< मां काली की पूजा के साथ मनाई जाती है रूप चौदस Hindi News - Breaking News, Latest News in Hindi, हिंदी में समाचार, Samachar - Bundelkhand News मंत्रों की सिद्धि तथा जप अनुष्ठान के साथ होगें विशेष आय"/>

मां काली की पूजा के साथ मनाई जाती है रूप चौदस

मंत्रों की सिद्धि तथा जप अनुष्ठान के साथ होगें विशेष आयोजन

कार्तिक कृष्ण चतुदर्शी चौदस को नरक चतुदर्शी तथा रूप चौदस भी कहा जाता है। इस दिन माता काली ने नरकासुर का वध किया था इसी से इस तिथि को बुराई पर भलाई की जीत में भी देखा जाता है।इसी छोटी दीपावली भी कहा जाता है। यमराज को जल तर्पण करने का अभी भी विधान है।

इसके साथ ही सौंदर्य को निखारने का दिन होने से इसे रूप चौदस के रूप में भी जाना जाता है। माना जाता है कि प्रात: से लेकर सायंकाल तक रूप चौदस उसके पश्चात् काली पूजन का विधान है।बंगाल में यह दिन काली चौदस के रूप में मनाया जाता है।

मंत्र सिद्धी

इस दिन मंत्रों की सिद्धी के लिए तांत्रिक लोग तंत्र-मंत्र करते है यही नही इस दिन अपने औजारों के भी पूजा या सिद्धी करते है।यही नही इस दिन बनाया गया काजल से खराब नजरों से बचा जाता है इसलिए काजल बनाने े लिए इस तिथि का चयन भी अनादि काल से किया जाता रहा है।

प्रात: से लेकर सायं तक रूप चौदस होने के कारण इस दिन तेल-मालिश करते हुए उपटन लगाए जाने की भी परंपरा रही है।इस दिन दक्षिण दिशा पर दीपक जलाने से यम का भय नही रहता तंत्रशास्त्र के अनुसार देवी काली का सर्वपरि है काली शब्द हिन्दी के काल से बना है। अर्थात् समय, काला रंग, मृत्युद्वेय, आदि का भय चला जाता है। कालसर्प योग भी मुक्ति के लिए यह दिन विशेष माना जाता है। 

अन्य खबर

चर्चित खबरें

Your Page has been visited    Times