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खुले में फेंक जाते है बायोमेडिकल वेस्ट, संक्रमण फैलने का खतरा

शहर के कई अस्पताल बायो वेस्ट खुले में फैंककर बीमारी फैला रहे हैं। शहर के विश्वविद्यालय व दूसरे शिक्षण संस्थान के विद्यार्थियों ने कचरा निस्तारण की प्रक्रिया को देखा तो दंग रह गए। कचरे के बीच में ही बायोमेडिकल वेस्ट डाला गया है। उसे जलाया जा रहा है जो ढंढूर और आसपास के ग्रामीणों को संक्रमित कर रहा है। ग्रामीण इस वेस्ट को निगम अधिकारी को दिखा चुके है। उसके बावजूद वह चुप है तो प्रदूषण नियंत्रण ने भी आंखें बंद की हुई हैं। ये संस्थान शहर में धड़ल्ले से पर्यावरण सुरक्षा के नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।विश्वविद्यालय सहित अन्य शिक्षण संस्थान के विद्यार्थी शहर के कचरे को डंप करने की प्रक्रिया जानने के लिए निकले थे। उनकी तरफ से पहले शहर की सड़कों को देखा तो बाद में वह ढंढूर के डंपिंग स्टेशन पहुंचे। जब वह पहुंचे तो वहां कचरे में आग लगी हुई थी और बदबू फैली थी। निरीक्षण शुरु किया तो खुले में बड़े स्तर पर दवाइयां, सुई, पट्टी, इंजेक्शन व अन्य बायोमेडिकल वेस्ट पड़ा था व जल रहा था।

उन्होंने इस बारे में डंङ्क्षपग स्टेशन के पास कचरा बीनने वालों से भी बातचीत की। वह भी बायोमेडिकल वेस्ट को लेकर कोई ठोस जवाब विद्यार्थियों को नहीं दे पाए।सरकार और प्रशासन जनता की सुरक्षा के प्रति कितनी गंभीर है। इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि अगस्त 2018 में हिसार के सातरोड लाइन के पास खुले में 200 से अधिक मानव अंग मिले थे। मामला चर्चाओं में आने के बाद नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची थी। इसके बाद पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (पीसीबी) ने भी मामले में संज्ञान लिया। सीएमओ को जांच के लिए पत्र भेजने की बात कही थी। आज तक वह जांच नहीं हो पाई।हिसार जिले के बायोमेडिकल वेस्ट के निपटान की जिम्मेदारी एक निजी कंपनी को सौंपी हुई है।

पीसीबी मुख्यालय को जुलाई 2018 में भेजी जानकारी के अनुसार एजेंसी के पास पंजीकृत मेडिकल संस्थान 378 हैं। इसमें अस्पताल, क्लीनिक, नर्सिंग होम से लेकर लैब तक शामिल हैं। जिनसे औसतन प्रतिमाह 52 हजार किलोग्राम मेडिकल वेस्ट निकलता है।एजेंसी इंचार्ज के अनुसार वर्तमान में उनकी एजेंसी के पास कुल 394 मेडिकल संस्थान पंजीकृत है।वेस्ट निस्तारण : फिलहाल सेक्टर 27-28 स्थित एक निजी एजेंसी हिसार जिले के संस्थानों से बायोमेडिकल वेस्ट उठाती और साइंटिफिक तरीके से उसका निस्तारण करती है।दोषी पाए जाने पर 5 साल जेल या 1 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक पर्यावरण संरक्षण एक्ट के अंतर्गत बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट एंड हैंडलिंग रूल 2016 है। इस नियम के तहत बायो मेडिकल कचरा को खुले में नहीं फेंक सकते हैं। यह गैर कानूनी है। ऐसा करने वालों को 5 साल की सजा या फिर एक लाख रुपये तक के जुर्माने या दोनों का प्रावधान है।

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