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छोटी उम्र में गढ़ी बड़ी दुर्गा प्रतिमा

मात्र सात साल की उम्र में दुर्गा जी की इतनी सुन्दर प्रतिमा गढ़ने वाला ये बालक आखिर है कौन? कहते हैं कि प्रतिभा उम्र देखकर नहीं आती, लेकिन प्रतिभा उम्र दर उम्र निखरती जरूर है। लेकिन हर वर्ष मां दुर्गा की प्रतिमा गढ़ने वाला यह बालक आज 14 वर्ष का हो चुका है और नाम है शाश्वत।

बाँदा शहर के पुलिस लाइन के सामने रहने वाले अनिल सिंह के पुत्र शाश्वत सिंह ‘सूर्यांश’ को बचपन से ही कलाकृतियां बनाने का शौक है। शाश्वत ने शुरूआत में अपने हुनर को मिट्टी व आटे से तराशना शुरू किया। सात साल की उम्र में उसने खेल-खेल में एक फुट की दुर्गा प्रतिमा बनाकर अपनी अद्भुत कला को प्रदर्शित किया। लोगों की तारीफ मिली तो इस नन्हें बालक के हौसलों को मानो पंख लग गये।

इसके बाद तो वह हर साल अपने हाथों से मां दुर्गा की प्रतिमा बनाता रहा जिससे उसकी कला में भी निखार आता गया। वर्ष 2016 में शाश्वत ने छः फुट ऊंची भव्य दुर्गा प्रतिमा को तैयार कर तूलिका से रंग भर दिया। शाश्वती की कला की चारों ओर सराहना हो रही है। इस भव्य दुर्गा प्रतिमा को उसने पुलिस लाइन में ही छोटे-छोटे बच्चों के साथ मिलकर शारदीय नवरात्र के पंडाल में सजाया।

मूर्ति बनाने में शाश्वत इस कदर खो जाता है कि इससे उसकी पढ़ाई में भी असर पड़ता है। सेंट जैवियर्स स्कूल में कक्षा 9 में पढ़ रहे शाश्वत को जब उसके परिवार ने मूर्ति बनाने से मना किया और पढ़ाई पर ध्यान देने को कहा तो उसने चोरी छिपे एक छोटी सी मां दुर्गा की मूर्ति तैयार की।

 



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