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विश्व कप से पहले टीम इंडिया की कमजोरियां सामने आयीं 

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू एकदिवसीय सीरीज में हार से एक बार फिर विश्व कप से पहले टीम इंडिया की कमजोरियां सामने आयीं है। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड दौरे के बाद माना जा रहा था कि टीम पूरी तरह लय में आ गयी है पर घरेलू सीरीज में भारतीय टीम शुरुआती मैच जीतने के बाद निराशाजनक प्रदर्शन कर हार गयी।

इसके अलावा वह घरेलू हालातों का लाभ भी नहीं उठा पायी। भारत को अगले महीने 23 अप्रैल तक विश्व कप के लिए अपने अंतिम-15 खिलाड़ियों के नाम देने हैं। ऐसे में कोच रवि शास्त्री और कप्तान विराट कोहली की परेशानियां बढ गयी हैं। इस सीरीज में भारत की बल्लेबाजी उम्मीद के अनुरुप नहीं रही है।

सलामी बल्लेबाजों के साथ ही मध्यक्रम के बल्लेबाजों के प्रदर्शन में भी निरंतरता की कमी सामने आयी है। निचले क्रम की बात की जाये तो वहां भी नाकामी ही देखने में आयी है। शिखर धवन ने 16 हार के बाद शतक लगाया वहीं, रोहित शर्मा भी लंबी पारियां नहीं खेल पाये। कप्तान विराट कोहली से हमेशा ही शतक लगाने की उम्मीद नहीं की जा सकती। मध्यक्रम के असफल होने पर 

नंबर-4 और नंबर-5 और उसके बाद के स्थानों के बल्लेबाज रन बटोरने में असफल रहे हैं। अंबाती रायुडू और लोकेश राहुल के अलावा युवा विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत को अवसर मिला पर ये तीनो ही उसपर खरे नहीं उतरे और तकरीबन 20 रनों के अंदर ही आउट हो गये। ऋषभ के रन नहीं बना पाने से पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के बैकअप पर एक बार फिर सवाल उठने लगे।

इतना ही नहीं, नंबर-5 पर उतरे ऑलराउंडर विजय शंकर भी दबाब का सामना नहीं कर पाये और गलत शॉट खेलकर अपना विकेट गंवा बैठे कुछ खास नहीं कर सके और वह 21 गेंदों पर 16 रन बनाकर चलते बने। अब देखना होगा कि अनुभवी दिनेश कार्तिक की धोनी के बैकअप के लिए वापसी होती है या नहीं।  

जहां तक एकदिवसीय रिकार्ड की बात है पिछले 2 साल में भारतीय टीम लक्ष्य का पीछा करते हुए 10 में से 7 मैच जीती है । जहां तक गेंदबाजी की बात है। भारत के जसप्रीत बुमराह, कुलदीप यादव और युजवेंद्र चहल उसमें आगे रहे पर हैरानी की बात है कि इसके बावजूद भारतीय टीम 350 से ज्यादा के स्कोर का बचाव करने में नाकाम रही जिससे उसकी क्षेत्ररक्षण की कमियां सामने आयी हैं।  

टीम ने कई कैच छोड़े जिसका खामियाजा भी उसे हार के रुप में उठाना पड़ा।  दूसरी ओर भारतीय टीम  273 रनों का लक्ष्य भी हासिल नहीं कर पाये। जिससे बेहतर बल्लेबाजी क्रम की भी पोल खुल गयी है। 

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