?> पाठा में एक बार फिर खौफ का आतंक, पुलिस की कार्यवाही सन्देह के घेरे में बुन्देलखण्ड का No.1 न्यूज़ चैनल । बुन्देलखण्ड न्यूज़ एक बार फिर पाठा क्षेत्र में डाकुओं की दहशत बढ़ गई है। खौफ के खात्मे"/>

पाठा में एक बार फिर खौफ का आतंक, पुलिस की कार्यवाही सन्देह के घेरे में

एक बार फिर पाठा क्षेत्र में डाकुओं की दहशत बढ़ गई है। खौफ के खात्मे को लेकर सरकार का कहना है कि हम किसी भी हालत में अपराध और अपराधी दोनों को पनपने नही देंगे। लेकिन दूसरी ओर अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। ताजा मामला एक बार फिर चित्रकूट जिले से सामने आया है। जिला मुख्यालय से 55 किमी की दूरी पर टिकरिया नामक स्थान पर सात लाख के इनामी दस्यु बबली कोल द्वारा तड़के सुबह 3 बजे से लेकर 7 बजे तक आतंक का तांडव किया गया।

जानकारी के मुताबिक बबली कोल गैंग के कुछ सदस्यों द्वारा सुबह से ही राहगीरों से लूटपाट शुरू कर दी गई थी। सुबह 6 बजे के करीब सुशील कुमार द्विवेदी (अनूपपुर निवासी) अपनी रिश्तेदारी में मानिकपुर आ रहे थे तभी टिकरिया के पास उन्हें कुछ लोगो ने हाथ दिखाकर गाड़ी रुकवा ली और बन्दूक सटाकर उनसे मोबाईल फोन छीन लिए और उनके ड्राइवर सहित उनके साथ भी मारपीट की। पुलिस घण्टे भर में मौके पर पहुँच गई लेकिन कोई जवाबी कार्यवाही नही हुई। ग्रामीणों की जानकारी के मुताबिक गैंग के कुछ सदस्यों ने पुलिस की तरफ गाली गलौज करते हुए कुछ हवाई फायर भी किये लेकिन पुलिस ने कोई जवाब नही दिया। मौके पर मौजूद ग्रामीणों की मानें तो मारकुंडी पुलिस ने तत्तपरता नही दिखाई नही तो आज बबली कोल गैंग का सफाया हो जाता है ।

 पुलिस अधीक्षक प्रताप गोपेन्द्र को जैसे ही घटना की जानकारी हुई वो फौरन भारी पुलिस बल के साथ घटना स्थल पर पहुँच गये। पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में पुलिस ने बबली कोल गैंग का 3-4 किमी पीछा किया और काम्बिंग भी की। कुछ समय बाद पुलिस का और बबली कोल गैंग का आमना सामना भी हो गया। दोनों तरफ से फायरिंग हुई। पुलिस ने भी कई राउंड फायर किए और पुलिस अधीक्षक प्रताप गोपेन्द्र की मानें तो आज बबली कोल का सफाया हो जाता लेकिन जगंल का फायदा उठाकर बबली कोल भागने में सफल हो गया। इस बीच काम्बिंग के दौरान आस पास के स्थान से कुछ गमछे, एक मोबाईल (स्मार्टफोन) पुलिस को प्राप्त हुआ। अभी की जानकारी के अनुसार बबली कोल की तलाश में पुलिस की काम्बिंग जारी थी।  फिलहाल लूटपाट की लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में खौफ व्याप्त है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी कि कैसे खौफ के इस बबली / गोप्पा नामक पर्याय को जल्द से जल्द खत्म किया जाये।

ग्राउंड जीरो से अनुज हनुमत, आशीष उपाध्याय की एकाक्लुसिव रिपोर्ट