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दीक्षान्त समारोह में राष्ट्रपति ने छात्र/छात्राओं को दी उपाधि

आज देश के प्रथम नागरिक महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जगत गुरू रामभद्राचार्य विश्वविद्यालय के 7 वे दीक्षान्त समारोह में शामिल हुऐ। उनके साथ उ.प्र. व म. प्र. के राज्यपाल भी रहे, साथ ही उ.प्र. में मुख्यमंत्री की ओर से स्वतंत्र देव सिंह, केन्द्रिय मंत्री रविशंकर प्रसाद उपस्थित रहे।

दीक्षान्त समारोह में राष्ट्रपति और राज्यपाल व जगत गुरू रामभद्राचार्य ने छात्रों को उपाधि प्रदान की। वहीं कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रपति महोदय नानाजी देशमुख को याद करते हुए उनके प्रकल्पों के बारे में बताया, साथ ही उन्होंने कहा कि चित्रकूट भगवान राम की तपोभूमि और नानाजी देशमुख व रामभद्राचार्य जी के दिव्यांगों के लिए किये गये प्रयासों से फलस्वरूप ही पहचाना जाता है।

उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय एक अनुठा विद्या का मन्दिर है। साथ ही अपने भाषण में बताया कि कैसे एक दिव्यांग बेटी सिंघल ने अपने आत्मविश्वास से सिविल सेवा में पहला स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा चेन्नई ओर आन्ध्र प्रदेश के भी एक-एक दिव्यांग छात्र-छात्राओं का उदाहरण दिया जो कि आज अपने परिश्रम और लगन के दम पर सफल है। उन्होंने कहा कि ईश्वर सभी दिव्यांगों को कोई न कोई विशेष प्रतिभा देता है। जैसा कि रामभद्राचार्य जी ईश्वर ने अपने आर्शीवाद प्रदान किया गया है। इन्होंने 124 पुस्तकें लिखी। यहां के कई विद्यार्थी अनेक क्षेत्र में आगे गये। सभी विद्यार्थी आगे चलकर रोजगार हासिक कर लेते हैं।

वहीं उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रामनाईक ने कहा कि यह पहला अवसर है कि उत्तर प्रदेश से कोई राष्ट्रपति चुना गया है। राष्ट्रपति बनने के बाद यूपी में अभी तक कुल 4 विश्वविद्यालयों में आ चुके है। राज्यपाल रामनाईक ने सभी छात्र/छात्राओं का अभिनन्दर किया और कहा कि अब छात्र/छात्राओं के जीवन का संघर्ष प्रारम्भ होगा उसके लिए मैं शुभेच्छा करता हूं। परिश्रम और प्रामाणिकता के आधार पर सफलता मिलती है। राज्यपाल रामनाईक ने जगतगुरू रामभद्राचार्य जी को उनके इस प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया।
वहीं मध्य प्रदेश के राज्यपाल ने सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय दिव्यांग विद्यार्थियों के अन्दर मौजूद गुणों को निखारता है और उन्हें समाज का एक निष्ठावान अंग बनाता है। धर्मनगरी चित्रकूट राष्टऋषि नानाजी देशमुख ओर रामभद्राचार्य जी के लिए जाना जाता है। इस कार्यक्रम में शामिल होना मेरे लिए गर्व की बात है।

वहीं कार्यक्रम में जगद्गुरू रामभद्राचार्य जी ने दीक्षान्त का अर्थ बताते हुए कहा कि दीक्षान्त क्या है ? उन्होंने कहा कि जहां दीक्षा के सिद्धान्त की व्याख्या की जाये वही दीक्षान्त है। उन्होंने कहा कि मैं तुम्हे दीक्षा दे रहा हूँ, कि राष्ट के लिए समर्पित हो जाये। साथ ही उन्होंने अपील कि की जल्द ही इस विश्वविद्यालय को केन्द्रीय विश्वविद्यालय की मान्यता प्रदान की जाये।

 

About the Reporter

  • अनुज हनुमत

    5 वर्ष , परास्नातक (पत्रकारिता एवं जन संचार)

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