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यमुना ने मचाया ताण्डव, बांदा-कानपुर मार्ग ठप्प

बांदा,

चिल्ला और कमासिन के कई गांव चपेट में

प्रशासन द्वारा समय से बाढ़ से निपटने की व्यवस्था ना बनाए जाने से यमुना ने रौद्र रूप धारण करके बांदा में तबाही मचाना शुरू कर दिया है। दर्जनों गांवों को चपेट में लेने के बाद बाढ़ के कारण बांदा कानपुर मार्ग पर घुटनों तक पानी भर जाने से वाहनों का आवागमन बंद कर दिया गया है। अगर पानी निरंतर बढ़ता रहा तो चिल्ला थाने में भी पानी घुस सकता है।

फिलहाल नदी का जलस्तर रात तक खतरे के निशान से 2 मीटर ऊपर हो सकता है। उधर यमुना ने जिले के कमासिन क्षेत्र में भी तांडव मचाना शुरू कर दिया हैै। प्रशासन के नाकारापन और लापरवाही के चलते बाढ़ से जो तबाही कि आशंका थी वह सामने आ ही गई। इस बात की पहले आशंका थी कि केन और यमुना जब अपना बाढ़ का तांडव दिखायेगी तो राहत के माध्यम से स्थिति संभालना मुश्किल हो जायेगा। लेकिन जिला प्रशासन चेतावनी के प्रति उदासीन रहा और जिला अंततः भीषण बाढ़ कि चपेट में कराह उठा। यूपी-एमपी के कई इलाकों में हो रही जबरदस्त बारिश से यमुना और केन नदियों में और उफान आ ही गया।

अब हालत यह है। कि चिल्ला घाट पर यमुना नदी खतरे के निशान से डेढ़ मीटर से भी यानी 101.60 मीटर ऊपर बह रही है। बांदा में केन का पैमाना बढ़कर 101.70 मीटर हो गया है। यमुना की बाढ़ से पैलानी, जसपुरा, चिल्ला और बबेरू इलाकों में दर्जनों गांवों का रास्ता बंद हो गया है, यहां बिजली आपूर्ति भी बाधित हो गई है। जनपद की सीमा पर स्थित ललौली के पास बांदा-बहराइच स्टेट हाईवे में यमुना का पानी भर जाने से इस मार्ग से कानपुर, लखनऊ का आवागमन ठप हो चुका है।  प्रशासन की हालत आग लगने पर कुँआ खोदने जैसी दिखाई दे रही है।

ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर भेजने के लिए नावों की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। पैलानी तहसील के नादादेव गांव में राहत न पहुंचने से हाहाकार है। यह गांव टापू बन गया है। यहां के सबादा, महबरा, गलौली, नरी, सिन्धन कला, अदरी, वसधरी, पीपरोदर, पडोहरा आदि गावों की भी बाढ़ की चपेट में नाजुक स्थिति लगातर बनी हुई है। गावों में पानी घुस गया है। रास्ते बंद हो गये है। मध्य प्रदेश की बारिश से गंगऊ और बरियारपुर बांधों से पानी के डिस्चार्ज में फिर आज वृद्धि हो गई है। केन्द्रीय जल आयोग के बाढ़ बुलेटिन में बताया गया है कि दोनों नदियों का जलस्तर फिलहाल बढ़ता रहेगा। चिल्ला क्षेत्र में भी यमुना का कहर बढ़ता जा रहा है। खजुरी गांव का भी सड़क संपर्क टूट गया है।

इन इलाकों में पांच दिनों से बिजली आपूर्ति बंद है। गांवों के स्कूल भी बंद हैं। हजारों बीघा खेत डूब जाने से उनमें बोई फसल चैपट हो गई है। चिल्ला और ललौली के बीच मुख्य सड़क (बांदा-बहराइच स्टेट हाईवे) में यमुना का पानी आ जाने से बांदा-कानपुर सड़क मार्ग बंद हो गया है। मध्य प्रदेश की बारिश ने 24 घंटों के दौरान गंगऊ और बरियारपुर बांधों से केन नदी में डिस्चार्ज हो रहे पानी की मात्रा बढ़ा दी है। बबेरू कमासिन इलाका भी बाढ़ कि विभीषिका झेल रहा है। यमुना और बागै नदी की बाढ़ से दर्जनभर गांवों को सड़क संपर्क टूट गया है। पानी से घिरे गांवों के ग्रामीणों को नावों से सुरक्षित स्थानों पर भेजने कि अब भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। बाढ़ प्रभावित गांव दांदौ, खेरा, औदहा, अछरील, नरायनपुर, जोरावरपुर, लखनपुर, जगऊटोला, इटर्रा आदि इसी समस्या से जूझ रहे है। बाढ़ से इन गांवों में लगभग दो हजार हेक्टेयर की फसल को नुकसान पहुंचा है। राहत शिविर में पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं।

इस बीच बीती रात पुलिस अधीक्षक ने चिल्ला क्षेत्र के बाढ़ ग्रस्त इलाकों का दौरा किया और थानाध्यक्ष को इस क्षेत्र में पैनी नजर रखने को कहा है उन्होंने स्वीकार किया कि बाढ़ ने तबाही मचाना शुरू कर दिया है अब थाने में भी बाढ़ का पानी आने की नौबत आ गई है। 2013 में चिल्ला थाना बाढ़ की चपेट में आ गया था। इस बीच बाढ़ पूर्वानुमान केंद्रीय जल आयोग ने जल स्तर बढ़ने की संभावना व्यक्त की है।

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