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यूपी सरकार की महापिछडा और महादलित की नीति

एससी-एसटी एक्ट के दुरूपयोग की कहानी , यूपी सरकार की महापिछडा और महादलित की नीति साकार हो सकती है

भारतीय संविधान की किसी भी व्यवस्था से कितने भी निराश हो जाएं तमाम विसंगतियों के बावजूद भी अंतिम विश्वास न्यायालय पर टिका हुआ है। संविधान के निर्माण में निर्मित कर्ताओं ने लोक कल्याण की सोच को सर्वोपरि रखा। समाज के कमजोर वर्ग को मुख्यधारा में लाने हेतु संकल्पबद्ध हैं। इस हेतु सामाजिक समानता एवं न्याय दिलाना मुख्य कार्य था। अनुसूचित जाति एवं जनजाति पर हो रहे अत्याचार को केन्द्र में रखकर न्याय हेतु अलग प्रावधान किया गया। उस समय तत्काल गिरफ्तारी का प्रावधान किया गया। एक लंबे अर्से से यह व्यवस्था आरक्षण के साथ समानांतर रूप से लागू रही। 

राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के साथ इन जातियों का भी विकास हुआ है , यह तय है। पहले से अधिक जागरूक हुए और शिक्षा का स्तर बढ़ा है। रोजगार की संभवानाएं विशुद्ध रूप से बढ़ीं एवं मजदूरी के लिए सरकार की मनरेगा सहित तमाम योजनाएं रहीं। इस सत्य से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि अभी भी इन जातियों के लोग विकास से अछूते हैं। चिंतन योग्य है कि एक व्यवस्था समान रूप से सबके विकास हेतु लागू थी तो इनका विकास क्यों नहीं हुआ ? जो इस बात से सहमत हैं , तो सवाल व्यवस्था पर खड़ा होता है ? जिस व्यवस्था से सम्पूर्ण अनुसूचित जाति एवं जनजाति का सर्वांगीण विकास नहीं हुआ और लोग अभी भी दूभर जीवन जी रहे हैं , ऐसे में व्यवस्था की खामियों के बारे में चिंतन करना चाहिए और चिंता करना चाहिए कि व्यवस्था का दुरूपयोग किनके द्वारा हो रहा है ? 

सर्वविदित है कि जाति के आधार पर आरक्षण से लाभान्वित परिवार की पीढ़ियां लगातार लाभान्वित हो रही हैं। ऐसे भी परिवार हैं , जिन्हें आज तक आरक्षण का लाभ लेने का अवसर नहीं मिला। जिन परिवार को आरक्षण का लाभ नहीं मिल सका , उन्हें आरक्षण का लाभ मिल सके इस ओर भी चिंतन करना होगा। यह कैसे होगा ? अगर व्यवस्था लागू कय देने भर से हो जाता तो सबको लाभ मिलता। 

आरक्षण जब लागू हुआ तब समय कुछ और था और आज का समय डिजिटल वर्ल्ड का है। समय स्वयं के अनुसार गतिमान रहा और लोग पिछड़ते गए। आधुनिक युग में रोजगार का वृहद क्षेत्र है। किन्तु वृहद क्षेत्र में वृहद योग्यता की आवश्यकता होती है। जिनमें योग्यता नहीं होगी , उन्हें सरकार लाभ अवश्य दे सकती है परंतु अयोग्य व्यक्ति को निजी संस्था में कब तक पाला पोषा जा सकता है। सरकार का कर्तव्य पोषाहार देना है , किन्तु निजी संस्थान का व्यक्ति लाभ चाहता है। उसे लाभ नहीं होगा तो निश्चित रूप से अयोग्य व्यक्ति को छुट्टी लेनी पड़ेगी। 

आरक्षण की वजह से बहुत सुधार हुआ एवं जातियों का विकास हुआ है , इसलिए योगी सरकार की महादलित और महापिछडा वाली नीति कारगर हो सकती है।

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