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मंहगाई से फीकी पड़ सकती है दीयों की रोशनी

रोशनी का त्योहार दीपावली 15 दिन बाद मनाया जायेगा। त्योहार के पहले ही लोग अपने-अपने घरों व प्रतिष्ठानों को रंग रोशन करके चमका देते है लेकिन इस बार पेंट, डिस्टेम्पर और चूना के दाम बढ़े हुए है जिससे चूना, पेंट की दुकानों से ग्राहक नदारद है।

दीपावली का पर्व हर घर में धूम-धाम से मनाया जाता है। मान्यता है कि दीपावली में जिस घर में ज्यादा स्वच्छता होती है। वहां लक्ष्मी जरूर आती है। इसी वजह से लोग दीपावली के पहले से घरों की सफाई में जुट जाते है। इस बार भी लोग घरों व प्रतिष्टानों की सफाई में लगे है। लेकिन रंग रोगन, चूना वगैरा महंगा हो जाने से लोग सफाई में भी रस्म अदायगी कर रहे है। या फिर डिस्टेम्पर के बजाये चूना से काम चला रहा है।

चूना भी इस बार सस्ता नही है। इसकी कीमतों में भी साल-दरसाल बेतहाशा वृद्धि हो रही है। जहां रंगाई पुताई की सामग्री मंहगी है। वहीं पेन्टर व मजदूर की मजदूरी भी आसमान छू रही हैं। बिना मजदूरो के काम संभवन नही है इसलिये मजबूरन मजदूरो को मनमानी मजदूरी पर काम कराना पड़ रहा है। रोशनी के पर्व में दिये और झालरों को विशेष महत्व है। इस बार चाइनीज सामानों का बहिष्कार करने की सम्भावना को देखते हुए दुकानदान चाइनीज सामन नहीं मंगा रहे है। जिनके पास पुराना चाइनीज सामान है वह बेचकर अपना पैसा निकाल रहे है।

मिट्टी के दिये की बाजार में बिक रहे है लेकिन इनकी कीमत भी ज्यादा है जिससे लोग मिट्टी के दिये के बजाय मोमबत्ती खरीदने में रूचि ले रहे है लोगों का मानना है कि मिट्टी के दिये में तेल डालकर जलाना पड़ता है। जिससे दिये की अपेक्षा मोमबत्ती सस्ती पड़ती है। कुछ लोग यह भी मानते हे कि मोमबत्ती व मिट्टी के दिये की अपेक्षा इलेक्ट्रिक झालरे सस्ती पड़ती है। इसलिये इस बार भी आमतौर पर लोगों को रूझान झालरों की तरफ है।

दीपावली के पहले घनतेरस का त्योहार होता है। घन तेरस में बर्तनों और सोने, चाँदी के आभूषणों के आलावा इलेक्ट्रनिक सामान दो पाहिया व चार पाहिया वाहनों की अच्छी खासी बिक्री हो जाती हैं। इस बार भी इलेक्ट्रनिक सामानों की दुकाने गई है। वहीं दो पहिया व चारपहिया वाहनों के प्रतिष्ठानों में लोगों को ताता लगा रहता हैं जो अभी से गड़ियाँ बुक कर रहे है। घनतेरस के दिन उठायेंगे। ग्राहकों को लुभाने के लिये इन प्रतिष्ठानों द्वारा ग्रहको को छूट का प्रलोभन दिया जा रहा है।

सर्राफा की दुकानों को भी सजाया जा रहा है। हालांकि सर्राफा व्यवसयियों को मानना है कि  इस बार जीएसटी के कारण खरीददारी कम होगी। जीएसटी की मार से ग्राहक और दुकानदार दोनों से परेशान है। दीपावली में मिष्ठान व खोया की बिक्री ज्यादा होती है। मिठाई के विक्रेता अभी से तरह-तरह की मिठाइयां बनवाने में जुटे है। वहीं खोया विक्रेता खोया में मिलावट करके ग्राहको को ठगने की तिकड़म लगा रहे है। उघर पटाखा बनाने का काम भी जारी है। आतिशबाजी चोरी हुयं पटाखों का निर्माण करवा रहे है इन्ही पटाखों में बाहरी कम्पनियांे की चिट लगाकर मन माने दामों में बेचा जा रहा है।

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