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अरहर सम्मेलन में 33 जनपदोे के किसानों ने रखी अपनी राय

बाँदा,

बुन्देलखण्ड में दहलन की असीम सम्भावनाएं है यहां अरहर, चना, मसूर और तिलहन को समृद्ध बनाने के लिए किसानों को हर तरह की तकनीक उपलब्ध कराई जाएगी। यहां के जैविक उत्पाद विश्व भर में अपनी पहचान बना सकते हैं। उपरोक्त विचार वल्र्ड-पल्सेज-डे के अवसर पर कटरा कालींजर में आयोजित ‘‘अरहर सम्मेलन’’ को सम्बोधित करते हुए हैदराबाद के एग्री साइट से आए विशेषज्ञ डाॅ. राजेश कुमार नून ने  व्यक्त किये।

सम्मेलन में  जिलाधिकारी हीरा लाल ने कहा कि हमारा देश कृषि प्रधान देश है तथा बांदा की उन्नति भी खेती और किसानी के विकास से ही हो सकती है। उन्होंने कहा कि बांदा की अरहर, सरसों तथा चने की फसलें जैविक होती है इसलिए इन फसलों का विशेष महत्व है। कहा कि बांदा जनपद की अरहर की पहचान को न केवल प्रदेश अपितु देश में स्थापित करने के लिए अरहर सम्मेलन का आयोजन दलहन दिवस के अवसर पर किया गया है। जिलाधिकारी ने कहा कि अरहर सम्मेलन में प्रदेश के 33 जनपदों के ऐसे किसान आए हुए है जिन्होंने खेती के विकास के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए है। उन्होंने कहा कि बांदा की अरहर, चने की ब्रांडिंग कराई जानी है जिससे किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिल सके।  उन्होंने कहा कि बांदा जनपद में इनोवेशन एण्ड स्टार्टअप समिट का आयोजन किया गया था जिससे बांदा को साइंस पार्क मिल गया है तथा साइंस पार्क की स्थापना का कार्य प्रारम्भ हो गया है। जिलाधिकारी ने कहा कि अतर्रा कृषि फार्म को एक्सीलेन्ट सेन्टर बनाया जाएगा।

सम्मेलन में पद्मश्री किसान हुए सम्मानित
पदमश्री से सम्मानित राजकुमारी देवी ने कहा कि महिलाएं भी खेती किसानी से जुड़े तथा जैविक फसलों का उत्पादन करें जिससे यहां के उत्पादों की नई पहचान बन सके। कृषि वैज्ञानिक डाॅ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि दाल की फसल में लगने वाली बीमारियों को रोकने के लिए किसान बीजों का शोधन करके बुआई करें। पदमश्री से सम्मानित रामशरण वर्मा ने कहा कि इस प्रकार का सम्मेलन ग्रामीण क्षेत्र में हो रहा है यह बहुत ही उल्लेखनीय है। उन्होंने कहा कि किसान आमदनी बढ़ाने के लिए फलों और सब्जियों का भी उत्पादन करें। बुलन्दशहर से आए पदमश्री सम्मान से विभूषित प्रगतिशील किसान भूषण त्यागी ने कहा कि किसान ज्यादा पैदावार लेने के चक्कर में परम्परागत खेती भूलता जा रहा है जबकि किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए जीरों बजट खेती ही सक्षम है। सतना से आए पदमश्री बाबूलाल दहिया ने किसानों को उत्पादन बढ़ाने तथा उचित मूल्य लेने के तरीके बताए।

निदेशक भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान डाॅ. ए.बी. पाठक, डीजीएम वालमार्ट, डाॅ. अरविन्द कुमार, कृषि अनुसंधान संस्थान के डाॅ. मानसिंह भारतीय, गोरखपुर के डाॅ. आर.सी. चैैधरी, पदमश्री से सम्मानित कमल सिंह चैहान तथा  श्याम बिहारी गुप्ता ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए।

अरहर सम्मेलन में सांसद आर.के. सिंह पटेल, विधायक नरैनी श्री राजकरन कबीर तथा सम्मेलन में आए हुए सभी विशेषज्ञों तथा अन्य जनपदों से आए प्रगति किसानों को जिलाधिकारी ने अंगवस्त्र तथा स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। उपनिदेशक कृषि प्रसार ए.के. सिंह ने कार्यक्रम के अन्त में आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनपद के किसान अरहर, चना, सरसों इत्यादि का गुणवत्तापरक उत्पादन कर इन उत्पादों की पहचान बनाने का कार्य करें।
 

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