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बढ रहे किडनी के मरीज, नहीं मिल रही दान में 

जरुरत 700 किडनी की, दान में मिल रही एक फीसदी

राजधानी में किडनी के मरीजों की संख्या लगातार बढती जा रही है। जितनी किडनियों की जरुरत पड रही है उतनी किडनियां दान में नहीं मिल रही है। इससे मरीजों के उपचार में दिक्कते आ रही हैं। डायबिटीज और हाई ब्ल्ड प्रेशर की वजह से किडनी के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। क्रॉनिक किडनी रोग की 80 फीसदी की वजह डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर है।

मरीज बढ़ रहे हैं, पर दान में किडनी नहीं मिल रहीं हैं। भोपाल में निजी और सरकारी मिलाकर करीब 700 मरीज लंबे समय से डायलिसिस पर हैं। उन्हें किडनी की जरूरत है। रिश्तेदारों की किडनी मैच नहीं होने या फिर अन्य वजह से वह जिंदगी मौत से जूझ रहे हैं।

बंसल अस्पताल के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. विद्यानंद त्रिपाठी ने बताया कि शहर में हर साल करीब 50 किडनी ट्रांसप्लांट अलग-अलग अस्पतालों में हो रहे हैं। इनमें 90 फीसदी से ज्यादा लाइव डोनेशन यानी रिश्तेदारों द्वारा दान में मिली किडनी का ट्रांसप्लांट है। बाकी 10 फीसदी या इससे कम ब्रेन डेड मरीज से दान में मिली किडनी होती है। ब्रेन डेड से अंगदान के मामले में तमिलनाडु समेत दक्षिण भारत के राज्य आगे हैं। 

डॉ. विद्यानंद ने बताया कि बच्चों में भी किडनी के बीमारी के मामले बढ़े हैं, पर इसके कारण बड़ों की बीमारी से अलग होते हैं। बच्चों को अपने आप (ऑटो इम्यून) किडनी की बीमारियां होती हैं। डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि ब्लड प्रेशर व डायबिटीज को नियंत्रित रखकर किडनी की बीमारी से बचा जा सकता है।

हमीदिया अस्पताल के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. हिमाशु शर्मा ने कहा कि किडनी की बीमारी के लक्षण काफी देर से पता चलते हैं तब तक बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। हमीदिया में कई ऐसे मरीज भी मिलते हैं जो दूसरी बीमारी के लिए इलाज कराने आते हैं।

किडनी फंक्शन टेस्ट से पता चलता है कि उन्हें किडनी की बीमारी है। डॉ. शर्मा ने बताया कि किडनी के मरीजों में 80 फीसदी डायबिटीज और ब्लड प्रेशर वाले होते हैं। दोनों बीमारियां नियंत्रित नहीं हैं हो तो किडनी की बीमारी होना तय है। उन्होंने बताया कि ऐसे मरीजों को किडनी के इलाज की जगह बीपी व डायबिटीज नियंत्रित रखने की सलाह दी जाती है।

इस बीमारी के लक्षणों में पैरों में व आंख के नीचे सूजन, पेशाब नहीं बनना, भूख कम लगना, उल्टी होना, थकान होना होता है। यह बीमारी हाई बीपी, डायबिटीज, दर्द की दवाएं, पथरी, किडनी में संक्रमण आदि की वजह से होती है।

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