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बांदा डीएम ने फेरा बीएसए के अरमानों पर पानी ?

परिषदीय अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों के लिए जब अध्यापक चयन प्रक्रिया हुई थी, जिसमें तमाम परीक्षार्थियों द्वारा गलत तरीके से चयन करने का आरोप लगाया गया। और अन्तोगत्वा इस परीक्षा को आज डीएम बाँदा हीरा लाल द्वारा निरस्त कर दिया गया है। आपको बता दें कि चयन की इसी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए बुन्देलखण्ड न्यूज ने गत 8 जुलाई को ही एक खबर डाली थी, जिस पर आज जिलाधिकारी ने एक्शन ले लिया। इस बावत बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश जारी कर बताया गया कि इस वर्ष 2019-20 में चयनित अंग्रेजी माध्यम से प्रा.वि./उ.प्र.वि. संचलित किए जाने हेतु प्र.अ./स.अ. के चयन प्रक्रिया के अंतर्गत विद्यालय आवंटन काउंसलिंग के उपरांत अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में अध्यापकों की पदस्थापना आदेश को जिलाधिकारी बांदा के निर्देश के अनुपालन में अपरिहार्य कारणों से तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है।

गौरतलब है कि गत 25 जून को अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में अध्यापकों के चयन के लिए लिखित परीक्षा हुई थी। इसके बाद 2 जुलाई को साक्षात्कार हुआ व सफल अभ्यर्थियों की काउंसलिंग 7 जुलाई को हुई। पर इसी चयन प्रक्रिया में तमाम आरोप बेसिक शिक्षा अधिकारी पर मढ़ दिये गये। नाम न छापने की शर्त पर दूर-दराज के ब्लॉकों में तैनात कुछ अध्यापकों ने पूर्व में जारी शासनादेश व वर्तमान में प्रतापगढ़ में चल रही काउंसलिंग का हवाला देते हुए बताया कि बेसिक शिक्षा अधिकारी ने नियमों का पालन नहीं किया और पूरी प्रक्रिया ही गलत थी। इस बात को बुन्देलखण्ड न्यूज ने भी प्रमुखता के साथ 8 जुलाई को प्रकाशित किया था।  http://bundelkhandnews.com/news_detail.php?id=31596

शिकायतकर्ताओं ने बताया कि लिखित परीक्षा में प्राप्त नंबरों को जानबूझकर गोपनीय रखा गया ताकि अपने खास लोगों को साक्षात्कार में ज्यादा नंबर देकर मेरिट में ऊपर किया जा सके। जबकि लिखित परीक्षा के बाद प्राप्त अंकों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए था एवं फिर साक्षात्कार में प्राप्त अंकों को भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए। जबकि लिखित व साक्षात्कार प्राप्त अंकों को एक साथ जोड़कर मेरिट ओपेन की गई। इस तरह की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार व लेनदेन की आशंका बनी रहती है। आरोप यह भी है कि नियम विरूद्ध कार्य किया गया। यदि कोई विद्यालय अंग्रेजी माध्यम का घोषित किया जाता है और उसमें कार्यरत कोई अध्यापक इसके लिए परीक्षा देता है और सफल होता है तो उसे उसी विद्यालय में ही तैनाती दी जाए। फिर उसके बाद महिलाओं को प्रथम वरीयता देते हुए काउंसलिंग कराई जाए और फिर पुरुष अध्यापकों को विद्यालय दिए जाएं। पर चयन प्रक्रिया में इन सबका कोई ध्यान नहीं रखा गया।

सूत्रों से यह भी पता चला है कि लगातार मिल रही शिकायतों व मीडिया रिपोर्ट्स का जिलाधिकारी ने गम्भीरता से संज्ञान लिया और इसी का परिणाम था कि आज परीक्षा और साक्षात्कार सहित पूरी चयन प्रक्रिया को ही निरस्त कर दिया गया। जिलाधिकारी के इस निर्णय का अध्यापकों ने स्वागत किया है।
 

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