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गुरु के बिना भगवान भी अधूरे: रामसागर

भागवत कथा सुन श्रोता हुए भावविभोर

रैपुरा स्थित गर्ग निवास में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के 6वें दिन कथाव्यास आचार्य रामसागर महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण का ब्रजवासियों से प्रेम-लगाव की मार्मिक कथा सुनाई।

उन्होंने कहा कि बृजवासियों से भगवान कृष्ण अथाह प्रेम करते थे, परन्तु जब उन्हें कंस के अत्याचारों के बारे में पता चला तो धर्म एवं मानवता की रक्षा के लिये भगवान ने एक पल की भी देरी नहीं की और अक्रूर के संग ब्रजवासियों के प्रेम की परवाह न करते हुये चल दिये। कंस इत्यादि दैत्यों का अंत किया और सभी मथुरावासियों का कष्ट दूर किया। भगवान समर्थवान होते हुये भी संदीपन गुरू के यहां शिक्षा ग्रहण करने गये और संसार को यह उपदेश दिया कि व्यक्ति कितना भी महान हो उसे गुरू की आवश्यकता होती है। बिना गुरू के भगवान भी अधूरे हैं। आचार्य रामसागर ने आगे कहा कि भगवान कृष्ण ने युद्ध में जरासंध को 17 बार युद्ध में पराजित किया। फिर भी 18वीं बार ब्राम्हणों की रक्षा के लिये स्वयं पराजित होकर रणछोड नाम ग्रहण करते हैं। इस कथा से महाराज श्री ने बताया कि संतों और ब्राम्हणों की रक्षा के लिये अपनी मर्यादा का भी प्रभू त्याग कर देते हैं। मुचुकुन्द पर कृपा, कालयवन बध इत्यादि पर चर्चा और स्वयं द्वारिकापुरी जाकर द्वारिकाधीश बने। कथा के अन्त में रूकमिनी और श्रीकृष्ण के विवाह की कथा का वर्णन किया। इस मौके पर सुन्दर मांगलिक भजनों के साथ श्रोताओं ने कथा का आनन्द लिया। संगीतमयी कथा को सुन्दर बनाने में सुशील त्रिपाठी, पंकज त्रिपाठी, अरविन्द शास्त्री, भगवत का सराहनीय सहयोग रहा। इस दौरान जयप्रकाश शुक्ला, विजय प्रकाश शुक्ला, ओम शुक्ल, विवेक शुक्ल, अभिनव शुक्ल आदि दर्जनों श्रोतागण मौजूद रहे।

कथा का हुआ समापन

मुख्यालय स्थित चित्रगुप्त मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के सातवे दिन भागवताचार्य उमाकांत शास्त्री ने सुदामा-कृष्ण चरित्र का रसपान कराया। बताया कि आज के समय में सच्चे मित्र बहुत कम मिलते हैं। कृष्ण और सुदामा की मित्रता आज भी अमर है। उन्होंने मित्रता का सच्चा अर्थ बताकर भगवान और भक्त की महिमा का बखान किया। कहा कि सच्चा मित्र वही है जो दुख के समय साथ दे। कहा कि अच्छे करो तुम कर्म, जीवन का यही धर्म को विस्तृत रूप से बताया। आज अधिकांश मित्र दुख के समय दगा कर जाते हैं। इस मौके पर रमाशंकर श्रीवास्तव, मीना श्रीवास्तव, केके माथुर, मनोरमा, अर्चना, संजय गर्ग, मुनेश निगम, बाबा रामदास, सुनील, रमेश आदि मौजूद रहे।

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