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धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक, कहें अलविदा

‘धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है’ यह चेतावनी सिगरेट, बीड़ी और गुटके के हर पाउच पर लिखी होती है इसके बाद भी पुरूष तो पुरूष महिलाएं भी धूम्रपान का आनन्द लेते पाये जाते है। क्या आवश्यकता है ऐसे क्षणिक आनन्द की जो भविष्य में गले की हड्डी बन जाये और हमारा जीना हराम कर दे। किसी भी प्रकार का नशा स्वास्थ्य की दृष्टि से हानिकारक ही होता है। तम्बाखू का बेहद नशीला पदार्थ निकोटिन हृदय और पेंâफड़ो को नुकसान पहुंचाता है, जिससे व्यक्ति की आयु निरंतर घटती जाती है। किसी भी रूप में नशा करने वाले व्यक्ति का जीवन २० से २५ वर्ष कम हो जाता है।

वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध के अनुसार धूम्रपान करने वाले ५० प्रतिशत व्यक्ति आयु से पहले ही वृद्ध दिखाई देने लगते हैं, ३० प्रतिशत अपनी कार्यशैली को प्रभावित करते है। तथा २० प्रतिशत अकाल मृत्यु की भेंट चढ़ जाते है। नशा करने से सांस और हृदय संबंधी रोगों से ग्रस्त व्यक्ति निरन्तर अपनी शरीरिक क्षमताएं खोता जाता है। नशे से पेâफड़ों का वैंâसर होने का अंदेशा रहता है। धूम्रपान के आदी और शौकिया धूम्रपान करने वालों पर अनेक शोध किए जा चुके है। शौकिया धूम्रपान करने वाले धीरे-धीरे इसके आदी हो जाते है।

नशे के आदी व्यक्ति की स्मरण शक्ति सुन्दरता और कार्य करने की शक्ति सब नशे पर कुर्बान हो जाते है। इसके साथ ही पारिवारिक जीवन भी प्रभावित होता है। परन्तु यह क्षणिक ही होता हैं। दीर्ध कालीन तो केवल नुकसान होते है। तम्बाखू निकोटिन, तम्बाखू से मिलने वाले सबसे बड़ा नशीला पदार्थ है जिसका उपयोग विश्व में सबसे अधिक मात्रा में भारत द्वारा किया जाता है। किए गए शोध के मुताबिक एक खराब लोगों मे लगभग २५० लाख लोग किसी न किसी प्रकार से तम्बाखू का सेवन करते है। इस व्यवसाय से सरकार को टैक्स जरूर प्राप्त होता है, परन्तु करोड़ों रुपया तम्बाखू का प्रयोग करने से उत्पन्न रोगों के उपचार में खर्च होता है।

धूम्रपान को रोकना आसान नहीं है। यह ऐसी लत है, जिसे डालने में तो बहुत कम समय लगता है, समझाइश के बाद व्यक्ति छोड़ तो देता है, पर शीघ्र ही पुनः इसकी गिरफ्त में आ जाता है। यदि धूम्रपान करने वाला स्वयं दृढ़ विश्वास कर ले तो यह निश्चित धूम्रपान से मुक्त होने की इच्छा शक्ति का निमार्ण करना होगा। तभी यह संभव है। फैफड़ो के रोगी अथवा हृदयघात की संभावना वाले व्यक्ति को यदि धूम्रपान करने से किसी भी प्रकार रोका जाये तो अगले कुछ ही घंटों में उसकी स्थिति सामान्य हो जाती है। और हार्ट अटैक का खतरा टल सकता है। तम्बाखू में जो निकोटिन नामक नशीला पदार्थ होता है वह शरीर में पहुंचते ही मस्तिष्क को तनाव से मुक्त करने लगता है, जिससे धूम्रपान कर्ता को चैन मिलता है। इससे वह कुछ पलों के लिए ही सही सुखका अनुभव करने लगता है। इसीलिए उसे पुनः धूम्रपान करने की इच्छा होती है और धीरे-धीरे वह उसका आदी हो जाता है।

नशे के सेवन को बढ़ाने में कुछ हद तक हमारा समाज, सरकार और सिनेमा जगत भी जिम्मेदार है। युवक जब पर्दे पर हीरो को सिगरेट के छल्लों के साथ डायलॉग बोलते देखते है तो उसे दोहराते है और इसी में वह धूम्रपान की गिरफ्त में आ जाते है।

शासन को सरकार चलाने के लिए धन की आवश्यकता होती है जो हमारे द्वारा दिए गए टैक्स से ही प्राप्त होता हैं। सबसे अधिक मात्रा में टैक्स नशे संबंधी सामग्रियों से प्राप्त होता है। अतः सरकार एक ओर नशे की रोकथाम संबंधी विज्ञापन करती है और दूसरी और टैक्स खाती है। इसी चक्कर में भोली -भाली जनता अपना जीवन बर्बाद कर रही है। अच्छा इन्सान बने। अपना जीवन और समय व्यर्थ के व्यसनों में बर्बाद न करें। शौकिया तौर पर धूम्रपान, नशा जो भी करना चाहें करें, परन्तु उसके गुलाम न बनें। किसी भी लत को डालना है तो पढ़ने, खाने, खेलने और अच्छा बनने की लत डालें। इससे आपका, आपके परिवार का समाज का और देश का भी कल्याण होगा।

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