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बलात्कारी बाबा के बाद सेक्स रैकेट चलाने वाला इच्छाधारी सन्त दिल्ली में गिरफ्तार

आपको याद होगा कई वर्ष पहले दिल्ली में एक बड़े सेक्स रैकेट का पर्दाफाश हुआ था जिसमे धर्मनगरी चित्रकूट में जन्म लेने वाले एक ऐसे संत के चरित्र का राज सबके सामने आया था जो खुद को इच्छाधारी संत बताता था। आपको बता दें कि बालात्कारी बाबा राम रहीम के बाद अब ऐसे ही एक इच्छाधारी सन्त को पुलिस ने ठगी के एक दूसरे केस में फिर से गिरफ्तार कर लिया है। दरअसल, पुलिस ने ठगी के आरोप में इच्छाधारी बाबा उर्फ भीमानंद उर्फ शिवा को एक महिला के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस की मानें तो दोनों पर एक युवती से सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर करीब 13 लाख रुपये ठगने का आरोप है।पुलिस इनके साथियों को गिरफ्तार करने के लिए दबिश दे रही है। इस पूरे प्रकरण में इच्छाधारी सन्त भीमानन्द की जन्मस्थली चित्रकूट के भी कई लोगों का नाम आ रहा है। फ़िलहाल डीसीपी रोमिल बानिया के अनुसार, रोहिणी निवासी रितू शर्मा मार्केटिंग में मास्टर डिग्री होल्डर है। उसने अमर कॉलोनी थाने में ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी।

आपको बता दें कि इच्छाधारी बाबा इससे पहले वेश्यावृति रैकेट चलाने में भी गिरफ्तार हो चुका है और कुछ वर्ष पहले इसी वेश्यावृति रैकेट चलाने के आरोप में गिरफ्तार किए जाने के बाद सुर्खियों में आया था। बाबा ने नेबसराय थाना इलाके में आश्रम खोल रखा था। सबसे खास बात ये है कि साकेत थाना पुलिस ने बाबा के खिलाफ मकोका भी लगाया था। वर्ष 2014 में उसे जमानत मिल गई थी।

इच्छाधारी बाबा पिछले डेढ़ वर्ष से अमर कॉलोनी थाना इलाके में रह रहा था। रितू इच्छाधारी बाबा की भक्त थी। इच्छाधारी बाबा ने ही रितू को कनिका के पास भेजा था। खुद को साईं का अवतार बताता था इच्छाधारी बाबा ठगी के आरोप में गिरफ्तार इच्छाधारी बाबा उर्फ भीमानंद खुद को साईं बाबा का अवतार बताता था। जेल से बाहर आने के बाद से ही उसने लोगों को अपना भक्त बनाना शुरू कर दिया था ।

वह पिछले करीब डेढ़ वर्ष से अमर कॉलोनी इलाके में रह रहा था। यहां पर काफी भक्त भी आने लगे थे। ठगी की शिकार युवती रितू भी पूजा-पाठ के लिए बाबा भीमानंद के पास आती थी। भीमानंद ने ही रितू को कनिका से मिलवाया था। बाबा लोगों के घरों में पूजा-पाठ करने भी जाता था। पुलिस अधिकारियों की मानें तो बाबा ने अपना सामाज्य फिर से खड़ा करना शुरू कर दिया था। लेकिन अब जब एक बार फिर इच्छाधारी सन्त पुलिस के चंगुल में आ गया है तो उससे जुड़े लिंक की तलाश भी पुलिस कर रही है।

जानकारी के लिए आपको बता दें इच्छाधारी सन्त भीमानन्द उसी गाँव का है जहाँ एक समय दुर्दांत डकैत ददुआ का गढ़ हुआ करता था।  मूलरूप से चित्रकूट के चमरौहा गांव का रहने वाले बाबा भीमानंद को 2009 में साकेत थाना पुलिस ने वेश्यावृति रैकेट चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। 2014 में भीमानंद को जमानत मिल गई थी।  भीमानंद का असली नाम शिवमूरत द्विवेदी है। गाँव वालों की मानें तो शिवमूरत बचपन से ही महत्वाकांक्षी और स्वाभिमानी था लेकिन वो ऐसा घृणित कार्य करेगा उन्हें यकीन नही था । दबी जुबान में तो आस पास के लोग ये भी कहते हैं कि अगर आज इच्छाधारी सन्त भीमानन्द पकड़ा न गया होता तो अपने क्षेत्र का विकास हो गया था । जानकारी के लिए आपको बता दें कि इच्छाधारी सन्त अपने गांव को पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाना चाहता था क्योंकि वहीं साईं मंदिर का निर्माण कराके उस पूरे क्षेत्र को साईं नगर बनाने की कल्पना थी लेकिन जैसे ही उसकी असलियत का भँडाफोड़ हुआ सब धरा रह गया । एक खास बात ये भी है कि वह 1988 में दिल्ली के नेहरू प्लेस स्थित एक पांच सितारा होटल में गार्ड की नौकरी करता था।

1997 में गार्ड की नौकरी छोड़ शिवमूरत द्विवेदी लाजपत नगर में मसाज पार्लर में काम करने लगा। इस दौरान उसे सेक्स रैकेट के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। जेल से बाहर आने के बाद उसने न सिर्फ अपना नाम बदला बल्कि हुलिया भी बदल लिया और वह खुद को इच्छाधारी संत स्वामी भीमानंद जी महाराज के नाम से जाना जाने लगा और सेक्स रैकेट चलाने लगा। उसके बाद फरवरी 2010 में जब दो एयरहोस्टेस समेत आठ लोगों को सेक्स रैकेट चलाने के मामले में गिरफ्तार किया गया तो यह खुलासा हुआ कि इसका मास्टमाइंड 40 वर्षीय शिवमूरत द्विवेदी है, जिसे दुनिया इच्छाधारी संत स्वामी भीमानंद जी महाराज चित्रकूट वाले के नाम से जानती है।

करीब 12 वर्ष में ही भीमानंद ने करोड़ों की संपत्ति बना ली। बाबा की की संपत्ति को प्रवर्तन निदेशालय ने  2015 में जब्त कर ली थी। समूचे देश में ऐसे अय्याश ,फर्जी टाइप के सन्त और बाबा लगातार पकड़े जा रहे हैं जिससे समाज दोषित और कलंकित हो रहा है । ऐसे तमाम बाबाओं और संतो के ट्रस्ट सीज करके उनकी पूरी सम्पत्ति जब्त कर लेनी चाहिए ।



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