< इंग्लैंड के खिलाफ हार में छिपा बड़ी जीत का मंत्र Hindi News - Breaking News, Latest News in Hindi, हिंदी में समाचार, Samachar - Bundelkhand News बर्मिघम  में भारत को इंग्लैंड के हाथों इस विश्व कप में पहली ह"/>

इंग्लैंड के खिलाफ हार में छिपा बड़ी जीत का मंत्र

बर्मिघम  में भारत को इंग्लैंड के हाथों इस विश्व कप में पहली हार का सामना करना पड़ा। मैं इसे एक दिन विशेष का खराब प्रदर्शन ही कहूंगा। मुझे अभी भी विश्वास है कि 14 जुलाई को लॉर्ड्स के मैदान पर विश्व कप ट्रॉफी उठाने की संभावनाओं के लिहाज से हम अभी भी सबसे बेहतर स्थिति में हैं। हालांकि, जैसा कि हर एक नाकामी के साथ होता है, वैसे ही इस हार में भी कुछ चेतावनियां छिपी हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

 

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बल्लेबाजी में मध्य क्रम और निचले क्रम की कमजोरी विश्व कप के पहले से ही भारत की एक बड़ी चिंता बनी हुई है। दुर्भाग्यवश यह पहेली टूर्नामेंट के बीचोंबीच भी लगातार उलझी हुई है। शिखर धवन की चोट ने मुश्किलें बढ़ाकर इस कमजोरी को और उजागर कर दिया। राहुल उनकी जगह भर पाने में सक्षम नहीं हुए हैं और यह महसूस करने में हमने कुछ ज्यादा ही समय ले लिया कि विजय शंकर बल्लेबाजी क्रम में चौथे नंबर के लिए शायद सबसे उपयुक्त दावेदार नहीं हैं।

अब आगे की राह क्या हो? अगर केदार जाधव अपनी भूमिका के साथ न्याय नहीं कर पाते तो उनके स्थान पर संभवत: दिनेश कार्तिक को अवसर दिया जाए। उम्मीद करें कि कप्तान और उप कप्तान की फॉर्म उन्हें दगा नहीं देगी, लेकिन किसी भी सूरत में अन्य बल्लेबाजों को मौके के मुताबिक खुद को साबित करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

 

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ऐसी स्थिति में वनडे क्रिकेट में विश्व के दो शीर्ष बल्लेबाजों विराट कोहली और रोहित शर्मा पर निर्भरता कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है। रविवार को इंग्लैंड के खिलाफ भी दोनों ने उम्दा बल्लेबाजी की, लेकिन फिर भी हम हार गए। पांच अर्धशतक के साथ कप्तान कोहली और तीन शतक के साथ उनके नायब रोहित बेहतरीन दौर में हैं, लेकिन अगर कहीं औसत का निर्मम कानून उन पर लागू हो गया और ईश्वर न करे कि टूर्नामेंट में अहम मौकों पर अगर वे विफल हो गए, तब क्या हमारे पास उनकी भरपाई के लिए पर्याप्त विकल्प हैं?

रिषभ पंत, जिन्हें शुरुआत से ही इस टीम का हिस्सा होना चाहिए था, उनमें और हार्दिक पांड्या में करिश्माई काबिलियत तो है, मगर इंग्लैंड के खिलाफ जिस मुश्किल लक्ष्य का पीछा करने का अवसर था, उसमें आपको ऐसे इक्का-दुक्का चमकदार प्रदर्शनों से अधिक की दरकार होती है।

हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि क्रिकेट एक टीम गेम है और इसमें व्यक्तिगत उत्कृष्टता पर अत्यधिक निर्भरता भारी पड़ सकती है। हालांकि इस हार के बावजूद मेरा मानना है कि हमारी टीम काफी संतुलित है। जब हमारे पास विराट और रोहित के रूप में वनडे क्रिकेट के दो शीर्ष बल्लेबाज हैं, बुमराह के रूप में नंबर एक गेंदबाज है, धौनी का अनुभव और पंत एवं पांड्या के रूप में अद्भुत प्रतिभाएं मौजूद हैं, ऐसी स्थिति में अगर हमने तीसरी बार विश्व कप नहीं जीता तो यह किसी विडंबना से कम नहीं होगा। जो शीर्ष से अगुआई कर रहे हैं वे अपना जादू यूं ही बिखेरते रहें और दूसरे अन्य खिलाड़ी उनको न केवल अपेक्षित सहयोग दें, बल्कि अवसर मिलने पर उनकी कमी पूरी भी करें। इसी आशा और विश्वास के साथ शेष मुकाबलों के लिए भारतीय टीम को अशेष शुभकामनाएं। 

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