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बुन्देलखण्ड मांगे पानी

बुन्देलखण्ड की बदहाली का आशय इस बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ आजादी के 70 वर्ष बाद भी आज 80% गांव के लोगो को शुद्ध पीने का पानी नसीब नही हो रहा है। ऐसे नदी, तालाब और कुएं जिसने कभी गाँव वालों का साथ नही छोड़ा पर इस विकराल और प्रचण्ड गर्मी ने इन सभी को सूखा दिया। आस पास के गाँवो में इस मौसम की ही तरह घरों में भी सूखे ने पाँव पसारना शुरू कर दिया है। किसान पलायन करने पर मजबूर है, घरों में ताले लटकते मिलना अब आम बात हो गई है। घरों में बुजुर्ग हैं अधिकांश नौजवान सूदूर प्रान्तों में नौकरी कर रहे हैं। तापमान 50° पहुँचने वाला है। धरती सूख चुकी है, आस पास के क्षेत्र को मिलाकर कुछेक नदियां हैं उनमें से ज्यादातर ने दम तोड़ दिया है।

गाँव में जो कुँए हैं शायद ही इस महीने के अंत तक पानी दे पाये क्योंकि जल स्तर लगभग समाप्त हो गया है। ये पूरी स्थिति पाठा के एक गाँव की नही बल्कि बुन्देलखण्ड के उन सैकड़ो गाँवों की है जहाँ सूखे ने किसानों की हालत बद से बदतर कर रखी है। आस पास के गाँव वालों का कहना है की हमें अभी मीलों चलकर पानी लाना पड़ता है पर इस महीने के अंत तक वो पानी भी नही मिलेगा तब हम क्या करेंगे। पाठा क्षेत्र में बमुश्किल कुछ ही तालाब हैं जिनमे से इक्के दुक्के में ही कुछ पानी बचा होगा पर अगर मौसम की हालत यही रही तो वो भी नही बचेंगे। इस विकराल सूखे से निपटने के लिए अभी तक सरकार की तरफ से भी कोई ठोस रणनीति नही बनाई गई है। अभी हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाँदा का दौरा किया था और इस सूखे से निपटने के लिए हर मुमकिन मदद करने का आश्वासन भी दिया था पर अभी तक वो आश्वासन महज एक राजनीतिक मरहम ही नजर आ रहा है।

इसके इतर प्रदेश सरकार का एक दूसरा चेहरा भी सामने आ रहा है जिसमें प्रदेश की योगी सरकार इस सूखे से उत्पन्न हुई पेयजल समस्या का ठीकरा अब केंद्र पर नही फोड़ सकती है क्योंकि वहां भी भाजपा ही है। विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है प्रदेश सरकार पेयजल संकट से निपटने के लिए कुछ नही कर रही। अभी योगी सरकार ने पेयजल समस्या से निदान हेतु करोड़ों का बजट बुन्देलखण्ड को दिया है पर अभी भी सबसे बड़ी समस्या पानी की है जिससे जिंदगी का अस्तित्व जुड़ा है। कुछ भी हो पर केंद्र और प्रदेश की राजनीतिक जुगलबंदी के बीच वास्तव में उन किसानों और आम लोगो का क्या होगा जो इस कठिन परिस्थिति में भी सरकार की मदद का इन्तजार कर रहे हैं !सबसे बड़ा प्रश्न यह है क्या योगी सरकार भी पिछली सभी सरकारो की तरह बुन्देलखण्ड की पेयजल समस्या से निपटने में नाकाम हो जायेगी ? क्योंकि स्थिति जस की तस है बाकी आप रिपोर्ट के साथ लगी ये तस्वीर देख सकते हैं।

बुन्देलखण्ड की चर्चा के दौरान पहले चरण में हमने चित्रकूट धाम मंडल (चित्रकूट ,महोबा ,बाँदा और हमीरपुर) के जिलों में 2150 किमी की यात्रा की। इस यात्रा के दौरान लगभग सभी जगह पानी की समस्या ही दिखी। महिलाओं को कई किमी दूर से पानी लाना पड़ता है। स्कूली बच्चो को भी दूर दूर से पानी लाना पड़ता है। समस्या ये की वह पढ़ेगा कब। सबसे ज्यादा विकराल स्थिति चित्रकूट जिले के पठारी भाग में है।

मानिकपुर के उंचाडीह न्याय पंचायत के तमाम गांवों में पीने के पानी की भयंकर समस्या है। ऐलहा, बढ़ैया, मझटोलवा, मारकुंडी, अमचूर नेरुआ, मानिकपुर नगर, बहिलपुरवा जैसे अधिकांश गांव ऐसे हैं जहाँ के लोग या तो दूर दूर से पानी लाने को मजबूर हैं या तो इक्का दुक्का लगे हैंडपंपो से गंदा पानी ही पीने को मजबूर हैं। बाँदा ,महोबा और हमीरपुर के अधिकांश गाँवो का भी यही हाल है। कुछ ही महीनो में मौसम बदल जायेगा लेक़िन चुनौती जस की तस रहेगी सरकार के सामने। सौ बात की एक बात सरकार के पास इन समस्यायों से निपटने का कली ठोस एक्शन प्लान नही है।