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बांदा शहर के

अपने अभिनय से मनोज जोशी ने चाणक्य को जीवंत किया

बांदा,

बांदा शहर के मेडिकल काॅलेज सभागार में जब चाणक्य की भूमिका में मनोज जोशी का स्वर गूंजा ”मैं आर्य चाणक्य तुम्हें संपूर्ण भारत का चक्रवर्ती सम्राट देने के लिए तत्पर रहूंगा..........“। यह संवाद सुनते ही सभागार में मौजूद हजारों दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से मनोज जोशी का स्वागत किया। इस नाटक को देखने के लिए अंत तक दर्शक सभागार में डटे रहे। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों को संस्था द्वारा सम्मानित भी किया गया।

दिव्य प्रेम सेवा मिशन (हरिद्वार) की बांदा इकाई द्वारा शहर के मेडिकल काॅलेज सभागार में पदमश्री मनोज जोशी अभिनीत ऐतिहासिक नाटक चाणक्य का मंचन कराया गया। इस नाटक की शुरुआत से पहले राष्ट्रीय गान हुआ, उसके बाद मनोज जोशी ने अपने 30 कलाकार साथियों के साथ नाटक का मंचन शुरू किया। उन्होंने इतिहास के एक महान विभूति जिसने अपने शिष्य को सम्राट चंद्रगुप्त बना दिया, ऐसी महान विभूति चाणक्य के जीवन पर आधारित नाटक का मंचन करके लोगों को भाव-विभोर कर दिया। चाणक्य नीति की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नाटक के दौरान मनोज जोशी के एक-एक संवाद पर दर्शक तालियां बजाकर उनका स्वागत कर रहे थे। अक्सर फिल्म और टीवी कार्यक्रमों में हास्य भूमिका के किरदार में रहने वाले मनोज जोशी ने जब सफलतापूर्वक चाणक्य की भूमिका की तो हर किसी ने उन्हें इस रूप में देख कर जमकर तारीफ की।

कार्यक्रम के दौरान मंच से उन व्यक्तियों को भी सम्मानित किया गया जिनका समाज में कुछ न कुछ रचनात्मक योगदान है। जो इस प्रकार हैं-

मीरा देवी (ब्यूरो चीफ, खबर लहरिया, बाँदा) महिला होकर भी समाज की विषम परिस्थितियों में पत्रकारिता कर रही हैं। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में घूम-घूम कर वहां की समस्याओं व प्रमुख मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में मीरा देवी के उल्लेखनीय योगदान को इग्नोर नहीं किया जा सकता।

प्रवीण चौहान (फिल्म निर्माता) अपने हुनर की बदौलत बाँदा के युवाओं को डांस व अभिनय के क्षेत्र में प्रशिक्षित करने और भविष्य के लिए मौका देने वाले प्रवीण चौहान शिक्षाप्रद व सामाजिक समस्याओं पर फिल्में बना चुके हैं। इसी वर्ष प्रशासनिक स्तर पर आयोजित एक वृहद कार्यक्रम इनोवेशन एंड स्टार्टअप समिट में जनपद के लगभग 1000 छोटे-बड़े कलाकारों को संयोजित करके उनकी प्रतिभा को उकेरने का कार्य किया, व आगे भी उन्हें प्रोत्साहित करने में जुटे हैं। उमाशंकर पाण्डेय (समाजसेवी) अपने गांव जखनी को राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि दिलाने वाले उमाशंकर पांडे बुन्देलखण्ड के वास्तविक जल पुरुष हैं। जल संचय के लिए गांव के लोगों में जन जागृति और सामुदायिक सहयोग की भावना विकसित करने वाले उमाशंकर पांडे के प्रयासों की बदौलत ही जखनी आज राष्ट्रीय स्तर पर जल ग्राम घोषित हो चुका है।

अभिषेक सिंह एवं स्मृति सिंह (रक्तदाता, रेड क्लब) बांदा में किसी को अपने परिवारी जन के लिए खून की जरूरत हो और उसे कहीं ना मिले तो उसे बुन्देलखण्ड विकास सोसाइटी द्वारा संचालित रेड क्लब से मदद जरूर मिलती है। विगत 4 वर्षों से रेड क्लब के माध्यम से जात-पात, अमीरी-गरीबी या धर्म का भेदभाव किए बगैर, रात हो या दिन सभी को रेड क्लब के माध्यम से खून उपलब्ध कराने वाले, और स्वयं भी साल भर में चार से पांच बार रक्तदान करने वाले रेड क्लब के सह संस्थापक अभिषेक सिंह और इस कार्य में बराबर से उनका सहयोग करने वाली उनकी पत्नी स्मृति सिंह मानवता की मिसाल बन गए हैं। अगर इन्हें रक्त पुरुष कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।

संजय निगम अकेला (सामाजिक एकता) सामाजिक सरोकारों से जुड़े संगठनों द्वारा किए जा रहे रचनात्मक कार्यों में बढ़-चढ़कर सहयोग करने वाले, सभी के सुख दुख में हमेशा साथ खड़े रहने वाले, सोशल मीडिया के माध्यम से पूरे समाज को एक सूत्र में  पिरोने का प्रयास करने वाले ‘सेल्फी किंग’ के नाम से मशहूर संजय निगम अकेला समाजसेवी होने के साथ कवि भी हैं और पर्यावरण प्रेमी भी। पूरे वर्ष पेड़ लगाने में भी यह आगे रहते हैं।

आशुतोष त्रिपाठी (शिक्षक) आज के युग में यानी कलियुग में अगर आप द्वापर और त्रेता वाला गुरुकुल देखना चाहते हैं तो बांदा के कनवारा गांव में कन्या पाठशाला चले जाइये। एक गुरु का क्या कर्तव्य होना चाहिए यह बताया है वहां के शिक्षकों ने। और उन्हें प्रेरणा दी इस स्कूल के प्रधानाचार्य आशुतोष त्रिपाठी ने। तन मन धन से बगैर सरकारी मदद की आशा के इस स्कूल में अब लगभग 99 परसेंट उपस्थिति रहती है। बच्चों के सर्वांगीण विकास का यहां पूरा ध्यान रखा जाता है। वाकई यह एक अनुपम उदाहरण है देश के अन्य स्कूलों के लिए। शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष आशुतोष त्रिपाठी की प्रेरणा से जनपद के कई स्कूल आज गुरुकुल बनने की राह में कदम बढ़ा चुके हैं।

विनोद यादव एवं राममिलन गुप्ता (बाँदा प्रीमियर लीग) क्रिकेट के शौकीन तो बहुत मिलेंगे पर उसे व्यवस्थित रूप से आयोजित करने का काम विनोद यादव एवं राममिलन गुप्ता ने किया है। बांदा प्रीमीयर लीग यानी बीपीएल खेल के मामले में बांदा का पहला बड़ा आयोजन बना जिससे यहां की क्रिकेट खिलाड़ियों को एक नई पहचान मिली और उन्हें अपना कैरियर बनाने की राह भी मिली। बचपन प्ले स्कूल के संचालक विनोद यादव साॅफ्टवेयर डेवलपर राममिलन गुप्ता की मेहनत और लगन का ही परिणाम है कि बांदा में क्रिकेट के प्रति लोगों की दीवानगी बढ़ने लगी है। इनके प्रयासों को देखकर लगता है कि जल्द ही बांदा से विश्व स्तर के बड़े खिलाड़ी निकलेंगे।

प्रकाश साहू (योग) सर्दी हो या बरसात, योग गुरू प्रकाश साहू की योग कक्षा कभी बन्द नहीं होती। पिछले 10-12 सालों से उनकी दिनचर्या सुबह 4 बजे से शुरू हो जाती है जब वे अवस्थी पार्क में अपने शिष्यों को योग कराने की तैयारियां करने में लगते हैं। उनके शिष्य तो सुबह 5 बजे से आना शुरू करते हैं पर प्रकाश साहू 4 बजे से चबूतरे की साफ-सफाई दरी बिछाना और उस पूरे क्षेत्र को पर्दे लगाकर कवर करना, ताकि महिलाओं को योग करने में कोई असुविधा ना हो। यह सारे काम प्रकाश साहू अनवरत करते चले आ रहे हैं। निस्वार्थ और निशुल्क सेवा का व्रत लिए प्रकाश साहू वाकई एक मिसाल है।

इनके अलावा रोटी बैंक के लिए सादी जमां व रिजवान अली को तथा विकलांग खेल-कूद में कुलदीप को भी सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान संस्था के संस्थापक आशीष गौतम, महेन्द्र देवपुरिया, राजू शुक्ला, जिला संयोजक दिनेश दीक्षित, विधायक प्रकाश द्विवेदी, दीनदयाल शोध संस्थान के सचिव अभय महाजन, जे.एन. काॅलेज के प्राचार्य नंदलाल शुक्ला, बुन्देलखण्ड कनेक्ट से सचिन चतुर्वेदी, श्याम जी निगम, अरूण निगम, सन्दीप रिछारिया, साहित्यकार चन्द्रिका प्रसाद दीक्षित ललित, मनोज जैन, राजकुमार राज, रामेन्द्र शर्मा, ममता पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।

(कार्यक्रम के संयोजक दिनेश कुमार दीक्षित में कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी का आभार व्यक्त किया।)

 

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