< नया नहीं है महानायक का बुन्देली प्रेम खून का रिश्ता है Hindi News - Breaking News, Latest News in Hindi, हिंदी में समाचार, Samachar - Bundelkhand News @संदीप रिछारिया,&nb"/>

नया नहीं है महानायक का बुन्देली प्रेम खून का रिश्ता है

 

@संदीप रिछारिया, कार्यकारी संपादक

तो लो भइया, जो है हमाओ बुंदेली को प्रमोट करबे को तरीका

बांदा में है ननिहाल, चित्रकूट में है माता जी का गुरूद्वारा

डाॅ0 हरिवंशराय बच्चन ने बांदा में रचा था बुन्देली  होली गीत

रिलीज के पहले ही स्टेज पर गाया था अमिताभ ने लावारिस फिल्म का गीत

मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है, जो है नाम वाला वही तो बदनाम है.. गाना याद है। नही तो इसके बारे में हम बताए देते हैं। भले ही इस फिल्म को आपने सिल्वर स्क्रीन पर देखा हो और टेपरिकार्डर, ग्रामोफोन पर सुना हो। लेकिन इस गाने से बुन्देलखण्ड की वह याद जुड़ी है जिसे केवल बांदा के लोग ही जानते हैं। अब आप यह सोच रहे हों कि आखिर 80 के दशक के इस गाने की मैं बात क्यों कर रहा हूं। वास्तव में इस गाने की याद इसलिए ताजा हो गई क्योंकि 15-16 नवंबर को वह हुआ जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। शायद उन्होनेे भी नहीं जिन्होंने खुद एक बड़ा काम कर डाला।

वास्तव में यहां पर बात अमिताभ बच्चन की हो रही है। पिछले दिनों केबीसी की हाट सीट पर पहुंची खुशबू तिवारी के परिजनों कोे बुन्देली भाषा में बात करते देख अमिताभ को अपना बचपन याद आ गया। लेकिन वह महानायक हैं। जो अपने अजीत को भी अपने ही अंदाज में पेश करते हैं, लिहाजा उन्होंने बुंदेली को केबीसी के मंच से प्रमोट करने का नायाब तरीका निकाला। प्रतिभागी से पहले बुन्देली का वाक्या बुलवाया और फिर खुद उसे दोहराया। इस दौरान उनकी आंखों की चमक बता रही थी कि बुन्देली उनके लिए नई नहीं है। बुन्देलखण्ड से उनका खन के साथ ही आध्यात्मिक रिश्ता भी हैै। दावा तो यह भी है कि उनको दूसरा जीवन बुन्देलखण्ड के एक संत ने ही दिया है।  

महानायक यानि सदी के सर्वश्रेष्ठ अभिनेता 70 दशक पारकर उर्जा से ओतप्रोत अमिताभ बच्चन। चर्चित टीवी शो कौन बनेगा करोड़पति में 15-16 नवंबर की रात हाॅट सीट पर पहुंची मध्य प्रदेश इलाके के बुन्देलखण्ड की निवासी खुशबू तिवारी से आग्रहपूर्वक ‘‘काय का हो रओ‘ को अर्थ सहित सुनकर समझकर खुद दोहराने वाले महानायक के द्वारा कहे गए अलफाज से भले ही बुन्देलखण्ड गदगद हो गया हो, पर वास्तव में उन्होंने बुन्देली के शब्द पहली बार नही दोहरा हैं। उन्होंने एक दो बार नहीं बल्कि दर्जनों बार बुन्देली के शब्दों का प्रयोग न केवल अपनी फिल्मों में किया है, बल्कि खुद उनका खून का रिश्ता बुन्देलखण्ड से है। अभिनेता बनने के बाद अपने चरमोत्कर्ष के दिनों में उन्होंने एक बार यहां पर एक स्पेशल शो भी किया था। इतना ही नहीं उन्होंने पावन धाम चित्रकूट में आकर भगवान कामतानाथ के दर्शन करने के साथ मंदाकिनी में स्नान भी कई बार किया। इसके साथ ही उनके जीवन की एक अमूल्य थाती भी यहां से जुड़ी है। अमिताभ बच्चन ने अपनी मां तेजी बच्चन की अस्थियों को गंगा मैया के जल में प्रवाहित करने के साथ ही चि़त्रकूट में वर्ष 2008 में मंदाकिनी मैया के राघव प्रयाग घाट में समर्पित की थीं।

अमिताभ का रिश्ता बांदा जिले से खून का है। उनके पिता हरिवंशराय बच्चन की पहली पत्नी कमला जी का मायका बांदा में था। कमला जी के निधन के बाद हरिवंशराय बच्चन ने तेजी बच्चन से विवाह किया। अमिताभ व अजिताभ उनके पुत्र हुए। भले ही तेजी जी से हरिवंश जी ने विवाह कर लिया। वह अपनी पहले की ससुराल को नहीं भूले। रेलवे क्रासिंग के बगल में अपने साले अधिवक्ता जगदीश राजन की के घर तेजी, अमिताभ, अजिताभ व हरिवंश जी गर्मी व सर्दी की छुट्टियों के साथ ही अक्सर आते रहते थे। बुंदेली होली का खुमार तो उन पर ऐसा चढ़ा कि उन्होंने गीत ही रच दिया। गीत था ‘रंग बरसे भीजे चुनर वाली रंग बरसे कीने मारी पिचकारी तोरी भींजी अंगिया‘ रंग रसिया रंग रसिया। डाॅक्टर हरिवंशराय बच्चन के इस गीत का उपयोग यश चोपड़ा की फिल्म सिलसिला में किया था। फिल्म के साथ गीत भी बहुत हिट हुआ। इस कालजयी गीत का हाल यह है कि आज भी होली के मौके पर युवाओं को इस गीत पर थिरकते देखा जा सकता है। वैसे बचपन से बांदा आकर अपने ननिहाल में धूम मचाने वाले अमिताभ बच्चन ने राजनीति में आने से ठीक पहले मामी इंद्राराजन के काॅलेज आर्य कन्या इंटर कालेज के रजत जयंती समारोह में 5 अक्टूबर 1979 को विशेष प्रस्तुति दी थी। महत्वपूर्ण बात यह है कि लावारिश फिल्म का गाने मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है‘ को पहली बार स्वयं रिलीज के पहले स्टेज पर गाकर लोगों को मंत्र मुग्ध कर दिया था। मजे की बात यह रही कि उन्होंने रंग बरसे सहित तमाम गाने व डायलाग भी सुनाए थे।

यहां के लोगों के जेहन में यह बात भी ताजा है कि उन्होंने स्टेज से बुन्देली के कई अलफाज व वाक्य बोले थे। यहां पर वह अपने बचपन के मित्र राजू रिक्शा वाले से मिलने भी गए थे। इसके साथ ही चित्रकूट के जानकी कुंड स्थित वेदांती आश्रम के पूर्व महंत पंजाबी भगवान से पिता व मांता जी ने दीक्षा ली थी। वह अक्सर चित्रकूट आकर कई .कई दिनों तक रहते थे। अमिताभ बच्चन ने एक काटेज बहुत पहले अपने पिता व माता जी के लिए यहां पर बनवाया भी था। वह चित्रकूट कई बार आए। लेकिन एक या दो बार ही उनका कार्यक्रम सार्वजनिक हो पाया। पिछली बार वह चित्रकूट 2008 में आए थे! मता जी की अस्थियों का विसर्जन उन्होंने राघव प्रयाग घाट पर किया था। उनके साथ अभिषेक, ऐश्वर्या, व नेता अमर सिंह भी आए थे। पंजीबी भगवान के शिष्य व अमिताभ बच्चन के करीबी समाजसेवी व पत्रकार विवके अग्रवाल बताते हैं कि उनकी माता जी पंजीबी भगवान की शिष्या थीं। हर नवरात्रि पर उनका अनुष्ठान होता था। इसे कभी सार्वजनिक नहीं किया गया। समय मिलने पर अमिताभ भी आते थे, लेकिन उनके आगमन को गुप्त ही रखा जाता है।

उन्होंने बताया कि जब कुली फिल्म में शूटिंग के वक्त अमिताभ को चोट लग गई थी और वह जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे थे तो मां के बुलावे पर गुरू जी मुम्बई गए और अस्पताल में पहुंचे। सभी डाॅक्टर व नर्सों को वहां से बाहर कर दिया। कुछ देर तक वह अमिताभ के साथ रहे और उसके कुछ दिन बाद ही अमिताभ ठीक हो गए। इसके बाद वह चित्रकूट भी आए थे। उनकी मां हमेशा यही कहा करती थीं कि अब अमिताभ का जीवन गुरू जी के आर्शीवाद का फल है। भले ही सार्वजनिक रूप से अमिताभ बच्चन ने केबीसी की प्रतिभागी खुशबू तिवारी से बुन्देली के प्रति अनिभिज्ञता जाहिर की हो, लेकिन बुन्देलखण्ड से उनका रिश्ता खून के साथ दिल का भी है।

अन्य खबर

चर्चित खबरें

Your Page has been visited    Times