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मानिकपुर: जवाहर नवोदय विद्यालय में हो रहे निर्माण कार्य में बालू की जगह प्रयोग की जा रही मिट्टी

एक तरफ केंद्र की मोदी सरकार भ्रस्टाचार को लेकर काफी सख्त है तो वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार के ही एक निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है। जी हां सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए धर्मनगरी चित्रकूट के पाठा क्षेत्र में यह निर्माण कार्य वर्ष भर से चल रहा है। मामला चित्रकूट जिले के मानिकपुर नगर स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय का है जहाँ विगत वर्ष से बिल्डिंग्स और बाउंड्री का निर्माण कार्य चल रहा है। इस निर्माण कार्य में जमकर धांधली की जा रही है और सबसे खास बात यह है कि ये सब विद्यालय के प्राचार्य महोदय के नाक के नीचे हो रहा है।

स्थानीय लोगों ने कई बार प्रशासन से इस बाबत शिकायत भी लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नही हुई। बुन्देलखण्ड न्यूज की टीम जब मौके पर आज जवाहर नवोदय विद्यालय स्थित जहाँ निर्माण कार्य चल रहा था, वहाँ पहुँची तो सामने की हकीकत देखकर एक पल के लिए तो मानों विश्वास ही नही हुआ। आवासीय परिसर के नये बन रहे भवनों में जो बालू प्रयोग की जानी चाहिए उसके स्थान पर आस पास के क्षेत्र की खास मिट्टी का प्रयोग किया जा रहा था जिसे जबरन मोरम की संज्ञा दी जा रही थी। बहरहाल, देखने के लिए कुछ बालू निर्माण स्थल पर पड़ी थी लेकिन ये सिर्फ देखने के लिये ही हैं। पता करने पर मालूम हुआ कि ये बालू काफी दिनों से यहाँ पड़ी हुई है।

वहीं कुछ दूर पर ही विद्यालय की बाउंड्री का निर्माण कार्य भी चल रहा था जिसकी हालत देखकर तो हमारे पैरों तले मानो कुछ पल के लिए जमीन खिसक गई! बाउंड्री

     

निर्माण में नींव से लेकर उसकी दीवार बनाने तक में एक विशेष तरह की लोकल मिट्टी और बजरी  का प्रयोग किया जा रहा था जिसे वहाँ मौजूद काम कराने वाले लोग मोरम की संज्ञा दे रहे थे।

मोरम तो दूर ये पूरी तरह से मिट्टी का और बजरी का प्रयोग किया जा रहा है जिसे लगातार निर्माण में मनमाने ढंग से प्रयोग किया जा रहा है। इस निर्माण में हो रही धांधली आज की नही है बल्कि कई महीनों पहले ही मानिकपुर नगर के सभासद नीलकमल शुक्ला ने इसकी शिकायत तत्कालीन डीएम मोनिका रानी से तहसील दिवस के दौरान की थी लेकिन उसके बाद से आज तक खास कार्यवाही नही की गई।

आप अन्दाजा लगाइये की जब मिट्टी से दीवारें बनाई जायेंगी तो वह कितने दिन चलेंगी । ऐसी ही दीवारें अचानक भरभराकर गिर जाती हैं और उसमे मासूम बच्चे दबकर अपनी जिंदगी खो देते हैं । आज तमाम जनप्रतिनिधियों , प्रशासन के अधिकारियों के नाक के नीचे यह मनमाना काम गलत मानक पर काराया जा रहा है लेकिन सभी चुप्पी साधे हुए हैं, ये चुप्पी कई प्रश्न खड़े करती है ।

धांधली से भरे इस पूरे निर्माण कार्य में जिस मिटटी और जिस पतली छर्री का प्रयोग किया जा रहा है वो पास के ही प्रतिबंधित रानीपुर वन्य जीव क्षेत्र से लाई जा रही है जो कि बहुत बड़ा अपराध है ।

सूत्रों की मानें तो इस पूरे अवैध खेल में वन्य जीव क्षेत्र के कर्मचारी और अधिकारी भी शामिल हैं जिनकी सह पर ये अवैध खनन कराया जाता है । नगर के कुछ समाजसेवियों और नागरिकों का कहना है कि इस पूरे निर्माण कार्य की जाँच कराइ जाये और दोषी लोगो को सजा दी जाये ।



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