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बसंत पंचमी पर वर्षो बाद बन रहा खास संयोग, जानें कब है श्रेष्ठ मुहूर्त

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बसंत पंचमी के दिन सिद्धि और सर्वार्थसद्धि योग जैसे दो शुभ मुहूर्त का संयोग बन रहा है। इस कारण पंडितों ने इसे वाग्दान, विद्यारंभ, यज्ञोपवीत आदि संस्कारों और अन्य शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना है। ज्योतिषविदों का मानना है कि गुरुवार को बसंत-पंचमी मनाना श्रेष्ठ और शास्त्र सम्मत होगा। इस बार बसंत पंचमी  विशेष रूप से श्रेष्ठ है। वर्षों बाद ग्रह और नक्षत्रों की स्थिति इस दिन को खास बना रही है। ज्योतिषविदों के अनुसार इस बार तीन ग्रह खुद की ही राशि में रहेंगे। मंगल वृश्चिक में, बृहस्पति धनु में और शनि मकर राशि में रहेंगे। विवाह और अन्य शुभ कार्यों के लिए ये स्थिति बहुत शुभ मानी जाती है।

बसंत पंचमी का शुभ मुहूतः
बसंत पंचमी तिथि 29 जनवरी को सुबह 10.46 बजे लग चुकी है लेकिन सूर्योदय का समय न होने की वजह से बसंत पंचमी 30 जनवरी को मनाई जाएगी. पंचमी तिथि 29 जनवरी सुबह 10 बजकर 46 मिनट से लेकर 30 जनवरी को दोपहर 1 बजकर 18 मिनट तक रहेगी. इसलिए 30 जनवरी को सूर्योदय के बाद बसंत पंचमी की पूजा की जाएगी।

ज्योतिष नजरिए से वसंत पंचमी 2020
-इस वर्ष वसंत पंचमी पर कई तरह के शुभ योग का निर्माण हो रहा है। ज्योतिष नजरिए से वसंत पंचमी पर कई तरह के राजयोग का निर्माण हो रहा है।
-वसंत पंचमी पर मकर राशि में सूर्य और मीन राशि में चंद्रमा होने से वरिष्ठ योग बनेगा।
-वसंत पंचमी के दिन सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण होने यह बहुत ही शुभ फलदायी होता है। इन योगों में अशुभ दोषों का प्रभाव कम हो जाता है।
-वसंत पंचमी पर शनि ग्रह का भी प्रभाव रहेगा। 24 जनवरी को शनि मकर राशि में आने और इनके उदय होने से भी शुभ योग बन रहा है। बीते साल 27 दिसंबर को शनि अस्त चल रहे हैं।
-30 जनवरी को रवियोग भी बन रहा है। रवि योग को भी ज्योतिष में बहुत शुभ माना गया है।
-बुध,गुरु और शुक्र के योग से शुभकर्तरी योग का निर्माण हो रहा है।

इस तरह से करें मां वीणा वादिनी की अराधना

  • इस दिन पीले, बसंती या सफेद वस्त्र धारण करें। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा की शुरुआत करें।  
  • मां सरस्वती को पीला वस्त्र बिछाकर उस पर स्थापित करें और रोली मौली, केसर, हल्दी, चावल, पीले फूल, पीली मिठाई, मिश्री, दही, हलवा आदि प्रसाद के रूप में उनके पास रखें।
  • मां सरस्वती को श्वेत चंदन और पीले तथा सफेद पुष्प दाएं हाथ से अर्पण कर।
  • केसर मिश्रित खीर अर्पित करना सर्वोत्तम होगा।
  • मां सरस्वती के मूल मंत्र ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः का जाप हल्दी की माला से करना सर्वोत्तम होगा।
  • काले, नीले कपड़ों का प्रयोग पूजन में भूलकर भी ना करें।शिक्षा की बाधा का योग है तो इस दिन विशेष पूजा करके उसको ठीक किया जा सकता है।

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