< भ्रष्टाचार का रक्तबीज-लो.नि.वि.प्रा.ख. Hindi News - Breaking News, Latest News in Hindi, हिंदी में समाचार, Samachar - Bundelkhand News @ देवेन्द्रनाथ मिश्"/>

भ्रष्टाचार का रक्तबीज-लो.नि.वि.प्रा.ख.

@ देवेन्द्रनाथ मिश्र, बांदा

निन्द्रा अवस्था में जब हम कोई भयावह स्वप्न देखते है तो नींद से जागने के उपरान्त हमारा दुःख दूर हो जाता है परन्तु वही भयावह स्वप्न जब जागती आंखों से देखते है तो मन- आत्मा दोनो आन्दोलित हो जाती है। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी जी ने लालकिले के प्राचीर से अपने उद्बोधन में जब कहा था कि ‘‘ मैं प्रधानमंत्री नहीं प्रधान सेवक हूँ, न खाऊंगा न खाने दूंगा’’। आम जनमानस में आश की एक लौ दीप्तमान हुई। त्रस्त पस्त जनता के जीवन में अलौकिकता का संरचरण हुआ था।

शायद अब हमारा देश, हमारा जीवन भ्रष्टाचार से मुक्त होकर ‘रामराज्य’ की कल्पना से यथार्थता की ओर बढ़ेगा। आशाओं की इसी श्रृखंला से आबद्ध आम जन ने अपने मत-पुण्यों को पुनः विजय श्री की माला में पिरोकर मोदी जी को पहनाया था परन्तु दुर्भाग्य! टाम जन अब भी भ्रष्टाचार के दानवी जकड़ से छूट नहीं पाया बल्कि रक्तबीज की तरह उसका आसंख्य अंकुरण अनवरत हो रहा है। रक्त पिपासु यह रक्तबीज दानव जब दिहाड़ी में 200 रू0 कमाने वाले से भी अपनी एक लाख माह की आय से अमप्त, छद्म शब्दों से गुमराह कर घूस मांगता है, ऐसा कृत्य जगती आंखो काा भयावह मंजर होता है।

लोक निर्माण विभाग प्रान्तीय खण्ड बांदा के रक्तबीज वंशज अपने कुकृत्यों से आम जन जीवन से रक्तपान करने में मस्त है। इस विभाग के अधिशाषी अभियन्ता सुमन्त कुमार द्वारा किया गया। सिर्फ एक भ्रष्टाचार का साक्ष्यों के साथ उल्लेख करूंगा। जन मानव के सुधी जन रक्त बीज की तरह कपोलित हो रहे भ्रष्टाचार का अनुमान लगा लेंगे। भ्रष्टाचार से निरीह आम जनों के जीवन में क्या-क्या त्रासदी आई होगी, मृत्यु तुल्य संकटों का सामना करना पड़ा होगा। किसने कितनी पीड़ा भोगी होगी, स्वजनों को खोया होगा, भोगने वाले ही जानते होंगे।

प्रान्तीय खण्ड लोक निर्माण विभाग बांदा द्वारा वर्ष 2017-18 में बबेरू ओरन मुख्य मार्ग से नहर पटरी मार्ग अमलोहरा तक के ग्राम्य सम्पर्क मार्ग में विशेष मरम्मत के कार्य हेतु शासन ने साठ लाख रूपये आवंटित किये थे ताकि ग्रामवासियों को संचार की बेहतर सुविधा दी जा सके परन्तु उक्त मार्ग तक एक पैसे का कार्य न करवा आवांटित धन कूटरचित बिलों-बाउचरों का प्रयोग प्रान्तीय खण्ड पी.डब्ल्यू.डी. कर विभाग हड़प् लिया गया है।

प्रकाशित निविदा में खुला भ्रष्टाचार का खेल

लोक निर्माण विभाग प्रान्तीय खण्ड बांदा ने दिनांक - 05 मई 2017 को धन आवंटन की प्रत्याशा में 9 प्रकार के कार्यो की निविदा का प्रकाशन करवा कर दिनांक - 10.05.2017 को निविदा ई. टेण्डर के माध्यम से मांगी गई थी, जिन्हें 11 जून 2017 को 12.30 अपरान्ह में खोला गया जिसमें 5वें क्रम संख्या ओरन बबेरू मार्ग से नहर पटरी से अमलोहरा तक का नवीनीकरण का कार्य में0 सुरेशचन्द्र गुप्ता, गणेश बाजार झांसी को प्रतिस्पर्धी दरों पर प्राप्त हुआ था। तत्कालीन समय में विभाग में वर्तमान अधिशाषी अभियन्ता आर.सी. पटेरिया का स्थानान्तरण होने के कारण इंजीनियर लाल जी वर्मा को अस्थाई चार्ज मिला तो में0 सुरेश गुप्ता को टेक्निकल बिड को स्वीकृत करवाने के नाम पर परेशान किया जाने लगा और अधीक्षण अभियन्ता से टेक्निकल बिड पास करवाने के लिए सुविधा शुल्क के रूप में 2.50 लाख रू0 नगद लिये गये। यह धनराशि अधीक्षण अभियन्ता के नाम पर में0 सुरेश गुप्ता ने अपने स्थानीय प्रतिनिधि प्रहलाद सिंह द्वारा नगद दिलवाई गई थी। प्रहलाद सिंह बताते है कि अनुबंध गठित करने के नाम पर एक बार 76 हजार रूपये व एक बार 50 हजार रूपये अधिकारियों के दबाव पर सुविधा शुल्क के नाम पर देना पड़ा था। सुविधा शुल्क के नाम पर कुल धनराशि 3.76 लाख देने के उपरान्त भी फर्म का अनुबंध गठित नहीं किया गया तथा यह कह कर अनुबंध गठन से इंकार कर दिया गया कि उपरोक्त नहर पटरी मार्ग पी.एम.जी.एस.वाई. विभाग के पास स्थानान्तरित हो गया है। इसलिए प्रान्तीय खण्ड लोक निर्माण विभाग इसका कार्य नहीं करवा सकेगा एवं न ही अनुबंध गठित किया जायेगा।

प्रान्तीय खण्ड लोक निर्माण विभाग के कथन की सच्चाई

बुन्देलखण्ड न्यूज द्वारा जब निविदादाता को गुमराह कर की गयी कूटरचित ठगी की पड़ताल की गई तो भ्रष्टाचार के खुला खेल को परत दर परत पर्दाफास होने लगा। वर्तमान अधिशाषी अभियन्ता समुन्त कुमार की पूर्ण संलिप्तता भी हमारे सामने आने लगी। हमारे तर्क प्रश्नों के अनुसार ही कि यदि शासन द्वारा 60 लाख रूपया उक्त मार्ग के नवीनीकरण हेतु प्रान्तीय खण्ड लोक निर्माण विभाग को आवंटित किया जा चुका था तो उसी कार्य की धनराशि पी.एम.जी.एस.वाई. विभाग को कैसे दिया जा सकता है परन्तु हमारे द्वारा पी.एम.एस.जी.वाई. विभाग में जाकर पता किया गया तो उन्होंने बताया कि नवीनीकरण का प्रस्ताव पी.एम.एस.जी.वाई. विभाग द्वारा भेजा गया था परन्तु आवंटन न मिलने के कारण यह कार्य विभाग द्वारा कैसे करवा जाता। तर्कानुसार लोक निर्माण विभाग द्वारा अनुबन्ध न किया जाना संदेहास्पद हो जाता है। निःसन्देह प्रान्तीय खण्ड लोक निर्माण विभाग द्वारा भ्रष्टाचार करके धन का बंदरबांट किया गया है।

भ्रष्टाचार का दंस भोगते ग्रामवासी

 ‘‘हजारो रंग है जहां में, फिर भी हम बेरंग ही रहे’’ जहां देश अपनी ऊँची उठान में चांद मिशन पर है वहीं अमलोहरा वासियों को जिला मुख्यालय तक पहुंचना अमेरिका की यात्रा से कमतर नहीं बृद्ध, अपंग व बीमारों का उस नहर पटर मार्ग से ओरन बबेरू मार्ग तक आपात स्थिति में पहुंचना बिल्कुल असम्भव होता है। 17-18 व 18-19 पानी दो सत्रों के बीज जाने के उपरान्त भी अमलोहरा निवासियों को मिली भ्रष्टाचार के दंस की पीड़ा यथावत है और प्रान्तीय खण्ड लोक निर्माण विभाग के अभियन्ता सुमन्त कुमार द्वारा उपरोक्त आवंटन का हेड परिवर्तन करके वित्तीय घालमेल किया गया है।

कारित भ्रष्टाचार की जांच भी ठंडे बस्ते में

पीड़ित व्यथित पक्ष द्वारा विभिन्न फोरमों में भ्रष्टाचारियों के विरूद्ध आवाज उठाई गई थी। कार्यदाई फर्म के कर्मचारी प्रहलाद सिंह द्वारा अपना दिया नगर पैसा तो मांगा ही जाता रहा, परन्तु आवंटित धन का भी ब्योरा जनसूचना के माध्यम से मांगा गया था, परन्तु जनसूचना इन भ्रष्टतंत्र से प्राप्त करना अत्यन्त ही दुर्लभ है। हार कर फर्म कर्मचारी प्रहलाद सिंह द्वारा पत्र लिखकर मुख्य अभियन्ता को हुए भ्रष्टाचार से अवगत करवाया तो मुख्य अभियन्ता द्वारा उक्त प्रकरण की जांच हेतु विभाग को पंजीकृत डाक से विभागीय जांच हेतु लिखा गया था। परन्तु इस विभाग के हमाम में सब नंगे है। अतेव जांच अधिकारी उसे ही बनाया गया जो इसी आवांटित धन के बंदर बांट में शामिल था। यानि कि चोर को ही की गयी चोरी जांच दी गई तो परिणाम स्पष्ट है, जांच सालों से ठंडे बस्ते में  चली गई है। आम जनों की कठिनाई ज्यो कि त्यों है। स्थानीय प्रशासन भी मौन है। मीडिया भी अपना कार्य शायद निष्ठा पूर्वक कर रहा है, यहां भी एक मौन प्रश्न है? ग्राम प्रधान अमलोहरा कहते है ‘‘ मैने सक्षम अधिकारियों से लेकर स्थानीय समाचार पत्रों के संवाददाताओं तक सब से गुहार लगाई परन्तु किसी ने भ्रष्टाचार के इस मसले पर हमें अपनी आवाज नहीं दे पाये। अब शायद भ्रष्टाचार का नया युग है, सब के सब तरबतर हो गये है या फिर आज मीडिया हतास है’’।

सेलेक्सन ब्राण्डों का गठन - डंके की चोट पर भ्रष्टाचार

सरकार के कार्यकाल में होने वाले समस्त विकास कार्य आज अपने अहम पड़ाव पर पहुंच चुके है। जनता अशीम आर्थिक परेशानी को ओढ़कर अपना जीवन यापन कर रही है। यानि कि इन भ्रष्टाचारियों ने आम जीवन को अति दुरूहवना रखा है। योगी सरकार के द्वारा किये गये सुधारों के उपरान्त भी ऐसे अधिकारी किसी दशा में अपने आप को बदलने को तैयार नहीं है। नहर पटरी अमलोहरा मार्ग के 60 लाख रूपये बिना ब्राण्ड गठित हुए धन डाईवर्जन करके सेलेक्सन ब्राण्ड बना कर खर्च करना घोटाले की श्रेणी है। नियमानुसार बगैर ब्राण्ड गठन के स्वीकृत धनराशि किसी भी दशा पर खर्च नहीं हो सकती है।

जनसूचनाओं में भी गोलमाल

लोक निर्माण विभाग प्रान्तीय खण्ड द्वारा मांगी जाने वाली जन सूचनाओं पर कभी भी वास्तविक सूचना न देना, समय से सूचना न देना आदि-आदि गोलमाल इस लिये किया जाता है कि सी0वी0 नं0 आदि का खुलासा न होने पाये ताकि इनका भ्रष्टाचार सार्वजनिक हो जायेगा। ऐसा नहीं है कि हमारे पास किये गये भ्रष्टाचार के साक्ष्य नहीं है। अपने पास उपलब्ध साक्ष्यों की संघन परीक्षण कर हमें जनता के सामने बिल्कुल सच ही लाना चाहते है। यानी सच लाना हमारी प्रतिबध्यता है। किये गये भ्रष्टाचार पर जन मन टटोलने पर अमलोहरा निवासी मुन्ना पं0 एवं मरौली निवासी कुलदीप शर्मा कहते है कि ऐसे भ्रष्टाचार की जांच टी.ए.सी. की बजाय पी.ए.सी. से किया जाना चाहिए।
 

अन्य खबर

चर्चित खबरें

Your Page has been visited    Times