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बाजीराव मस्तानी के वंशज शादाब बहादुर पानीपत फिल्म के खिलाफ कोर्ट जायेंगे 

बांदा, 

6 दिसंबर को रिलीज होने वाली विवादित फिल्म पानीपत, जिसके डायरेक्टर आशुतोष ग्रूवीकर हैं जिन्होंने हिंदुस्तान के सबसे बड़े युद्ध पर जो मराठो एवं अफगानी लुटेरा अहमद शाह अब्दाली के बीच सन 1761 में हुई थी। जिसकी अगुवाई पेशवा परिवार के सदाशिव राव भाऊ उनके चचेरे भाई बाजीराव पेशवा एवं मस्तानी के वीर पुत्र शमशेर बहादुर कर रहे थे। साथ ही सारे मराठा सरदार जैसे इंदौर के होल्कर, ग्वालियर के सिंधिया, धार के पवार, गुजरात के गायकवाड इत्यादि की भी भूमिका युद्ध में थी।

इस फिल्म में पेशवाओं व मराठाओ की भूमिका को तोड़ मरोड़कर प्रस्तुत करने पर बाजीराव मस्तानी के पुत्र शमशेर बहादुर छठवीं सातवीं एवं आठवीं पीढ़ी के वंशज इस समय मौजूद हैं जो भोपाल में निवास करते हैं और इनका बुन्देलखण्ड के बांदा से भी गहरा रिश्ता हैं उनके वंशजो में नवाब अशफाक अली बहादुर, नवाब शादाब अली बहादुर एवं नवाबजादा अरबाब अली बहादुर, अयान अली बहादुर है। इनमें से शादाब अली बहादुर फिल्म का विरोध करते हुए कहा कि हम इस फिल्म के खिलाफ कोर्ट में जायेंगे। 

नवाब शादाब अली बहादुर का कहना है कि वह बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेंगे कि उनके पूर्वजों का तथा अन्य मराठों का इतिहास फिल्मों में तोड़ मरोड़कर पेश किया जाए। वह भी सिर्फ इसलिए कि डायरेक्टर प्रोड्यूसर पैसा कमा सकें। नवाब शादाब अली बहादुर का कहना है कि कई मराठा सरदार एवं मराठा राज परिवारों से वह संपर्क में है तथा उनका इस विषय को लेकर उनकी चर्चा चल रही है कि हमें आगे क्या कदम उठाना है। हम यह बर्दाश्त नहीं करेंगे। जहां हमारे पूर्वजों ने अपने प्राणों की आहुति देते हुए देश के लिए लड़े। आज उनके पूर्वजों का इस तरीके से भद्दा मजाक उड़ाया जाए।

महाराष्ट्र का कोई भी ऐसा परिवार नहीं बचा था जिसने पानीपत के अंदर उस परिवार के व्यक्तियों की जान ना गई हो, भारत के महान पेशवा और वीर मराठाओं का मजाक होते हुए हम नहीं देख सकते। फिल्म के ट्रेलर में देख कर ही पता चलता है कि सिर्फ सदाशिवराव भाऊ के आस-पास ही फिल्म सीमित है तथा उन पर ही केंद्रित है। वाकई शमशेर बहादुर एवं अन्य सरदारों का रोल कम करके दिखाया गया है। उन्होने कहा कि इस फिल्म में मस्तानी का नाम क्यों इस्तमाल किया गया। जबकि शमशेर बहादुर एक महान योद्धा थे तथा मस्तानी सदाशिव राव भाऊ की चाची थी फिर उनके साथ यह नाम क्यों जोडा गया ?

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