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कारगिल युद्ध के शहीदों को शत - शत नमन

'शहीदों के खून से ये आबाद हुआ है, बड़ी मुश्किल से अपना देश आजाद हुआ है' सौ फीसदी सच है कि देश की सीमा पर दुश्मनों से लड़ते-लड़ते अपने प्राणों की आहुति देने वाले ही इस देश के सच्चे लाल हैं। यूं तो देश की आजादी के खातिर कई युद्ध हुए उनमें से एक कारगिल विजय दिवस स्वतंत्र भारत के लिए एक महत्वपूर्ण दिवस है।

कारगिल युद्ध को दो दशक पूरे हो चुके हैं। इस युद्ध में भारत ने अपने 527 जवानों को खो दिया था जबकि 1363 जवान घायल हुए थे। चार भारतीय जवानों को इस युद्ध में अदम्य साहस के लिए सेना का सर्वोच्च पदक परमवीर चक्र प्रदान किया गया था। इनमें से दो को मरणोपरांत यह पदक दिया गया था जबकि दो हमारे बीच आज भी मौजूद हैं।

 

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ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव इस पदक को पाने वाले सबसे कम उम्र के जवान हैं। भारतीय जवानों ने इस युद्ध में अपने खून का आखिरी कतरा देश की रक्षा के लिए न्यौछावर कर दिया था। इन जांबाजों की कहानियां आज भी रोंगटे खड़े कर देती हैं।

इस युद्ध में भारतीय सेना के कई रणबांकुरों ने अपने प्राणों की आहुति देकर अपने देश का मान बनाए रखा और दुश्मन को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। देश उन शहीदों को नमन कर रहा है जिन्होंने अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया। अदम्य साहस के बल पर पाकिस्तानी घुसपैठियों के छक्के छुड़ा दिए।

बुंदेलखण्ड न्यूज़ की टीम भारतीय सैनिकों के शौर्य को और इनके साहस को सलाम करती है। 20 वर्ष पूर्व कारगिल में देश के वीर सपूतों ने अपने प्राणों की आहुती दी और हमारी आजादी को बचाए रखा । हमारी स्वतंत्रता की रक्षा करने वाले वीर योद्धा को उनके  सर्वोच्च बलिदान हेतु कोटिश : नमन ।। 

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