< खेतों में नरवई जलाने से पर्यावरण को बड़ा खतरा Hindi News - Breaking News, Latest News in Hindi, हिंदी में समाचार, Samachar - Bundelkhand News अंतरिक्ष में अलग नजर आती है भारत की हवा

खेतों में नरवई जलाने से पर्यावरण को बड़ा खतरा

अंतरिक्ष में अलग नजर आती है भारत की हवा

खेतों में नरवई जलाने से पर्यावरण को बड़ा खतरा हो सकता है। आपको जानकार हैरानी होगी कि अंतरिक्ष से भारत की हवा इसके आसपास के दक्षिण एशियाई देशों से अलग नजर आती है। क्या ये बढ़ते प्रदूषण का नतीजा है, अगर नहीं तो ऐसा क्यों है? दरअसल, यूरोप के नए उपग्रह सेंटनल-5पी ने भारत के ऊपर मौजूद वायुमंडल में काफी मात्रा में फॉर्मलडिहाइड मौजूद पाई है। इस फॉर्मलडिहाइड के कारण भारत की हवा पड़ोसी देशों से भिन्न है।

फॉर्मलडिहाइड एक रंगहीन यानी कलरलेस गैस है, जो वैसे तो प्राकृतिक तौर पर पेड़-पौधों और अन्य वनस्पतियों के जरिए छोड़ी जाती है। लेकिन इसके साथ-साथ प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों के कारण भी यह गैस पैदा होती है। सेंटनल-5पी उपग्रह ने ये पाया है कि भारत के ऊपर फॉर्मलडिहाइड गैस की मात्रा ज्यादा है। बता दें कि सेंटनल-5पी उपग्रह को पिछले साल अक्‍टूबर में दुनिया भर में हवा की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए लॉन्च किया गया था। ऐसा माना जा रहा है कि इस उपग्रह के जरिए जुटाई जा रही जानकारियों के माध्यम से वायुमंडल को साफ रखने के लिए नीतियां बनाने में मदद मिलेगी।

सेंटनल-5पी (एस5पी) को यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने यूरोपियन यूनियन के कॉपरनिकस अर्थ-मॉनिटरिंग कार्यक्रम के लिए लॉन्च किया था। इस उपग्रह में लगा ट्रोपोमी उपकरण वायुमंडल में फॉर्मलडिहाइड के अलावा नाइट्रोजन ऑक्साइड, ओजोन, सल्फर डाइऑक्साइड, मीथेन, कार्बन मोनॉक्साइड और एरोसोल्स (छोटे वाष्प या कण) के अंशों का पता लगा सकता है। ये सभी सांस लेने में दिक्कत पैदा करती हैं। इन्हें जलवायु परिवर्तन के लिए भी जिम्मेदार माना जाता है।

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