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वंदे मातरम के साथ बुन्देलखण्ड साहित्य महोत्सव का आगाज

झांसी,

जनपद के क्राफ्ट मेला मैदान पर तीन दिवसीय बुन्देलखण्ड साहित्य महोत्सव का आगाज आज वंदे मातरम गान से शुरू हो गया। यह महोत्सव 1 मार्च तक चलेगा। यहां 25 से अधिक प्रकाशकों ने स्टाल लगाया है।
 
झाँसी क्राफ्ट मेला मैदान पर 28 फरवरी से 1 मार्च तक आयोजित बुन्देलखण्ड साहित्य महोत्सव-2020 की तैयारियाँ लगभग पूरी कर ली गई हैं। 25 से अधिक प्रकाशकों ने डेरा जमा लिया है। अस्थाई पुलिस चैकी, आकस्मिक स्वास्थ्य केन्द्र बनाया गया है तो वरिष्ठ नागरिकों के लिए सवेरा संस्था ने भी स्टाल लगाया है। मण्डलायुक्त सुभाष चन्द शर्मा ने अधिकारियों के साथ आज इन तमाम तैयारियों का जायजा लिया।

झाँसी में आयोजित प्रथम बुन्देलखण्ड साहित्य महोत्सव में विभिन्न प्रतियोगिताएं होंगी, जिसमें सभी वर्ग के लोग शामिल होंगे। विशेष आकर्षण बुन्देलखण्ड में होने वाले विभिन्न प्रकार के नृत्य, गायन और नाटक आदि होंगे। प्रतिदिन अपराह्न 12 बजे से लेकर रात 9.30 बजे तक अलग-अलग सत्र में कार्यक्रम होंगे। विश्वविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष एवं समारोह के संयोजक डॉ. पुनीत बिसारिया ने बताया कि प्रथम दिन बुन्देली साहित्य, बोली का बोलबाला, साहित्य के प्रसार में सरकार की भूमिका, हिन्दी साहित्य, बुन्देलखण्ड में हिन्दी के बढ़ते ़कदम, समकालीन ललित कला परिदृश्य, बुन्देलखण्ड के विशेष परिप्रेक्ष्य में जनजाति, किन्नर एवं दलित, साहित्य पर चर्चा होगी।

इसके अलावा समकालीन हिन्दी आलोचना का परिदृश्य, तनाव मुक्त जीवन के सूत्र विषय पर भी चर्चा की जायेगी। इससे पहले 10 बजे से सायं 6 बजे तक समकालीन साहित्य, फिल्म, कला, संस्कृति, मीडिया चुनौती एवं सम्भावना विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन भी किया जाएगा। प्रतियोगिताओं की संयोजिका डॉ. नीति शास्त्री ने बताया की कार्यक्रम के साथ ही प्रथम दिवस अपराह्न 3 से सायं 6 बजे तक बुन्देलखण्ड को जानो, बुन्देली संस्कृति पर आधारित वधू सज्जा और बुन्देली आधारित फोटोग्राफी प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।

सांस्कृतिक कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. रेखा लगरखा ने बताया की सायं 6.30 बजे से रात्रि 9.30 बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। प्रथम दिन बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय द्वारा दीवारी लोक नृत्य, ढिमरयाई लोक नृत्य, डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर द्वारा बधाई, जितेन एवं साथी महोबा द्वारा आल्हा, कोंच की प्रसिद्ध रामलीला, राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त महाविद्यालय के छात्रों द्वारा बुन्देली और अवधी लोकगीत प्रस्तुत किए जाएंगे। 

 

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