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छात्रों ने नाक से कारनामा दिखा, गिनीज बुक में दर्ज कराया अपना नाम

जयपुर के राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के छात्रों ने नाक से बड़ा कारनाम करके दिखाया। कारनामा इनता बड़ा था कि छात्रों का नाम गिनीज बुक आॅफ वल्र्ड रिकार्ड में दर्ज किया गया।

राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर में पहले राष्ट्रीय आयुर्वेद युवा महोत्सव का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में छात्रों ने नाक से अनोखी क्रिया कर अपना नाम गिनीज बुक आॅफ वर्ड रिकार्ड में दर्ज कराया। कार्यक्रम के दौरान देशभर के आयुर्वेदिक संस्थानों के छात्रों ने 8 मिनट तक पंचकर्म की विधि ‘नस्य कर्म’ कर ये रिकाॅर्ड अपने नाम किया। अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकाॅल के तहत संस्थान में सुबह 9.20 बजे से 9.28 बजे तक नस्य क्रिया करने पर गिनीज बुक आॅफ वल्र्ड रिर्काडस की टीम के सदस्यो ने विश्व रिकाॅर्ड बनाने पर संस्थान के निदेशक डाॅ. संजीव शर्मा को गिनीज बुक आॅफ वल्र्ड रिकाॅर्ड का प्रमाण-पत्र दिया।

गिनीज बुक आॅफ वल्र्ड रिकाॅर्ड में कुल 1564 छात्रों ने हिस्सा लिया था। पंचकर्म विधि के दौरान गिनीज बुक आॅफ वल्र्ड रिकाॅर्ड के अधिकारियों ने गहनात के साथ नस्यकर्म का निरीक्षण किया। व छात्रों को प्रमाण पत्र भी दिये।

क्या है पंचकर्म विधि ‘नस्यकर्म’
आयुर्वेद के जानकारों के अनुसार नस्यकर्म में नासा मार्ग से पीड़ित को औषधि दी जाती है। इस क्रिया का मुख्य प्रभाव शरीर को स्वस्थ रखने के अलावा गले से ऊपर होने वाले रोगों में होता है। नस्य कर्म में पहले दशमूल तेल के माध्यम से सम्पूर्ण मुख प्रवेश कराया गया। इसके बाद हस्त स्वेद से सेक देकर अणुतैल नस्य की 2-2 बून्दे नासापुटो में डाली गई। पंचकर्म से इलाज की इस विधि से नाम में दो बंूद तेय या घी डालकर सर्दी, जुकाम अस्थमा जैसी बीमारी का इलाज किया जाता है।

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