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क्या आप भी एक बेटे के माता-पिता हैं, जरूर सिखाएं ये बातें

बच्चों को पलना कोई खेल नहीं होता। एक बच्चे को बड़ा करने और अच्छी शिक्षा देने में हर माता-पिता को काफी मेहनत करनी पड़ती है। लेकिन अगर आप एक बेटे के माता पिता हैं तो चीजें थोड़ी अलग हो जाती हैं।

हालांकि बेटा या बेटी दोनों को पालने के अलग तरीके होते हैं क्योंकि दोनों की हरकतें और सोच अलग होती हैं। हम कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं जो आपको बिल्कुल नहीं करनी चाहिए अगर आप बढ़ती उम्र के बेटे के माता-पिता हैं। 

कभी ना कहें 'मर्द कभी नहीं रोते : अपने बेटे को भूल के भी ये बातें ना सिखाएं कि मर्द बहुत मजबूत होते हैं और कभी रो नहीं सकते या फिर सदियों से चला आ रहा डायलाग 'लड़कियों की तरह मत रो'। इसका छोटे बच्चे पर बेहद बुरा प्रभाव पड़ता है और आगे चलकर हम अच्छे समाज का निर्माण करने में सक्षम नहीं हो पाते। अपने बेटे से कहें की भावनाएं जरूर व्यक्त करनी चाहिए और रोना बिल्कुल स्वाभाविक है।

 मर्द को डर नहीं लगता : अगर आप भी ऐसी सोच रखते हैं तो पहले खुद को बदलें और बच्चे के मन में ये बातें ना डालें। लड़का और लड़की की भावनाएं बांटकर आप गलत कर रहे हैं। डर किसी को भी लग सकता है। 

बेटों को गले ना लगाना : भावनाएं और काम बांटते-बांटते आप अपने मन में ही सोच लेते हैं कि 'बेटा है तो भावात्मक तौर पर मजबूत ही होगा'। हालांकि अनजाने में आप बड़ी गलती कर रहे हैं। आपके बेटे को भी हर मोड़ पर भावात्मक सपोर्ट की जरुरत पड़ सकती हैं। बेटों की उम्र और कद को एक ओर रखते हुए उन्हें अपने करीब रखें। बेटे ग्रोइंग एेज में हों या बड़े हो जाएं माता-पिता होने के नाते उन्हें प्यार भरे 'ह्यूमन टच' के विषय में समझाना आपकी जिम्मेदारी है और अपना प्यार जरूर दिखाएं। 

घर के काम कराएं सबसे जरुरी बात जो हर माता-पिता को गांठ बांध लेनी चाहिए। अपनी बेटियों से ये उम्मीद करना कि वो किचन के सारे काम फटाफट सीख लें और बेटों को किचन के हर काम से दूर रखना आपकी बहुत बड़ी भूल है। खाना पकाने से लेकर बर्तन धुलने जैसे काम बेटों को सिखाना भी उतना ही जरुरी है जितना की बेटियों को। 

गुड और बैड टच के बारे में सिखाएं : ये सत्य है कि आपका बेटा भी 'यौन शोषण' का शिकार हो सकता है इसलिए अपने बेटे को भी 'गुड टच और बैड टच' के बारे में सिखाएं। अपने बच्चे से खुलकर बात करेंगे तभी आपका बच्चा भी अपनी भावनाओं को आपसे खुलकर व्यक्त कर पाएगा।

नो' का मतलब सिखाएं : हमारे समाज में बेटों को ऐसी परवरिश दी जाती है, जिसमें वो खुद को बेटियों से 'सुपीरियर' समझते हैं और उनके दिमाग में ये फितूर विकसित करने वाले माता-पिता ही हैं। अगर थोड़ी फिक्र अपनी बेटियों के लिए बची है तो अपने बेटों को बचपन से 'ना' का मतलब सिखाएं। अक्सर पुरुषों को जवाब में 'ना' सुनने की आदत नहीं होती इसलिए ये बचपन से सिखाना जरुरी है। 

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