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गौरक्षा हेतु बुन्देलखण्ड से पैदल चलकर ये सामाजिक कार्यकर्ता पहुंचा लखनऊ

बुन्देलखण्ड में बेहतर स्वास्थ्य सेवा से लेकर शिक्षा ,रोजगार  सहित तमाम सुविधाओं की मांग के साथ लगातार संघर्षरत रहने वाले व्यक्तियों की संख्या कम है लेकिन इन सबका संघर्ष बड़ा है । सूबे के सबसे सूखाग्रस्त क्षेत्र बुन्देलखण्ड से पैदल चलकर 250 किलोमीटर की दूरी तय करके लखनऊ पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ता तारा पाटकर बुन्देलखण्ड के एक ऐसे ही संघर्षशाली व्यक्तित्व हैं जिन्होंने गौरक्षा के लिए इतनी बड़ी पैदल यात्रा पूरी की और लखनऊ पहुंचे। इन्होंने अब अपने साथियों के साथ गौरक्षा की मांग को पूरा करने हेतु उपवास शुरू कर दिया है । अपने सहयोगियों के साथ उपवास पर बैठे तारा पाठकर अगले 7 दिन तक उपवास पर करेंगे ।

तारा पाटकर का आरोप है कि बुन्देलखण्ड में भूख-प्यास से मर रही गायों के विषय में उन्होंने 23 मई को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर तत्काल कोई निर्णय लेने का अनुरोध किया था। मुख्यमंत्री से उन्हें कोई आश्वासन नहीं मिला। जिसके बाद उन्होंने उपवास का निर्णय लिया।
 
बुन्देलखण्ड में लाखों गौवंशों को चारे की व्यवस्था न होने के कारण कागज, कचरा और पॉलिथीन खाना पड़ रहा है। लखनऊ स्थित जीपीओ पार्क पर उपवास पर बैठे पाटकर के साथ जसवंत सिंह सेंगर, मनोज सिंह चौहान, चंद्रमोहन और ओम प्रकाश तिवारी भी इस उपवास में शामिल हुए।

पाटकर का यह उपवास एक सप्ताह तक चलेगा। तारा पाटकर ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गौ प्रेम किसी से छिपा नहीं है। इस कारण सभी लोगों को उनसे काफी उम्मीदें हैं। तारा पाटकर ने कहा कि बुन्देलखण्ड में भूख-प्यास से मर रही गाय को बचाने के लिए बुन्देलखण्ड में सरकार को पहल करनी चाहिए।

अब देखना होगा की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कितना जल्दी इस ओर ध्यान देते हैं । क्योंकि बात बुन्देलखण्ड की है और उन्होंने कई बार कहा है कि बुन्देलखण्ड उनकी प्रमुख प्राथमिकता में है ।



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