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जालौन के छोटे से गांव में जन्में जज ने सुनायी लालू को सजा

  • किसान के बेटे शिवपाल पर शेखपुर खुर्द को गर्व

प्रतिभा व हुनर किसी की मोहताल नही होती है इस बात की एक सामान्य से छोटे मजरे शेखपुर खुर्द में किसान के घर में जन्में शिवपाल सिंह ने चरितार्थ करके दिखा दिया है कृषक परिवार मेें जन्में न्यायाधीश ने चारा घोटाले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को दोषी करा घोषित कर अपनी न्यायिक कुशलता का लोहा मनवा दिया है। जनपद जालौन के ग्राम शेखपुर खुर्द में प्रगतिशील कृषक गोविन्द सिंह गुर्जर के आँगन मे 5 मार्च 1963 को पांचवे तथा सबसे छोटे पुत्र का जन्म होने पर घर में खुशियां मनाये जाने के साथ-साथ मिष्ठान का वितरण होने पर लोगों ने बधाई दी थी। प्रगतिशील कृषक गोविन्द सिंह ने अपने लाडले का ना शिवपाल सिंह रखा। शिवपाल की प्राथमिक शिक्षा गांव की पाठशाला में न होने पर पडोसी गांव सिहारी दाउद में पूरी की थी।

जूनियर की शिक्षा प्राइवेट पूर्व माध्यमिक विद्यालय सिहारी दाउदपुर में की। शैक्षिक कुशलता तथा कुशाग्र बुद्वि होने पर कृषक पिता ने कक्षा 9 में दाखिला करवा दिया। इसी विद्यालय से हाईस्कूल तथा 1980 में इटर मीडिएट की परीक्षा उत्र्तींण करने के बाद 5 जून 1979 को अटराकलां निवासी मीना सिंह के साथ शिवपाल सिंह का विवाह हो गया था। दम्पत्ति जीवन शुरू करने के बावजूद शिवपाल की उच्च शिक्षा में रूचि बनी रही। इसी जिज्ञासा के चलते दयानन्द वैद्कि महाविद्यालय में 1982 में बीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की। स्नातक डिग्री पा लेने के बाद शिवपाल सिंह ने न्यायिक सेवा करने का संकल्प लेते हुए जैयारियों में जुट गये। अपनी मंजिल को पाने के लिए 1984 में इलहाबाद विश्वविद्यालय ां एलएलबी  परीक्षा उत्र्तीण की। दो भाइयों, दो बहनों में सबसे छोटे व सबसे दुलारे शिवपाल ने परिवार की आर्थिक मद्द करने के उद्देश्य से नौकरी की तलाश में जुट गये। और उनका 27 मई 1992 को नायब तहसीलदार के पद पर चयन हो गया। तैनाती के दौरान उन्होने उ0प्र0 के पिथौरागढ जनपद की तहसीलों मे नायब तहसीलदार के रूप में निष्पक्ष, ईमानदारी पूर्ण कार्य किये जाने की वजह से  उन्हें 6 माह के अंतराल में ही स्थानन्तरण की प्रक्रिया से कई बार खामियाजा भुगतना पडा। परन्तु वह अपने इरादे में अडिग रहे, उन्होने गाजीपुर तथा नैनीताल में अपनी सेवाए दी।

25 दिसम्बर 1995 को उनका चयन सर्वप्रथम मोतिहर बिहार मेें जुनियर सिविल जज के रूप में हो गया। 1998 में पदोन्नति पाकर वह द्वितीय श्रेणी के जज बने तथा बोकारो सहित कई जगह कार्य किया। 2002 वह मजिस्ट्रेट से राजिस्ट्रार बना दिये गये। 13 सितम्बर 2004 को उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मीना सिंह के निधन के बाद उन्हें अकेलापन महसूस होने लगा, किन्तु उनका बेटा शिवम सिंह तथा बेटी रिद्धी ने मां के बाद पिता को संभाला। वही पिता ने दोनो बच्चों को माता-पिता दुलार दिया। इसके बाद 2009 में न्यायधीश शिवपाल सिंह के पिता का निधन हो गया। 13 अगस्त 2014 को वह एडीजे हजारीबाग बनाये गये। उन्होने राजमहल में सेवा दी। 21 मार्च 2016 को रांची से सिविल कोर्ट मे नियुक्ति की। इसी दौरान उन्हें बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के खिलाफ न्यायालय मे विचाराधीन मामले मे 65/96 तथा 38/96 बाद दायर मुकदमा निस्तारण करने का मौका मिला। न्यायालय ने 65/96 मामले में चारा घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को दोषी करार देकर आगामी 3 जनवरी 2018 को सजा सुनाने की घोषणा के बाद जनपद जालौन के नन्हे से गांव निवासी न्यायधीश शिवपाल सिंह सुर्खियों में आ गये है। सीबीआई कोर्ट के इस निर्णय से बिहार मे भूचाल ला दिया है।

अपने छोटे भाई के इस साहसी निष्पक्ष निर्णय पर उनके भाई राजेन्द्र पाल उर्फ अमर सिंह शिक्षक निवासी देवरी, सुरेन्द्र पाल सिंह कृषक, चन्द्रपाल सिंह रिटायर्ड एयरफोर्स तथा शिक्षक लालजी तथा बहिन बिटटी राजा व ऊषा ने सराहना करते हुए भाई की ईमानदारी पर गर्व महसूस किया है। न्यायाधीश के पुत्र शिवम प्रताप सिंह अपने पिता के आदर्शो पर चलकर जहां कानून की शिक्षा पा रहे है। और पिता की तरह न्यायाधीश बनकर गरीब मजलूम, पीडितों को न्याय दिलाने का जहां सपना संजोये है तो वहीं बेटी रिद्धी सिंह बी0टेक की शिक्षा ग्रहण कर कुशल इंजीनियर बनकर समाज व राष्ट की सेवा करना चाहती है।

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