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समाज की कड़वी सच्चाई से रूबरू कराती अधूरी दास्तां

ऑनर किलिंग समाज का एक ऐसा डरावना सच है, जिसके आरोपी और गवाह दोनों परिवार के लोग ही होते हैं। झूठी शान के लिए अपने ही बच्चों की जान ले लेते हैं पिछले कुछ सालों में ऑनर किलिंग पर चौतरफा चर्चा के बाद ऐसी घटनाओं में थोड़ी कमी आई है, लेकिन अभी भी आए दिन समाज का वीभत्स चेहरा देखने को मिलता है। मोहित कुमार शर्मा ने अपनी हालिया किताब 'अधूरी दास्तां' में समाज की इसी सच्चाई को बयां किया है 'अधूरी दास्तां' एक प्रेम कहानी है, जिसे विवेक और साक्षी के बीच बुना गया है। एक ही दफ्तर में काम करने वाले विवेक और साक्षी को प्यार हो जाता है। दोनों तमाम ख़्वाब बुनते हैं, लेकिन उनके ख़्वाब को समाज की नजर लग जाती है।और आखिरकार जाति-धर्म के बंधन में जकड़ा समाज झूठी शान के लिए दोनों की जान ले लेता है।  यूं तो 'अधूरी दास्तां' मोहित कुमार शर्मा का पहला उपन्यास है, लेकिन इसके विषय और भाषा से यह पूरी तरह मुकम्मल प्रतीत होता है। कहानी न तो कहीं मुद्दे से भटकती है और न ही पाठकों क बोरियत महसूस होने देती है। शब्दों का ऐसा चित्र खींचा गया है कि कहानी पढ़ते हुए ऐसा महसूस होता है कि उसे खुद जी रहे हैं। इस उपन्यास की एक और खास बात है, जो इसे औरों से अलग बनाता है। वह है इसका इंट्रो, जो एक कविता से शुरू होता है. वह कविता कुछ यूं है ।

उड़ गयी तू उस पंछी जैसी, इंसानों की दुनिया से, 
यहां बंधी थी एक बेड़ी में, वहां उड़ेगी अंबर में।

पंछी बनकर आऊंगा मैं, दोनों मिलकर साथ उड़ेंगे, 
क्या कहेगी दुनिया फिर, ये पंछी कैसे आजाद हुए।

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