< संविधान दिवस : महाराष्ट्र में राजनीति का धारावाहिक Hindi News - Breaking News, Latest News in Hindi, हिंदी में समाचार, Samachar - Bundelkhand News @सौरभ चन्द्र द्विवेदी,

संविधान दिवस : महाराष्ट्र में राजनीति का धारावाहिक

@सौरभ चन्द्र द्विवेदी, विश्लेषक  

संविधान अधिकार देने के साथ कर्तव्य की याद दिलाता है। विश्व के सबसे मजबूत लोकतांत्रिक राष्ट्र में लोकतंत्र हत्या एवं नेताओं की राजनीतिक आत्महत्या का दौर शुरू रहता है। चूंकि सत्ता के अधिकार के साथ कर्तव्य का पालन करना विस्मृत हो चुके हैं। यही वजह है कि पद लोलुपता ने आम आदमी की आत्मा पर आघात पहुंचाया है। फिर भी दल और दलीय व्यक्ति इस आघात महसूस नहीं करते। यदि वे अहसास करते तो भाजपा - शिवसेना गठबंधन को बहुमत मिलने के उपरांत ऐसा राजनीतिक धारावाहिक देखने के लिए नहीं मिलता। इस धारावाहिक के पीछे किस्सा कुर्सी का तथा पद मुख्यमंत्री का है। 

 

इस मुख्यमंत्री पद ने संविधान दिवस पर संविधान को ही ठेंगा दिखा दिया है। नेताओं की नीति और नैतिकता से विश्वास उठने लगा है। बेशक ये लोग जनहित की बात करते हैं पर हकीकत में पदहित के बाद की ज़बान जनहित कही जा सकती है। 

 

ऐसा इसलिए कि गठबंधन को बहुमत के बाद भी अलगाव उत्पन्न हो जाना। तत्पश्चात भाजपा का अजित पवार से हाथ मिलाना। इस धारावाहिक का सबसे दिलचस्प मोड़ अजित पवार के इ इस्तीफा देने की सच्चाई से सामने आएगा। फिलहाल अभी इस्तीफा देने को बात की पुष्टि नहीं हो सकी है।

 

राजनीति के शह और मात के खेल में शाह हैं तो मोदी भी हैं। भारतीय राजनीति क्षितिज के महत्वपूर्ण दो ध्रुव, जिनसे ऐसी उम्मीद नहीं थी। ऐसी उम्मीद की सत्ता के लिए गफलत प्रयास किए जाएंगे। कभी-कभी सत्ता से दूर रहने पर भी जनता की सहानुभूति मिल जाती है। 

 

इस राजनीतिक धारावाहिक से यह परिणाम निकलकर आ रहा है कि जनता को किसी भी दल और नेता से सहानुभूति नहीं रह जाएगी। ऐसा ही होना भी जरूरी है ताकि जनता अपने देश को बचा सके। इस प्रकार के धारावाहिक से जनता सबक ले और राजनीति में अच्छे लोगों का गांव से समर्थन करे और आगे बढ़ने में मददगार हो अन्यथा राजनीतिक प्रदूषण का सामना हमेशा करना पड़ेगा।  

 

 

 

चर्चित खबरें

Your Page has been visited    Times