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बैंकिंग भ्रष्टाचार निगल रहा आम जनता को

बैंकिंग लेन देन की प्रक्रिया बढ़ने के साथ शाखा प्रबंधक की सह से बैंक से लेकर सीएसी तक भ्रष्टाचार ड्रैगन की तरह बढ़ता जा रहा है। जहाँ आम आदमी को सुविधा मिलनी चाहिए। वो उनके शोषण का अड्डा बनते जा रहे हैं। ये मामला कुशीनगर जिले का है। इस जिले के नौरंगियां एसबीआई ग्राहक सेवा केन्द्र पर खुल्लम खुल्ला ग्राहको को खाता खुलवाने के नाम पर अतिरिक्त ₹ 100 की शुल्क लेकर अवैध लूट का खेल शुरू है। कुल ₹220 लिए जाते हैं लेकिन रसीद ₹120 की थमा दी जाती है।

जब इस मामले की शिकायत युवा अनुराग त्रिपाठी ने बैंक मैनेजर से साक्ष्य दिखाते हुए की तब उनके होश पाख्ता तो हुए किन्तु सीएसी आनर को बुलाकर डांटने व पैसा वापस करने की बात कह कर मामला शांत कराने की कोशिश करने लगे।

ग्राहक करेगें शिकायत
इस बाबत जब अनुराग त्रिपाठी ने ग्राहको की जानकारी दी कि आप लूट लिए जा रहे हो। तब ग्राहको ने लिखित शिकायत की बात कही, तब बैंक मैनेजर ने कहा कि दोष सिद्ध होने पर बैंक सभी के पैसे वापस करेगा। किन्तु दोष सिद्ध तब होगा जब प्रत्येक ग्राहक का कुछ सबूत हो लेकिन जब 220₹ की पर्ची ही नहीं मिली तो आखिर दोष सिद्ध ही नहीं होगा और इससे स्पष्ट है कि बैंक मैनेजर की मिली भगत से आम जनता को लूटा जा रहा है।

पीएमओ को लिखा पत्र
जब मामले की लीपापोती होती हुई दिखी तब अंततः साक्ष्य सहित पीएमओ को पत्र लिखा गया। किन्तु अकाट्य सत्य है कि इन बैंक कर्मियो पर कार्रवाई होने की लंबी और कठिन प्रक्रिया है, जिसका लाभ ये भ्रष्टाचारी लेते रहते हैं। एक तथ्य ये भी सही है की अपने बैंक की प्रतिष्ठा बचाने के लिए ऊपर से नीचे तक अधिकारी कर्मचारी संगठित प्रयास से डटे रहते हैं।

बैंकिंग लोकपाल भी नकारा
बैंकिंग लोकपाल की भूमिका भी संदिग्ध है। जो कि इनसे सांठगांठ के द्वारा धन ऐठ कर मैनेजर को बचाने का काम करते हैं। इनके द्वारा भी ग्राहक को त्वरित पारदर्शी सहयोग नहीं मिलता है और जनता लोन आदि सुविधा के मामले मे खासतौर से ग्रामीण क्षेत्र मे लूट का शिकार हो रही है।



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