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पर्यटन से मिलेगी बुन्देलखण्ड को आर्थिक समृद्धि

बाँदा,

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बुन्देलखण्ड क्षेत्र के सर्वांगीण विकास को गति देने के लिए इस सम्भाग की समस्याओं एवं उनके निदान की रणनीति हेतु 10 एवं 11 जनवरी 2020 को राष्ट्रीय स्तर की दो दिवसीय संगोष्ठी बाँदा के कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित होने जा रही है। इस हेतु बुन्देलखण्ड विकास सोसाइटी से बुन्देलखण्ड की प्रमुख समस्याओं एवं समाधान पर एक रिपोर्ट मांगी गई थी। चूंकि हमारी संस्था विगत कई वर्षों से बुन्देलखण्ड में पर्यटन विकास के लिए कार्यरत है। इसीलिए हमने बुन्देलखण्ड के पर्यटन पर केन्द्रित रिपोर्ट तैयार कर नियोजन विभाग, उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव को लखनऊ जाकर सौंपी।

हम बुन्देलखण्ड के निवासी हैं, इसलिए एक जागरूक नागरिक होने के नाते हमारी भी सोच बुन्देलखण्ड के सर्वांगीण विकास में है। इसलिए आज आज बुन्देलखण्ड विकास सोसाइटी ने स्टेशन रोड स्थित अपने कार्यालय में एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया। इस प्रेस वार्ता का उद्देश्य उन बिन्दुओं पर चर्चा करना था जिन्हें हमने उक्त रिपोर्ट में समाहित किया था। इस प्रेस वार्ता में बुन्देलखण्ड विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री अयोध्या सिंह पटेल एवं हमीरपुर सदर के विधायक श्री युवराज सिंह उपस्थित रहे। बुन्देलखण्ड विकास सोसाइटी के अध्यक्ष श्याम जी निगम एवं सचिव सचिन चतुर्वेदी ने संस्था के अन्य सदस्यों निखिल सक्सेना (एड.), अभिषेक सिंह (अध्यापक), दिनेश दीक्षित (महाप्रबन्धक बांदा अर्बन कोआपरेटिव बैंक), संजय निगम अकेला (प्रबन्धक एवं समाजसेवी), पंकज गुप्ता (होटल व्यवसायी) एवं अरूण खरे (वरिष्ठ पत्रकार) के साथ दोनों जनप्रतिनिधियों को रिपोर्ट सौंपी।

बुन्देलखण्ड के विकास के लिये प्रयासरत प्रदेश सरकार ने बुन्देलखण्ड विकास बोर्ड का गठन किया था। इस बोर्ड ने इस क्षेत्र की तमाम समस्याओं का समाधान करने के लिए उपसमितियां बनाई थीं। इन समितियों की रिपोर्ट पर मंथन करने के लिए बांदा कृषि विश्वविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन 10 व 11 जनवरी को किया जायेगा। जिसमे पांच सेक्टरों के विशेषज्ञ चर्चा करेंगे ताकि बुन्देलखण्ड के विकास का मार्ग प्रशस्त हो सके।

यह बात बुन्देलखण्ड विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष व पूर्व मंत्री अयोध्या सिंह पटेल ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही। उन्होने बताया कि सेमिनार में मुख्य फोकस कृषि पर होगा, इसके लिए निर्माण, सेवाक्षेत्र, सोशल सेक्टर व जलक्षेत्र पर चर्चा होगी। इस सेमिनार में भारत सरकार के मंत्री व राज्य सरकार के मंत्री भाग लेंगे। साथ ही मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ भी भाग ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा है कि बुन्देलखण्ड आगे बढे़। इसी दिशा में बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस वे व डिफेंस कारिडोर हैं, जिसके लिए भूमि क्रय करने का काम पूरा हो रहा है। श्री सिंह ने कहा कि बुन्देलखण्ड में विकास की दृष्टि से बुन्देलखण्ड विकास सोसायटी का काम सराहनीय है।

वही हमीरपुर विधायक एवं बुन्देलखण्ड विकास सोसाइटी के संरक्षक युवराज सिंह ने कहा कि बुन्देलखण्ड विकास सोसाइटी पर्यटन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस सोसायटी ने पिछले वर्ष झांसी में बुन्देलखण्ड इन्वेस्टर्स सम्मिट का आयोजन किया था। एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि बुन्देलखण्ड को आॅर्गेनिक खेती का हब बनाने की दिशा में काम हो रहा है। मैने अपने विधानसभा क्षेत्र में भी काम कराना शुरू कर दिया है। श्री सिंह ने कहा कि बुन्देलखण्ड में विकास की अपार सम्भावनाएं हैं। सरकार इस क्षेत्र में प्राचीन इमारतों व धार्मिक स्थलांे के विकास के लिए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 60 लाख रूपये दे रही है। इसी तरह इन स्थलों के विकसित होने पर कोई भी व्यक्ति अपने आवास में गेस्ट हाउस बना सकता है, इसके लिए सरकार अनुदान भी दे रही है। उन्होने ये भी कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने से पर्यटकों का आवागमन बढे़गा। पर्यटकों के आने से यहां विकास गति तेज होगी। इसी दिशा में सेमिनार मील का पत्थर साबित होगा।


बुन्देलखण्ड विकास सोसाइटी ने यहां पर्यटन विकसित होने में आ रही इन प्रमुख समस्याओं पर बात की -

  1. अधिकांश पर्यटन स्थलों पर पर्याप्त सुरक्षा, ठहरने एवं स्तरीय भोजन की व्यवस्था न होना।
  2. राही पर्यटक गृह को अत्याधुनिक बनाने की आवश्यकता है। अन्य निजी गेस्ट हाउस व होटल की तुलना में इनका किराया महंगा और सुविधायें नाकाफी हैं। इसलिए इनमें कोई ठहरना पसन्द नहीं करता। जबकि कम आय की तुलना में इनकी देखरेख में लाखों रूपया प्रतिमाह बर्बाद किया जा रहा है। 
  3. पर्यटन विभाग ने अभी तक कालिंजर जैसे विश्व महत्व के पुरातात्विक पर्यटन स्थल को मुख्य स्थलों की सूची में नहीं रखा है, जबकि खजुराहो के बाद कालिंजर ही वह स्थान हो सकता है जो विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर सकता है।
  4. पूर्व में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में पर्यटन स्थल वाले जनपदों में पर्यटन प्रोत्साहन परिषद बनाई गयी थी। एक-दो बैठकों के बाद परिषद भी निष्क्रिय हो गई। जो आज तक है।
  5. पर्यटन स्थलों के लिए रेल व बसों की सुविधायें अभी भी कम हैं। कम से कम हर बड़े शहर से वह स्थल रेल मार्ग से जुड़ा हो।
  6. पर्यटन विभाग द्वारा लगातार समाचार पत्र, पत्रिकाओं, टीवी चैनल, इन्टरनेट व सोशल मीडिया में किये जाने वाले प्रचार-प्रसार का नितांत अभाव है। पर्यटन विभाग को कहीं अधिक सक्रिय होने की आवश्यकता है। बिना प्रचार-प्रसार के पर्यटकों की कल्पना करना अदूरदर्शिता होगी।
  7. जिस जनपद में पर्यटन स्थल है, कम से कम उस जनपद के हर नगर, कस्बे व मुख्य गांवों में पर्यटन स्थल के बारे में सूचना पट लगा होना चाहिए, ताकि प्रत्येक जनपद वासी अपने पर्यटन स्थल के प्रति जागरूक हो सके, जोकि वर्तमान में नहीं है।
  8. पर्यटन स्थल पहुंचने के लिए अच्छा रोड नेटवर्क भी नहीं है। वर्षों बीत जाते हैं, तब कहीं जाकर सड़कें बनती हैं या रिपेयर होती है। अन्यथा गढ्ढों वाली सड़कों से पर्यटकों को बुलाने की कैसे उम्मीद की जा सकती है। ये विचारणीय प्रश्न है।
  9. पर्यटन स्थलों पर मोबाइल व इंटरनेट के लिए मजबूत नेटवर्क नहीं होता। जिससे पर्यटकों को परेशानी होती है।


पर्यटन विकास में समाधान हेतु सुझाव
अभी तक बुन्देलखण्ड में पर्यटन के केवल तीन प्रकार ही उपलब्ध हैं। प्राकृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन। इनमें भी अधिकतर इन्फ्रास्ट्रक्चर के अभाव में पर्यटक विहीन हैं। यानि जो हमारे पास स्वतः ही उपलब्ध है, फिर भी पर्यटकों की आवाजाही यहां कम है तो यह हमारी कमी है। जबकि भारत देश क्या पूरा विश्व पर्यटन की आय पर काफी हद तक निर्भर है। तो क्यों नहीं इस पिछड़े कहे जाने वाले क्षेत्र को समृद्धि की ओर ले जाया जाये? यहां के प्राकृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन को बढ़ाने के लिए इन सात सूत्रों पर कार्य किया जाना चाहिए।
1.    स्वागत
2.    सूचना
3.    सुविधा
4.    सहायता
5.    संरक्षा
6.    सुरक्षा
7.    स्वच्छता 

बुन्देलखण्ड में इन्हें विकसित करने की आवश्यकता है

  •  ग्रामीण पर्यटन: बुन्देलखण्ड की असली झलक यहां के ग्रामीण इलाकों में देखने को मिलती है। बुन्देलखण्ड का मूर्ति शिल्प, दस्तकारी, काष्ठ कला, धातु शिल्प तथा मिट्टी के बर्तन व खिलौने यहाँ के लोकजीवन के महत्वपूर्ण घटक हैं। यहां के गांव अपनी कला-संस्कृति व रीति-रिवाज के लिए पर्यटकों को आकर्षित करने की योग्यता रखते हैं। इसे विकसित करने से यहां के गांव व ग्रामीण भी समृद्ध हो सकेंगे।
  • फिल्म पर्यटन: बुन्देलखण्ड में कई ऐसे स्थान हैं जो फिल्म शूटिंग के लिहाज से बहुत अच्छे हैं। चूंकि फिल्में हमारे मन-मस्तिष्क पर अधिक प्रभाव डालती हैं, इसलिए यदि ऐसे स्थानों का चयन करके वहां इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाये व फिल्म इंडस्ट्री को भी यहां शूटिंग करने पर सुविधायें दी जाये ंतो निश्चित ही ये प्रभावी रूप से आगे बढ़ेगा।
  • मनोरंजनात्मक पर्यटन: अधिकतर मामलों में पर्यटक मनोरंजनात्मक गतिविधियों के लिए पर्यटन करते हैं। तनाव मुक्ति, आराम व कुछ परिवर्तन की चाह ने ही इस प्रकार के पर्यटन के लिए नये आयाम खोले हैं। 
  • स्वास्थ्य पर्यटन: बुन्देलखण्ड में अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं की कमी है, जिस कारण रोजाना हजारों लोग बुन्देलखण्ड से बाहर आसपास के महानगरों में बेहतर चिकित्सा के लिए जाते हैं। यदि यही सुविधायें यहां पर उपलब्ध हों तो बाहर से भी लोग यहां आकर बेहतर चिकित्सा करा पायेंगे, जिससे यहां की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
  • साहसिक पर्यटन: आज के युवा पश्चिमी देशों में बढ़ रहे साहसिक यात्रा की तर्ज पर कुछ साहसिक यानि एडवेंचरस एक्टिविटीज करना चाहते हैं। वे ट्रैकिंग, राॅक क्लाइम्बिंग, रिवर राफ्टिंग, कैम्प फायर इत्यादि के लिए जाना चाहते हैं। बुन्देलखण्ड में इन सबके लिए काफी सम्भावनायें हैं।
  • पर्यावरणीय पर्यटन: धनी और समृद्धशाली पर्यटक ऐसे स्थानों की यात्रा को अधिक प्राथमिकता देते हैं जहां उन्हें सांस लेने के लिए प्रदूषण मुक्त वायु उपलब्ध हो सके। ऐसे पर्यटन को विकसित करने से दोहरा लाभ प्राप्त होगा, आय और शुद्ध पर्यावरण।

पर्यटन विकास हेतु क्रियान्वयन की प्रक्रिया

  • बुन्देलखण्ड दर्शन के सभी पर्यटक स्थलों का का एक सूचना पट देश व विदेश के सभी एयरपोर्ट में डिस्प्ले हो।
  • एएसआई द्वारा इन स्थानों के संरक्षण पर और अधिक ध्यान दिए जाने की जरूरत है।
  • एक मजबूत रोड नेटवर्क तैयार हो ताकि एक पर्यटक स्थल को दूसरे से सुगमता से जोड़ा जा सके।
  • पर्यटन स्थलों पर मूलभूत संसाधनों का निर्माण भी जरूरी है।
  • लोगों के अन्दर ‘अतिथि देवो भवः’ की भावना विकसित करने के लिए उन्हें उचित प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की ठोस योजना बनायें।
  • पर्यटन स्थल के मार्ग में पड़ने वाले शहर/कस्बों/गांवों में पर्यटक मित्र बनाये जायें, ताकि वे आवश्यक होने पर पर्यटकों की मदद के लिए सुलभ हो सकें। इस हेतु पर्यटक मित्र को उचित मानदेय दिया जाये।
  • जिन पर्यटन स्थलों पर ठहरने के उचित प्रबन्ध नहीं हैं उन स्थानों में तत्कालिक तौर पर स्थानीय निवासियों को सहायता देकर पेइंग गेस्ट काॅन्सेप्ट पर पर्यटकों के ठहरने की उचित व्यवस्था किया जाना चाहिए।
  •  होटल, गेस्ट हाउस व धर्मशालाओं में पर्यटन स्थलों की संक्षिप्त जानकारी वहां पर लगे बोर्ड में प्रदर्शित होनी चाहिए।
  • होटल, गेस्ट हाउस व धर्मशालाओं के मैनेजर सहित समस्त स्टाफ को ‘अतिथि देवो भवः’ का प्रशिक्षण कराया जाये।
  •  क्षेत्र में चलने वाली टैक्सी ड्राइवरों व रिक्शा चालकों को भी यहां के स्थलों की जानकारी के साथ ‘अतिथि देवो भवः’ का प्रशिक्षण कराया जाये।
  • पर्यटन का रोड मैप इस प्रकार होना चाहिए जो एक दूसरे को लिंक करता हो। जैसे - चित्रकूट आने वाला पर्यटक कालिंजर कैसे शाॅर्टकट रास्ते से पहुंचे, इस पर काम होना चाहिए।
  • चित्रकूट और कालिंजर जैसे स्थानों पर लाइट एंड साउन्ड शो का आयोजन हो ताकि आकर्षण के साथ-साथ लोगों को उस स्थान के बारे में सही व सटीक जानकारी मिल सके।
  • सभी नजदीकी रेलवे स्टेशन, बस स्टैण्ड, टैक्सी स्टैण्ड इत्यादि में आस-पास के पर्यटन स्थल के बारे में जानकारियों वाला बोर्ड लगा हो, वहां के आसपास की दीवारों पर पर्यटन स्थलों के चित्र अंकित हों।
  • नजदीकी रेलवे स्टेशन, बस स्टैण्ड में पहले से लगे एनाउन्समेंट सिस्टम द्वारा थोड़ी-थोड़ी देर में पर्यटन स्थलों के बारे में प्रि-रिकाॅर्डेड संक्षिप्त जानकारी दी जाये।
  • प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप माॅडल पर बुन्देलखण्ड दर्शन के नाम से एक साप्ताहिक बस चलाई जाये। 
  • चूंकि बुन्देलखण्ड क्षेत्र का सर्वाधिक प्रसिद्ध क्षेत्र मध्य प्रदेश का खजुराहो है, देशी-विदेशी पर्यटक भी वहां जाते हैं। वहां के पर्यटकों को जानकारी व सहायता उपलब्ध कराने के लिए उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग का भी एक ब्रांच आॅफिस खोला जाना चाहिए।

पर्यटन विकास के सम्भावित परिणाम
पर्यटन मानव, प्रकृति और संस्कृतियों के मध्य एक सामंजस्य स्थापित करता है। इसके साथ ही यह राजस्व प्राप्ति का स्रोत व अनेक लोगों को रोजगार देने का माध्यम भी होता है। विगत कई वर्षों में पूरे देश में पर्यटकों की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। कहीं न कहीं यह एक संगठित उद्योग की शक्ल लेता दिखाई दे रहा है। इसलिए इससे होने वाले लाभ के बारे में भी जानना चाहिए ताकि इसे चरणबद्ध तरीके से विकसित करते हुए बुन्देलखण्ड के निवासियों की स्थिति बेहतर की जा सके।

बुन्देलखण्ड को इन समस्याओं से मिलेगी मुक्ति
इतने सारे पर्यटन स्थलों को अपने में समाहित किये बुन्देलखण्ड आज भी पर्यटकों की कमी से जूझता है। इसकी ये कमी पूरा करने के लिए यहां के संसाधनों में भी बदलाव करेंगे तो पर्यटक भी आयेंगे। पर्यटक आयेंगे तो रोजगार बढ़ेगा, लोगों की आय बढ़ेगी और बुन्देलखण्ड समृद्ध होगा। तब आर्थिक अभाव के कारण पैदा यहां की तमाम समस्याओं पर स्वतः ही रोक लग जायेगी।

कृषि का बेहतर विकल्प पर्यटन
बुन्देलखण्ड एक कृषि प्रधान क्षेत्र है। यहां के अधिकतर लोगों की आजीविका का साधन ही कृषि है। इसके बावजूद अनियमित मौसम ने यहां की कृषि को बहुत प्रभावित किया है। जिसका परिणाम यह है कि यहां भुखमरी, कुपोषण, जल संकट, पलायन व अन्ना प्रथा जैसी समस्याओं ने जन्म ले लिया। अल्प वृष्टि, अति वृष्टि, सूखा, व रोजगार हेतु यहां से पलायन, अन्ना प्रथा व गरीबी यहां की प्रमुख समस्यायें हैं, जिनकी वजह से यहां के निवासियों को वह सब कुछ प्राप्त नहीं हो पा रहा है जो भारत जैसे तेजी से बढ़ते हुए देश के निवासियों को मिलना चाहिए। सरकारों के बार-बार प्रयास करने के बावजूद भी इन समस्याओं पर रोक नहीं लग पा रही है। इसलिए  पर्यटन ही एक ऐसा सेक्टर है जिसके डेवलप होने से स्थानीय लोगों को आजीविका के रूप में कृषि का विकल्प मिल सकता है।

बुन्देलखण्ड एक नजर में
बुन्देलखण्ड अपनी ऐतिहासिकता और प्राकृतिक संरचना के कारण प्रसिद्ध है। यहां पर प्राकृतिक, ऐतिहासिक व धार्मिक विरासत के नाम पर इतना कुछ है कि यह क्षेत्र विश्व के सर्वाधिक समृद्ध क्षेत्रों में शुमार हो सकता है। बस जरूरत है तो थोड़ा ध्यान देने की। भारत के कुछ अन्य क्षेत्रों की तुलना में यह अभी भी अपेक्षाकृत काफी पिछड़ा हुआ है। बुन्देलखण्ड की जीवनशैली एक जैसी है किन्तु उसमें आंचलिकता और लोकत्व की झलक उसे विशिष्टता प्रदान करती है। विन्ध्याचल के मैदानी भागों में फैला बुन्देलखण्ड, भारत का हृदय स्थल है। लोक परम्पराओं और विविधताओं की धरोहर का देश है बुन्देलखण्ड। जहाँ आल्हा-ऊदल, रानी लक्ष्मी बाई, और रानी दुर्गावती की शौर्य गाथायें यहाँ की मिट्टी में सुगन्ध की तरह बिखरी हुयी है। 

  • क्षेत्रफल            ः 29417 वर्ग किलोमीटर (उत्तर प्रदेश)
  • भौगोलिक स्थिति        ः बुन्देलखण्ड की सीमायें
  • उत्तर में आगरा, इटावा, कानपुर
  • दक्षिण में मध्य प्रदेश बुन्देलखण्ड
  • पूर्व में प्रयागराज, फतेहपुर
  • पश्चिम में मध्य प्रदेश 
  • जनसंख्या         ः 96,81,552 (सन् 2011 की जनगणना अनुसार)
  • लिंगानुपात        ः 877
  • साक्षरता            ः 67.53 प्रतिशत (सन् 2011 की जनगणना अनुसार)
  • प्रमुख भाषाएं     ः हिन्दी, बुन्देली व अंग्रेजी
  • उपयुक्त मौसम  ः अगस्त से मार्च तक (8 माह)

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