< बारिश से बाढ़ का खतरा चपेत में आ सकते है पाँच करोड़ लोग Hindi News - Breaking News, Latest News in Hindi, हिंदी में समाचार, Samachar - Bundelkhand News बाढ़ के खतरे की जद में पांच करोड़ लोग : पिछले"/>

बारिश से बाढ़ का खतरा चपेत में आ सकते है पाँच करोड़ लोग

बाढ़ के खतरे की जद में पांच करोड़ लोग : पिछले साल आई विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया था कि दुनिया भर में बाढ़ से होने वाली कुल मौतों में से 20 फीसद अकेले भारत में होती हैं। रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई थी कि आने वाले 10 वर्षो में कोलकाता, मुंबई, ढाका और कराची जैसे दक्षिण एशियाई शहरों में लगभग पांच करोड़ लोगों को बाढ़ से नुकसान के जोखिम का सामना करना पड़ेगा।

राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रि या केंद्र (एनईआरसी) के मुताबिक, पिछल्ले साल केरल में आई भयानक बाढ़ में 488 से ज्यादा लोग मारे गए थे। इस बाढ़ में राज्य के 14 जिलों में करीब 54.11 लाख लोग प्रभावित हुए थे। पूरे देश में पिछल्ले साल बाढ़ और बारिश से होने वाले हादसों में 1000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। ये आंकड़े विश्व बैंक की चेतावनी की तस्दीक करने के लिए काफी हैं।

 

 

64 वर्षों में एक लाख से ज्यादा लोगों की मौत केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट कहती है कि भारत में पिछले 64 वर्षो में एक लाख 7 हजार 487 लोगों की मौत बाढ़ या उससे हुए हादसों में हुई। यही नहीं साल 1953 से 2017 के बीच बाढ़ से देश को तीन लाख 65 हजार करोड़ रु पये का नुकसान हुआ जो जीडीपी का तीन फीसद है।

विश्व बैंक के अध्ययन में कहा गया है कि 2050 तक छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश प्राकृतिक आपदा से सबसे अधिक प्रभावित राज्य होंगे। यही नहीं 10 में से सात सबसे प्रभावित जिले महाराष्ट्र के विदर्भ से होंगे। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक, भारत बाढ़ से दुनिया का सबसे असुरक्षित मुल्क है। चिंताजनक बात यह है कि तमाम अध्ययनों और आंकड़ों के बावजूद आजादी के इतने वर्षो बाद भी इससे निपटने के इंतजाम नहीं किए जा सके हैं।

हर साल 1,600 मौतें फिर भी ठोस उपाय नहीं : देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र 32.9 करोड़ हेक्टेयर (एमएचए) में से 40 करोड़ हेक्टेयर से अधिक बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है। बाढ़ प्रभावित राज्यों में पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, केरल, असम, बिहार, गुजरात, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब शामिल हैं।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के आंकड़े बताते हैं कि हर साल 1,600 से ज्यादा लोगों की मौत बाढ़ के कारण होती है, जबकि 3.2 करोड़ लोग प्रभावित होते हैं। यही नहीं हर साल इन हादसों में 92 हजार पशु अपनी जान गंवा देते हैं और तकरीबन 70 लाख हेक्टेयर जमीन प्रभावित होती है। साथ ही 5,600 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान होता है। इन सबके बावजूद सरकारों के स्तर पर कोई ठोस इंतजाम नहीं किए जा सके हैं।

 

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जल प्रबंधन पर उदासीनता पड़ रही भारी : केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के कुल क्षेत्रफल (33 लाख वर्ग किलोमीटर) का आधा हिस्सा ऐसा है, जहां साल में केवल 15 दिन बारिश होती है। हालांकि इसके उलट देश का करीब 66 फीसद हिस्सा बाढ़ से प्रभावित होता है। यही नहीं देश के 12 फीसद इलाके तो अतिसंवेदनशील हैं।

साल 1950 में देश की लगभग ढाई करोड़ हेक्टेयर भूमि बाढ़ की चपेट में आती थी लेकिन अब लगभग सात करोड़ हेक्टेयर पर बाढ़ आती है। हमारे देश में केवल चार महीनों के भीतर ही लगभग 80 फीसद बारिश होती है। बारिश के पानी का वितरण प्राकृतिक तौर पर इतना असमान है कि कुछ इलाके बाढ़ जबकि बाकी इलाके सूखा ङोलने को अभिशप्त हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि देश में जल संरक्षण, जल वितरण और जल निकासी निकासी का आज तक कोई समुचित तरीका नहीं निकाला जा सका है।

 

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