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प्रभु प्रेम से प्रकट होते हैं सच्चे मन से करें स्मरण

मां के मंदिर पर चल रहे १०८ कुंडीय विष्णु महायज्ञ के तीसरे दिन श्रीमद भागवत कथा का आयोजन कथा व्यास विष्णु चेतन महाराज के श्रीमुख से किया गया। कथा में महाराज ने अमृतमयी शब्दों में बताया भगवान तो प्रेम से प्रकट होते हैं। सच्चे मन से भक्त अपने आराध्य को जहां भी पुकारता है प्रभु स्वयं ही वहां खिंचे चले आते हैं। महाराज ने बताया श्रीकृष्ण प्रेम के दीवाने हैं, उन्हें गोपियों के संग रासलीला और भक्तों के संग मधुर संगीत की धुन में रंग जाना भाता है।सुदामा चरित्र की कथा में भाव विभोर हुए श्रोता अकलौनी गांव में मठी मंदिर पर चल रही संगीतमय श्रीमद भागवत कथा के समापन अवसर पर भागवताचार्य पंडित अंबिका प्रसाद पचौरी ने श्रीकृष्ण सुदामा चरित्र का सुंदर विस्तृत वर्णन सुनाया।

कृष्ण-सुदामा की मित्रता की कथा सुनकर पंडाल में उपस्थित सैकड़ों भक्त भाव विभोर हो गए। सुदामा की दयनीय दशा और भगवान में निष्ठा के प्रसंग को सुनकर श्रद्धालुओं की आंखें भर आईं। उन्होंने बताया कि यदि सुदामा दरिद्र होते तो अनेक लिए धन की कोई कमी नहीं थी। सुदामा के पास विद्वता थी और धनार्जन तो सुदामा उससे भी कर सकते थे।मगर सुदामा पेट के लिए नहीं बल्कि आत्मा के लिए कर्म कर रहे थे। वे आत्म कल्याण के लिए उद्धत थे। उन्होंने कहा कि जिसे भागवत परम शांत ही कहती हो उसे कौन दरिद्र घोषित कर सकता है।

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