< बुनियादी समस्याओं पर केन्द्रित हो ध्यान Hindi News - Breaking News, Latest News in Hindi, हिंदी में समाचार, Samachar - Bundelkhand News जब हम सड़क पर चलते हैं तब सड़क को देखते हैं और दृष्टि सफर के गंतव्"/>

बुनियादी समस्याओं पर केन्द्रित हो ध्यान

जब हम सड़क पर चलते हैं तब सड़क को देखते हैं और दृष्टि सफर के गंतव्य की ओर होती है। यही जीवन है और जीवन की सार्थकता इसी में निहित है , यदि हम तमाम उन्माद व धर्मान्धता से परे बुनियादी समस्याओं की ओर दृष्टि रखें। असल में अभी हमारी मूल समस्याओं का अंत नहीं हुआ और जब तक मूल समस्याओं का अंत नहीं हो तब तक किसी भी धर्म की स्थापना होना महज एक कोरी कल्पना है।

समृद्धि के साथ धर्म की स्थापना स्वयं होने लगती है नाकि स्थापना करनी पड़ती है। धर्म तो कर्तव्यों का पालन करना और ईश्वर अर्थात एक शक्ति के प्रति विश्वास होना है। यह विश्वास तब तक कमजोर रहता है, जब तक रोजमर्रा की समस्याओं से निजात नहीं मिल जाती। चारो तरफ लूट - मार और हत्या की खबर के साथ इज्जत लूटने की खबरें प्रसारित हों तब तक किस धर्म के अस्तित्व की कल्पना की जा सकती है?

समाज समय के साथ स्वयं को बदलना नहीं चाहता और यही सूरत ए हाल संविधान के साथ भी है कि मौत होती रहें , कोई राज्य व स्थान श्मशान घाट बन जाए पर संविधान में व्यापक बदलाव के लिए कोई भी दल व व्यक्तिगत तौर से नेता प्रतिबद्ध ना दिखे ? सर पर ठोकर लगने से बेहतर है कि थोड़ा झुक जाएं और सभी झुक जाएं परंतु भारत जैसे राष्ट्र में इसका अभाव चौतरफा प्रतीत हो रहा है और धर्म - अधर्म का खेल जरूर खेलते हैं , बावजूद इसके बुनियादी समस्याओं से निजात पाने के उपाय वाली कोई योजना हमारे पास नहीं है और ना ही समय के साथ नियंत्रण पर विचार करते हैं। भले वह जनसंख्या नियंत्रण ही क्यों ना हो ?

हमारी प्रतिबद्धता रोजगार , स्वरोजगार , प्रेम , सद्भाव एवं उच्च जीवन स्तर की तरफ होनी चाहिए ताकि धर्म स्थापना स्वयं हो जाए। धर्म की विजय तब होगी जब जीवन में स्वतंत्रता एवं सुख महसूस करेंगे पर सवाल बुनियादी समस्याओं का ही है ?

About the Reporter

अन्य खबर

चर्चित खबरें