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पयस्वनी डायवर्जन समेत चेकडैमों में लगे फाटक: सिंह

कथा पुनीत पुराण बखानी, अत्रिप्रिया निज तप बल आनी। सुरसरि धार नाम मंदाकिनी जो सब पोतक पातक डाकिनी। देवगंगा मंदाकिनी के जल से ही जनपद में जल स्तर का निर्धारण होता है। यदि इस नदी में जल है तो कुए, तालाबों, हैण्डपम्पों, नलकूपों पर पेयजल उपलब्ध होगा। अगर जल समाप्त है तो पेयजल प्राप्त नहीं हो सकता। 

यह कथन पूर्व ब्लाक प्रमुख पहाडी आरडी सिंह एड ने व्यक्त करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में कहा कि देवगंगा मंदाकिनी मुस्लिम काल और ब्रिटिश काल में कभी नहीं सूखी। देश आजाद होने के बाद शासन-प्रशासन की गलत नीतियों के चलते नदी आज सूखने की कगार पर है। जिससे कुंए, तालाब, नलकूप, हैण्डपम्प पानी देना बंद कर दिये हैं। सभी के मूल में शासन व प्रशासन की नसमझी के चलते नदी में ग्राम बंधोइन के पास पयस्वनी डायवर्जन बनाया गया है। वर्षा के दौरान जब नदी में बाढ़ आती थी तो सारी गंदगी व प्रदूषित सामान बह जाता था।

डायवर्जन बनने के बाद लगभग 42 साल से नदी में पडी लाशे, पशुओं के कंकाल आदि प्रदूषित सामग्री बांध बनने से बह नहीं पाते। सडगल कर पानी को प्रदूषित कर रहे हैं। पूर्व में बाढ़ आने पर नदी की सिल्ट पानी के वेग के साथ बह जाती थी। बाढ आने पर चेकडैम में सिल्ट धीरे-धीरे डायवर्जन से लेकर रामघाट तक लगभग 15 फिट जमा हो गई। जिससे नदी के जलस्रोत बंद हो गए हैं। नदी में खरपतवार भी नहीं बह पाते। जिससे वह दिनप्रतिदिन बढ रहे हैं। ऐसे में नदी का जल प्रदूषित हो गया है। डायवर्जन बनने से नदी का पानी नहर बनाकर डायवर्ट कर दिया गया है। इसके आगे लगभग 70 किमी नदी के जलस्रोत सूख चुके हैं। कुए, तालाब, हैण्डपम्प, नलकूपों से पानी नहीं किल रहा। नदी किनारे बसे गांवों में त्रांहि-त्राहि मची है। उन्होंने भेजे गए पत्र में कहा कि नदी के पानी पर सभी नैसर्गिक अधिकार है। बनाए गए डायवर्जन व चेकडैमों पर फाटक लगाये जाये जो वर्षाकाल के समय खोले। जिससे कंकाल, सिल्ट, खरपतवार का बहाव हो सके। बताया कि नदी की सफाई अब मैन पावर से संभव नहीं है।

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  • राजकुमार याज्ञिक

    चित्रकूट जनपद के ब्यूरो चीफ एवं भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के जिलाध्यक्ष राजकुमार याज्ञिक चित्रकूट जनपद के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। पत्रकारिता में स्नातक श्री याज्ञिक मुख्यतः सामाजिक व राजनीतिक मुद्दों पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं।, .

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