही हुई। अभी हाल ही में बुन्देली समाज के संयोजक तारा पाटकार ने 14 सतियों की समाधि स्थलों को समाचार पत्रों के माध्यम से उजागर किया था। इन सतियों के समाधिक स्थलों में से कुछ पर दबंग भूमाफियाओं ने कब्जा कर लिया है तथा कुछ शेष बची समाधियों के चारों तरफ झाड झक्कड आदि लगे हुये है। ऐसे ही थाना क्षेत्र के सिजहरी गांव स्थित चन्देलकालीन संरखित मठ के लिये लगभग साढे चार लाख रूपये आवंटित कर एक कार्यदायी संस्था को मरम्मत करने का कार्य सौपा गया था।

    परन्तु विभाग व संस्था ने उक्त राशि ग्रेनाईट पत्थरों के बेजोड जोडों की मरम्मत में खर्च कर दिये जाने की चर्चा पूरे गांव में आम बात है। इसी प्रकार लाखों रूपये विभाग व कार्यदायी संस्थाओं द्वारा हजम कर लिया जाता है और चन्देलकालीन ऐतिहासिक धरोहरें अपनी दुर्दर्शा पर आंसू बहा रही है। वह किसी ऐसे भागीरथ की राहग ताक रही है जो उनकी दुदर्शा तथा पीढा को समझ उनके संरक्षण के लिये उचित कदम उठाये। 

    About the Reporter

    अन्य खबर

    चर्चित खबरें