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प्रदेश की जेलों में क्षमता से अधिक कैदी: डीजी जेल 

@अनिल सिंह आवारा, बांदा

पुरानी जेल होने के बाद भी बांदा में वाच टावर नहीं

उत्तर प्रदेश की सभी जेलों में क्षमता से अधिक बंदी हैं। ऐसे बंदी जो सजायाफ्ता हैं, उन्हें दूसरी जेलों में शिफ्ट किया जाएगा। बांदा की मंडल कारागार में भी क्षमता से अधिक लगभग 200 कैदी हैं, जिन्हें दूसरी जेलों में भेजा जाएगा। यह बात मंगलवार को डीजी जेल उत्तर प्रदेश आनंद कुमार ने मंडल कारागार का निरीक्षण करने के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही।

उन्होंने कहा की बांदा की जेल 1860 में बनी थी जबकि प्रशासनिक भवन 1936 में बना। इससे साबित होता है कि बांदा की जेल ऐतिहासिक जेल है, लेकिन इसकी क्षमता 550 से 600 बंदियों की है। वर्तमान में इसमें 880 कैदी बंद है जो क्षमता से अधिक है। यह समस्या केवल बांदा जेल की नहीं है यह समस्या प्रदेश के अन्य जनपदों की भी है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पुरानी जेल होने के बाद भी बांदा में वाच टावर नहीं है, मुख्य वालों की सुरक्षा के लिए होमगार्ड पेट्रोलिंग करते हैं लेकिन अब मुख्य वालों की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे। 

डीजी जेल आनंद कुमार ने कहा कि जेल में बंद कैदियों को अच्छा इंसान बनाने के लिए आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और योगा जैसे कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं ताकि उनमें चेतना जागे और वह अच्छा इंसान बन सके। उन्होंने यह भी कहा कि जेल में बंद कैदियों को रोजगार परक ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके लिए प्रशिक्षक आएंगे।

उन्होंने एक सवाल के जवाब में यह भी कहा कि मुलाहिजा के नाम पर कैदियों से की जा रही अवैध वसूली मामले की जांच की जाएगी। डीजी ने इससे पहले जेल का विधिवत निरीक्षण किया, जेल में समस्याओं को करीब से देखा तथा जेल में बंद कैदियों से बातचीत भी की। बाद में उन्होंने जेल के प्रशासनिक अधिकरियो व सुरक्षा कर्मियों को निर्देश दिए कि जेल के अंदर कोई भी अधिकारी कर्मचारी मोबाइल फोन लेकर न जाए।

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