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बीयू के दो छात्रों के शोध ने बनाया खेती को आसान 

एक छात्र ने सस्ती व उन्नत जैविक खाद बनाई तो दूसरे ने किया मिटटी का शुद्घीकरण

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) के दो विद्यार्थियों ने अपने शोध के दम देश के करोडों किसानों के लिए खेती करने की राह को आसान बना दिया है। विवि के एक छात्र ने किसानों के लिए सस्ती व उन्नत जैविक खाद पर शोध कर उसका परीक्षण भी किया है तो एक अन्य छात्रा ने प्रदूषित मिट्टी का परीक्षण कर उसकी शुद्घीकरण कर खाद तैयार करने का तरीका इजाद किया है।

12 जनवरी को युवा दिवस के अवसर पर हम दो युवाओं की कहानी बयां कर रहे हैं, जिन्होंने देश व समाज के लिए शोध कर अपना योगदान दिया है। बीयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एक छात्र ने लाभदायक जीवाणुओं पर शोध कर ऐसी खाद बनाई है, जो छोटे किसानों के लिए कम खर्च में उपलब्ध हो सकेगी। वर्तमान में जो खाद बाजार में उपलब्ध है, वह महंगी होने के साथ ही फसलों की उत्पादकता में उतनी कारगर नहीं है, जितनी कि नए शोध में बनने वाली खाद उपयोगी होगी। इस पर काम रहे शोधार्थी गोविंद गुप्ता को विवि ने 26 दिसंबर को माइक्रोबायोलॉजी विषय में डॉक्टेरेट की अधिसूचना जारी की।

छात्र गोविंद गुप्ता का शोध कार्य लगातार प्रयोग हो रहे रसायनिक खादों के दुष्प्रभावों को रोकने के लिए जैविक खादों के प्रयोग को बढ़ावा देने पर आधारित है। उन्होंने बताया कि जैविक खाद के प्रयोग से छोटे किसानों को अधिक लाभ मिलेगा। अभी महंगी खाद खरीदने के लिए किसानों को कर्जा लेना पड़ता है, लेकिन तैयार किए गए जैविक खाद के प्रयोग से कम कीमत में अच्छी उपज मिल सकती है।

इससे जमीन और इंसान का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा और इसका कोई दुष्प्रभाव भी नही है। इस शोध को अभी सिर्फ गेंहू की फसल के लिए किया गया है। जल्द ही अन्य फसलों के लिए भी ऐसी ही खाद बनाने के लिए शोध किए जाएंगे। छात्र गोविंद गुप्ता ने होशंगाबाद क्षेत्र के विभिन्न गांवों से गेहूं कि फसल की मिट्टी से लाभदायक जीवाणुओं को प्राप्त किया।

उन्हें प्रयोगशाला में संवर्धन करके प्रबल सूक्ष्म जीवाणुओं को प्रयोगशाला में और विभाग की जमीन के अलग-अलग भाग पर रसायनिक एवं बाजार में मिलने वाले जैविक खादों के साथ प्रयोग पर शोध किया। इससे प्रबल सूक्ष्म जीवाणु तैयार किए। इस जैविक खाद से निर्मित भाग में अन्य भाग की तुलना में कई अधिक घने आकार के गेहूं के पौधे प्राप्त हुए।

बीयू की बायोटेक्नोलॉजी विभाग की छात्रा श्वेता साहू के शोध को राष्ट्रीय कांफ्रेंस में पोस्टर प्रतियोगिता में द्वितीय श्रेष्ठ पुरस्कार प्राप्त हुआ है। श्वेता ने अपने शोध के माध्यम से किसानों के लिए सस्ती दर में सूक्ष्मजीवों के माध्यम से खाद तैयार की है। छात्रा भोपाल के आस-पास के क्षेत्रों से चावल की फसल से मिट्टी इकठ्ठा कर उस पर प्रयोगशाला में प्रयोग कर रही हैं।उन्होंने भोपाल की प्रदूषित मिट्टी का परीक्षण एवं सूक्षमजीव द्वारा उसका शुद्घीकरण करने के तरीके को पोस्टर के जरिए दर्शाया है। 
 

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