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राफेल सौदे: आंतरिक चर्चा के मतभेद की आलोचना अनुचित

फ्रांस के साथ हुए राफेल फाइचर जेट सौदे पर छिड़े महाभारत के बीच रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि आंतरिक चर्चा में मतभेदों को असहमति नहीं कहा जा सकता है। केवल 36 राफेल विमानों के लिए ऑर्डर देने की आलोचना करना ठीक नहीं है क्योंकि 126 विमानों के ओरिजिनल ऑर्डर के बाकी विमान 'मेक इन इंडिया' प्रोसेस के तहत बनाए जाएंगे।

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक इंटरव्यू में यह बात कही। सीतारमण ने कहा, हमने एक के बजाय दो स्क्वॉड्रंस यानी 18 के बजाय 36 विमानों का ऑर्डर दिया। इससे पहले दैसॉ और एचएएल में अगर सहमति बन जाती तो 108 विमान बनाए जाने थे। उसके लिए हमने आरएफआई (ग्लोबल कॉम्पिटीशन) का रास्ता पकड़ा है। तो संख्या कहां कम हुई? उड़ान के लिए तैयार विमानों की बात करें तो हम पहले से ज्यादा हासिल कर रहे हैं।

रक्षा मंत्री ने बताया कि बुधवार को वह फ्रांस जा रही हैं, जहां वह एयर फोर्स और नौसेना की फैसिलिटीज देखेंगी और टॉप लीडरशिप से मुलाकात करेंगी। राफेल मसले पर मंत्री ने कहा कि नेगोशिएशन टीम के भीतर मतभेदों को चर्चा के समय ही दूर कर लिया गया था। 

सीतारमन ने कहा, चर्चा होती है तो अलग राय जताने वालों की बात का जवाब दिया जाता है। राफेल के मामले में अंतिम चर्चा के बाद सभी लोगों ने एक निर्णय किया था। सभी लोगों की बात कह रही हूं तो इसका मतलब यह है कि अलग राय रखने वाले भी उस निर्णय से राजी हुए थे। वह असहमति नहीं, मतभेद था। एयर फोर्स के लिए 126 विमानों की जरूरत के सामने 36 विमान ही खरीदे जाने के बारे में उन्होंने कहा कि संख्या घटाने का कोई सवाल ही नहीं है और मंत्रालय बाकी विमान एक ग्लोबल कॉम्पिटीशन के जरिए खरीदने पर काम कर रहा है। यह पूछे जाने पर कि क्या इस विवाद से इस प्रतिस्पर्धा के अलावा नेवी के लिए 57 लड़ाकू विमानों की खरीदारी में दैसॉ का चांस कमजोर हो जाएगा, सीतारमण ने कहा कि निर्णय मेरिट के आधार पर किया जाएगा।

लड़ाकू विमान बनाने की एचएएल की क्षमता पर मंत्री ने कहा कि आत्ममंथन इस पर होना चाहिए कि एचएएल सुखोई विमान को कॉम्पिटीटिव प्राइस पर क्यों नहीं बन सकी। उन्होंने कहा कि एचएएल में लागत बढ़ने के कारणों पर एक अध्ययन किया जा रहा है। सीतारमण ने कहा कि एस-400 डील राष्ट्र हित में की गई है और यह एयर डिफेंस सिस्टम भारत के लिए बहुत जरूरी था।

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