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बुन्देलखण्ड में व्यवसायिक खेती की संभावनाः कृषि मंत्री

बांदा,

ड्रोन के माध्यम से खर पतवार नाशीे छिड़काव किया जाएगा

बुन्देलखण्ड में व्यवसायिक खेती की पर्याप्त संभावना है, इस पर किसानों द्वारा प्राथमिकता के साथ ध्यान दिया जाए। सामूहिक खेती तथा कृषक उत्पादक समूह को प्रोत्साहित किया जाए। वर्ष 2013-14 से अब तक 13900 स्प्रिंकलर सेट किसानों को वितरित किया जा चुका है। वर्तमान केंद्र व प्रदेश सरकार किसानों के हित में तथा बुंदेलखंड के विकास के लिए प्राथमिकता से कार्य कर रही है इसके लिए हर संभव सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है।

उपरोक्त विचार आज बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में बुंदेलखंड के विकास के संबंध में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के सेमिनार कार्यक्रम में कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री, उ.प्र., लाखन सिंह राजपूत ने व्यक्त किए।

मंत्री ने कहा कि कृषि में नई नई तकनीक विकसित करने, अनुसंधान तथा कृषि संबंधित क्षेत्रों के विकास के लिए प्रदेश में वर्तमान में चार कृषि विश्वविद्यालय तथा 89 कृषि विज्ञान केंन्द्र संचालित हैं। इसके अतिरिक्त 20 अन्य कृषि विज्ञान केंन्द्रों को उत्तर प्रदेश में खोले जाने हेतु स्वीकृति दी जा चुकी हैं, इससे निश्चित ही किसानों को नई नई तकनीक के बारे में जानकारी देने तथा अनुसंधान को गति प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार किसानों के प्रति पूर्ण संवेदनशीलता दिखाते हुए पीएम किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत प्रतिवर्ष किसानों को 6000 ( छः हजार रुपये) की सहायता देने का कार्य कर रही है।

इसके अतिरिक्त किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष रबी व खरीफ में न्यूनतम समर्थन मूल्य में भारी वृद्धि की जाती है। बुन्देलखण्ड में लघु व सीमांत कृषको को 90ः अनुदान, बृहद कृषको को 80 फीसदी अनुदान प्राप्त ड्रिप व स्प्रिंकलर सेट वर्तमान में दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों के हित में वर्तमान केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा जिस प्रकार बड़े स्तर पर विभिन्न योजनाएं संचालित कर किसानों को लाभान्वित किया जा रहा है अब तक पूर्ववर्ती सरकारो द्वारा नही किया गया है।इस अवसर पर साउथ एशिया सिमिट-काठमांडू, नेपाल के  निदेशक डॉ ए.के. जोशी ने कहा कि तकनीक का प्रयोग करके अब ड्रोन के माध्यम से खर पतवार नाशी के छिड़काव करने का कार्य किया जाएगा, इससे खेती में खर पतवार को नियंत्रित करने में सहायता मिलेगी।भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान कानपुर के वैज्ञानिक डॉ जी.पी. दीक्षित ने बुन्देलखण्ड में दलहनी फसलों की खेती करने पर जोर दिया तथा दलहन की नई -नई तकनीक व अनुसंधान के बारे में किसानों को जागरूक किया।

इस मौके पर डॉ सी.एम.त्रिपाठी ने परंपरागत जल स्रोतों तालाब, नदी,नाले ,कुआ, पोखर का जीर्णोद्धार करने के बारे में जागरूक किया। डॉ रजनीश रंजन ने बताया कि बुन्देलखण्ड में मानसून स्टेशन बनाने का प्रपोजल भेजा गया है। इसके द्वारा यहाँ के मानसून पूर्वानुमान को किसानों के मोबाइल पर सीधे भेजा जा सकेगा तथा वर्षा होने, ओला पड़ने जैसी अन्य मौसम संबंधी जानकारी 15 से 30 दिन पूर्व ही किसानों को प्राप्त हो सकेगी।प्रगतिशील किसान उमाशंकर पांडेय ने भू जल संरक्षण के संबंध में जल ग्राम जखनी का मॉडल प्रस्तुत किया तथा प्रगतिशील कृषक लल्ला सिंह ने  शून्य बजट आधारित लल्ला किसान सिस्टम का प्रस्तुतीकरण किया।

प्रगतिशील किसान श्याम बिहारी गुप्ता ने कृषकों की आय 01 वर्ष में तीन गुनी करने संबंधी 10 सूत्री योजना प्रस्तुत की।इस दौरान मंत्री श्रम एवं सेवायोजन मनोहर लाल पंत तथा अन्य जनप्रतिनिधि  चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय के डॉ एस सोलोमन सहित अन्य क्षेत्रों के विषय विशेषज्ञ ध् वैज्ञानिक तथा सैकड़ों किसान मौजूद रहे।

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