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देश में 52.4 फीसदी बुजुर्ग होते हैं उत्पीड़न के शिकार

बुजुर्गों के लिए काम करने वाली संस्था एजवेल रिसर्च एंड एडवोकेसी सेंटर के सर्वेक्षण में सामने आया है कि भारत में 52.4 फीसदी वृद्धजनों को अपने जीवन के अंतिम समय में उत्पीड़न और अभद्रता का शिकार होना पड़ता है। इससे बचने के लिए संस्था ने वृद्धजनों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत पर बल दिया। संयुक्त राष्ट्र के लिए किए गए इस सर्वेक्षण में कहा गया है कि ज्यादातर बुजुर्ग बढ़ती उम्र में परिस्थितियों के साथ समझौता करने को मजबूर हो जाते हैं। बुजुर्ग अपना बुढ़ापा बिना किसी दिक्कत के काट लें, इसके लिए उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत है। वित्तीय रूप से निर्भर होने की स्थिति में वे अपनी जरूरतें पूरी कर सकेंगे। इसके साथ ही उनकी सेवा करने वाले लोग भी उनके प्रति नम्र बने रहेंगे। एजवेल फाउंडेशन के संस्थापक हिमांशु रथ ने कहा कि प्राय: देखने में आता है कि जिन बुजुर्गों के पास अच्छा धन और संपत्ति होती है, उनकी बेहतर तरीके से देखभाल की जाती हैं।

यह सर्वेक्षण देश के 20 राज्यों में गत मई और जून के बीच कराया गया है। सर्वेक्षण के दौरान एजवेल के 300 से ज्यादा कार्यकर्ताओं ने दस हजार से ज्यादा बुजुर्गों से उनके स्वास्थ्य तथा उनकी देखभाल को लेकर उनकी  प्राथमिकताओं पर सवाल किए। जिन बुजुगों को सर्वेक्षण में शामिल किया गया, उनमें 56 प्रतिशत लोगों की उम्र 60 से 70 साल के बीच रही है, जबकि 30.2 प्रतिशत लोग 71 से 80 तथा 13.7 प्रतिशत 81 साल से ज्यादा उम्र के रहे हैं।

सर्वेक्षण में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जिन लोगों को सर्वेक्षण में शामिल किया गया, उनमें लगभग हर चौथा बुजुर्ग अकेला है और हर दूसरा अपने जीवनसाथी के साथ रहता है जबकि 26.5 प्रतिशत अपने बच्चों, परिवार के सदस्यों या वृद्धाश्रम में रहते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के 21.8 प्रतिशत की तुलना में 25.3 प्रतिशत बुजुर्ग शहरों में अकेले रहते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि उम्र के इस दौर में ज्यादातर बुजुर्ग अकेले रहना पसंद करते हैं या अपने जीवनसाथी के साथ रहना चाहते हैं। कई वृद्धजन परिवार में अपने बच्चों के साथ रहते हैं, लेकिन उनके रहने का कमरा तथा किचन अलग है। दरअसल, उम्र के इस दौर में वे अपने बच्चों तथा परिवार के अन्य सदस्यों के साथ घुलमिल नहीं पाते हैं, इसलिए अकेले रहना ज्यादा पसंद करते हैं। सर्वेक्षण में शामिल सर्वाधिक 88.5 प्रतिशत बुजुर्गों का कहना है कि बुढ़ापे में उनको स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं की सख्त जरूरत होती है, जबकि 74.1 प्रतिशत वृद्धों ने सामाजिक सहयोग की जरूरत पर जोर दिया है।

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